Culture

मोबाइल फोन से गूंज रही फहमीद की आवाज़, अंतरराष्ट्रीय रॉक बैंड भी हुए मुरीद

संगीत की दुनिया में पहचान बनाने के लिए अब बड़े स्टूडियो, महंगे उपकरण और किसी नामी संगीत कंपनी का सहारा होना जरूरी नहीं रह गया है। कभी-कभी एक साधारण मोबाइल फोन भी किसी कलाकार की आवाज़ को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचा सकता है। बांग्लादेश के युवा गायक गाज़ी फहमीदुर रहमान की कहानी इसकी मिसाल है। वह न तो किसी बड़े रिकॉर्डिंग स्टूडियो में गाने रिकॉर्ड करते हैं और न ही उनके पास संगीत की दुनिया में पहचान बनाने के लिए कोई बड़ा मंच है। वह अपने मोबाइल फोन के सामने बैठकर गाते हैं और अपने वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा कर देते हैं। लेकिन उनकी आवाज़ में ऐसा अनोखापन है कि दुनिया के कई मशहूर रॉक बैंड और अंतरराष्ट्रीय संगीत सितारे भी उनके मुरीद हो गए हैं।

गाज़ी फहमीदुर रहमान की पहचान सोशल मीडिया पर ‘गाज़ी स्क्रीम्स’ के नाम से है। उनके इंस्टाग्राम पेज पर दुनिया भर के संगीत प्रेमी उनके कवर सॉन्ग और खास अंदाज में गाए गए रॉक गीत सुनते हैं। उनकी गायकी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी दमदार आवाज़ और स्क्रीमिंग तकनीक है। वह मशहूर रॉक और मेटल गीतों को अपने अलग अंदाज में पेश करते हैं। यही वजह है कि उनके छोटे-छोटे वीडियो तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

उनकी प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के चर्चित रॉक बैंड ‘ब्रेकिंग बेंजामिन’ ने न केवल उन्हें इंस्टाग्राम पर फॉलो किया है, बल्कि उनकी पोस्ट पर प्रतिक्रिया भी दी है। इसके अलावा द वीकेंड, ऐनी-मैरी और सीथर जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने भी उनके वीडियो पर दिलचस्पी दिखाई है। SZA और लुईस कैपाल्डी ने तो उनकी सामग्री को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में भी साझा किया है।

फहमीद के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है। जिन कलाकारों और बैंडों को सुनते हुए उन्होंने संगीत की दुनिया में कदम रखा, आज वही उनके काम को देख रहे हैं और उनकी आवाज़ की तारीफ कर रहे हैं।

बॉलीवुड अभिनेता आदित्य रॉय कपूर से भी हुई बातचीत

फहमीद की लोकप्रियता केवल अंतरराष्ट्रीय संगीत जगत तक सीमित नहीं है। उनकी आवाज़ बॉलीवुड तक भी पहुंच चुकी है। उन्होंने अभिनेता आदित्य रॉय कपूर से बातचीत की है। आदित्य रॉय कपूर भी उन्हें इंस्टाग्राम पर फॉलो करते हैं। इसके अलावा फहमीद की बातचीत कुछ अंतरराष्ट्रीय हास्य कलाकारों से भी हुई है।

इन अनुभवों के बारे में वह कहते हैं कि उनके लिए सबसे सुखद पल वह होता है, जब बचपन से जिन लोगों के काम को देखते और सुनते आए हैं, वे उनके संगीत में दिलचस्पी दिखाते हैं। वह इसे अपने लिए बड़ी उपलब्धि मानते हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई कलाकारों के गाने गाए बिना ही उन्हें उनकी सराहना मिल रही है।

संगीत के माहौल में बीता बचपन

गाज़ी फहमीदुर रहमान का संगीत से रिश्ता नया नहीं है। उनके पिता गाज़ी मौदुदुर रहमान संगीत निर्देशक और कलाकार हैं। उनके बड़े भाई गाज़ी मौयिदुर रहमान भी संगीत का अभ्यास करते हैं। इस तरह उन्हें बचपन से ही घर में संगीत का माहौल मिला। हालांकि, उस समय उनकी संगीत में खास दिलचस्पी नहीं थी।

फहमीद बताते हैं कि बचपन में वह बेहद शर्मीले थे। उन्हें हारमोनियम के सामने बैठाना भी आसान नहीं था। उनके पिता और बड़े भाई ने किसी तरह उन्हें संगीत की शुरुआती शिक्षा दी। उनके बड़े भाई ने ही हारमोनियम पर उनके जीवन का पहला गीत तैयार किया था।

हालांकि, उस समय किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि यही संकोची बच्चा आगे चलकर अपनी तेज आवाज़ और रॉक संगीत के अनोखे अंदाज से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएगा।

फहमीद मजाकिया अंदाज में बताते हैं कि जब उन्होंने चीखकर गाना और रॉक संगीत का अभ्यास शुरू किया तो घर के लोगों और पड़ोसियों के लिए यह एक अलग ही अनुभव था। उनकी मां आज उनकी सफलता पर गर्व करती हैं, लेकिन शुरुआती दिनों में उनके शोर से परेशान होकर झाड़ू लेकर उनके पीछे दौड़ती थीं।

दस साल तक संगीत से दूर रहे

बचपन में संगीत की शुरुआती शिक्षा लेने के बाद फहमीद करीब दस वर्षों तक संगीत से दूर रहे। इस दौरान संगीत उनके जीवन का प्रमुख हिस्सा नहीं था। बाद में उन्हें अपने बड़े भाई का पुराना गिटार मिला। इसी गिटार ने उनके भीतर संगीत के प्रति रुचि को फिर से जगाया।

उन्होंने खुद से गिटार बजाना और संगीत तैयार करना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी बढ़ने लगी। इसी दौरान उनका परिचय रॉक संगीत की दुनिया से हुआ। रॉक संगीत ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया।

उनकी संगीत यात्रा पर कई अंतरराष्ट्रीय बैंडों का गहरा प्रभाव रहा है। इनमें लिंकिन पार्क, आयरन मेडेन, सिस्टम ऑफ ए डाउन और इवैनेसेन्स प्रमुख हैं। इन बैंडों के संगीत ने उन्हें अपनी गायकी का अलग अंदाज विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

बांग्लादेश के संगीत जगत में आर्टसेल और वॉरफेज जैसे बैंड भी उनके पसंदीदा रहे हैं। वहीं, गिटार बजाने की प्रेरणा उन्हें ड्रीम थिएटर से मिली।

हालांकि, फहमीद खुद को केवल रॉक और मेटल संगीत तक सीमित नहीं रखना चाहते। उन्हें शास्त्रीय संगीत में भी दिलचस्पी है। वह समय मिलने पर इसका अभ्यास करते हैं। लेकिन फिलहाल उन्होंने शास्त्रीय संगीत से जुड़े अपने अभ्यास को सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया है।

अपनी प्रतिभा दूसरों के साथ भी बांट रहे हैं

फहमीद के लिए संगीत केवल अपनी पहचान बनाने का माध्यम नहीं है। वह अपनी जानकारी और अनुभव दूसरे लोगों के साथ भी साझा करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से वह उन लोगों की मदद करते हैं जो अपनी गायकी सुधारना चाहते हैं या आवाज़ से जुड़ी तकनीकी समस्याओं पर काम कर रहे हैं।

हालांकि, वह इसे संगीत विद्यालय या औपचारिक प्रशिक्षण संस्थान का नाम नहीं देना चाहते। उनके अनुसार, वह अपनी सीख और अनुभव को दूसरे इच्छुक लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

वह कहते हैं कि अल्लाह ने उन्हें गायन की प्रतिभा दी है। अपने प्रदर्शन और अभ्यास के दौरान वह जो कुछ सीखते हैं, उसे दूसरों के साथ साझा करना उन्हें अच्छा लगता है।

बांग्लादेश के कई बैंड संगीतकारों से भी उनके अच्छे संबंध हैं। कुछ संगीतकारों ने उन्हें अपने बैंड से जुड़ने की इच्छा जताई है। हालांकि, फहमीद ने इन लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, क्योंकि अभी तक ये औपचारिक प्रस्ताव नहीं हैं। वह अपने देश के संगीतकारों से मिलने वाले प्यार और प्रोत्साहन को भी अपनी बड़ी उपलब्धि मानते हैं।

कवर सॉन्ग से आगे मौलिक संगीत की तलाश

सोशल मीडिया पर मिली लोकप्रियता के बावजूद फहमीद अपनी मौजूदा पहचान से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। वह जानते हैं कि किसी कलाकार की स्थायी पहचान उसके अपने मौलिक संगीत से बनती है। कवर सॉन्ग के जरिए उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों तक अपनी आवाज़ पहुंचाई है, लेकिन अब वह अपने गीतों के माध्यम से संगीत की दुनिया में अलग मुकाम बनाना चाहते हैं।

उनका मानना है कि दूसरे कलाकारों के गीत गाकर लोकप्रियता हासिल करना अच्छी बात है, लेकिन अपनी रचनाएं तैयार करना किसी भी संगीतकार के लिए बेहद जरूरी है। वह कवर सॉन्ग के साथ-साथ मौलिक गीतों पर भी काम कर रहे हैं।

फहमीद कहते हैं कि कवर गीतों ने उन्हें बहुत सारे लोगों तक पहुंचने का अवसर दिया है। लेकिन यदि वह अपने मौलिक गीत तैयार नहीं कर पाए तो उनकी संगीत यात्रा अधूरी रह जाएगी।

उनका सपना एक ऐसे संगीतकार के रूप में पहचान बनाना है, जिसके गीत समय के साथ भी अपनी अहमियत बनाए रखें। वह चाहते हैं कि आज जो गीत तैयार करें, उसे दस साल बाद भी उसी उत्साह और खुशी के साथ सुन सकें।

फिलहाल गाज़ी फहमीदुर रहमान की आवाज़ मोबाइल फोन के जरिए दुनिया भर के संगीत प्रेमियों तक पहुंच रही है। उनकी कहानी बताती है कि प्रतिभा को सामने आने के लिए हमेशा बड़े मंच की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी एक साधारण शुरुआत भी अंतरराष्ट्रीय पहचान का रास्ता खोल सकती है। अब देखना यह है कि सोशल मीडिया पर अपनी चीखों से पहचान बनाने वाला यह युवा कलाकार अपने मौलिक संगीत के जरिए दुनिया को कब अपना नया अंदाज सुनाता है।

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