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अभिजीत भट्टाचार्य ने नुसरत फतेह अली खान का किया अपमान, सोशल मीडिया पर बवाल

नौशाद अख्तर, नई दिल्ली।

बॉलीवुड के मशहूर पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य एक बार फिर अपने विवादित बयान और व्यवहार को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उनके निशाने पर पाकिस्तान के महान सूफी गायक उस्ताद नुसरत फतेह अली खान आ गए हैं। एक टेलीविजन कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तानी गायकों की तस्वीरें दिखाकर उनसे पसंदीदा गायक के बारे में पूछा गया। इसके जवाब में अभिजीत ने जो किया, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस घटना के बाद संगीत प्रेमियों और सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने उनके व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई है।

मामला टीवी9 भारतवर्ष के एक कार्यक्रम से जुड़ा बताया जा रहा है। कार्यक्रम में अभिजीत भट्टाचार्य को पाकिस्तान के तीन गायकों की तस्वीरें दिखाई गईं। उनसे पूछा गया कि इन तीनों में सबसे बेहतर गायक कौन है। इस सवाल के जवाब में अभिजीत ने अपना जूता उतारा और उसे फर्श पर झाड़ते हुए आगे बढ़ने की बात कही। उन्होंने अपने इस हावभाव को ही अपना जवाब बताया।

इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आलोचकों का कहना है कि किसी कलाकार की गायकी या उसके देश को लेकर असहमति हो सकती है, लेकिन संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले किसी महान कलाकार के प्रति इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। खासकर नुसरत फतेह अली खान जैसे गायक के संदर्भ में इस हावभाव को कई लोगों ने अपमानजनक माना है।

नुसरत फतेह अली खान को लेकर अभिजीत के व्यवहार पर सवाल

अभिजीत भट्टाचार्य की इस हरकत को लेकर एक्स पर बिट्टू शर्मा नाम के यूजर ने एक पोस्ट साझा की। उन्होंने अभिजीत के व्यवहार की आलोचना करते हुए लिखा कि अभिजीत अच्छे गायक भले रहे हों, लेकिन उनका यह व्यवहार बेहद निराशाजनक है।

बिट्टू शर्मा ने अपनी पोस्ट में बताया कि टीवी9 के स्टूडियो में अभिजीत को पाकिस्तान के तीन गायकों की तस्वीरें दिखाई गई थीं। उनसे पूछा गया था कि इनमें सबसे बेहतर गायक कौन है। इसके जवाब में उन्होंने जूता उतारकर फर्श पर झाड़ दिया और आगे बढ़ने की बात कही।

पोस्ट में बिट्टू शर्मा ने विशेष रूप से उस्ताद नुसरत फतेह अली खान का उल्लेख किया। उनका कहना था कि नुसरत जैसे महान कलाकार की तुलना में अभिजीत की यह प्रतिक्रिया बेहद छोटी सोच को दर्शाती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस गायक की आवाज और गायकी को दुनिया भर में सम्मान मिला, उसके प्रति इस तरह का हावभाव आखिर किस मानसिकता को दिखाता है।

बिट्टू शर्मा ने अपनी पोस्ट में अभिजीत की राजनीतिक सोच पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विचारधारा के प्रति अत्यधिक लगाव ने उनके व्यवहार को प्रभावित किया है। हालांकि, यह उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी है। इस घटना पर प्रतिक्रिया देने वाले सभी लोग इस राजनीतिक व्याख्या से सहमत नहीं हैं।

सोशल मीडिया पर संगीत प्रेमियों की तीखी प्रतिक्रिया

अभिजीत भट्टाचार्य के इस व्यवहार के बाद एक्स पर अलग-अलग विचार सामने आए। कई लोगों ने उनके हावभाव को नुसरत फतेह अली खान का अपमान बताया। वहीं कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि किसी कलाकार की पहचान उसकी गायकी से होनी चाहिए, न कि उसकी राष्ट्रीयता या राजनीतिक विचारों से।

हसन आरिफ नाम के यूजर ने लिखा कि किसी गायक की असली पहचान उसकी आवाज और कला होती है। उसकी राजनीतिक सोच से किसी को असहमति हो सकती है, लेकिन नुसरत फतेह अली खान जैसे महान कलाकार का अपमान करना अलग बात है। उन्होंने कहा कि संगीत को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।

एक अन्य यूजर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि नफरत इंसान को केवल अंधा नहीं करती, बल्कि उसके विवेक को भी प्रभावित करती है। उनके अनुसार, कलाकारों को भाषा और देश की सीमाओं में बांधकर नहीं देखा जाना चाहिए। सच्चे कलाकारों को उनकी कला के कारण पीढ़ियां याद रखती हैं।

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने अभिजीत के पुराने फिल्मी करियर और उनकी गायकी को लेकर भी टिप्पणियां कीं। कुछ यूजर्स ने उन्हें लोकप्रियता हासिल करने के लिए विवाद खड़ा करने वाला कलाकार बताया। हालांकि, ऐसी टिप्पणियां व्यक्तिगत प्रतिक्रियाएं हैं और इन्हें उनके पूरे संगीत करियर का निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं माना जा सकता।

नुसरत फतेह अली खान की गायकी का दुनिया भर में सम्मान

इस विवाद के केंद्र में मौजूद उस्ताद नुसरत फतेह अली खान केवल पाकिस्तान के लोकप्रिय गायक नहीं थे। वे सूफी संगीत और कव्वाली की दुनिया के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में गिने जाते हैं। उनकी आवाज ने भारतीय उपमहाद्वीप से लेकर यूरोप और अमेरिका तक संगीत प्रेमियों को प्रभावित किया।

नुसरत फतेह अली खान ने पारंपरिक कव्वाली को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी गायकी में शास्त्रीय संगीत, सूफी परंपरा और लोक संगीत का अनूठा मेल देखने को मिलता था। उन्होंने कई भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उनकी प्रस्तुतियों में आध्यात्मिकता, भावनाओं की गहराई और संगीत की विशिष्ट शैली दिखाई देती थी।

भारतीय संगीत जगत में भी नुसरत फतेह अली खान का प्रभाव व्यापक रहा है। उनके संगीत और रचनाओं से बॉलीवुड के कई संगीतकारों और गायकों ने प्रेरणा ली। उनके लोकप्रिय गीतों और धुनों का इस्तेमाल भारतीय फिल्मों में भी हुआ। उनके संगीत को नए रूप में पेश करके कई फिल्मों और एल्बमों ने लोकप्रियता हासिल की।

यही वजह है कि नुसरत फतेह अली खान को लेकर की गई किसी भी अपमानजनक टिप्पणी या व्यवहार पर संगीत प्रेमियों की प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से तीखी हो सकती है। उनके प्रशंसकों के लिए वे केवल एक पाकिस्तानी कलाकार नहीं, बल्कि उपमहाद्वीप की साझा सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

कला और संगीत को राजनीति से ऊपर रखने की मांग

अभिजीत भट्टाचार्य की इस घटना ने एक बार फिर कला, राष्ट्रवाद और भारत-पाकिस्तान संबंधों के बीच कलाकारों की भूमिका पर बहस छेड़ दी है। भारत और पाकिस्तान के राजनीतिक संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं। इसके बावजूद संगीत, साहित्य, सिनेमा और खेल ने कई बार दोनों समाजों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम किया है।

कला को अक्सर सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति का माध्यम माना जाता है। संगीत की कोई एक भाषा या राष्ट्रीय सीमा नहीं होती। एक देश का कलाकार दूसरे देश में भी उतना ही लोकप्रिय हो सकता है। नुसरत फतेह अली खान इसका बड़ा उदाहरण हैं। भारत में उनके प्रशंसकों की संख्या बहुत अधिक रही है। उनकी कव्वालियां आज भी श्रोताओं के बीच लोकप्रिय हैं।

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसी आधार पर अभिजीत के व्यवहार की आलोचना की। उनका कहना है कि किसी पाकिस्तानी गायक की कला को पसंद करना भारतीय होने के खिलाफ नहीं है। इसी तरह किसी भारतीय कलाकार का सम्मान करने के लिए दूसरे देश के कलाकार को नीचा दिखाने की जरूरत नहीं है।

हालांकि, इस बहस में एक दूसरा पक्ष भी सामने आया। उत्तम चक्रवर्ती नाम के यूजर ने अभिजीत के व्यवहार का समर्थन करते हुए सवाल उठाया कि भारतीय टेलीविजन चैनल ने उनसे पाकिस्तान के तीन गायकों की तुलना क्यों कराई। उनके अनुसार, चैनल भारतीय गायकों के बीच भी ऐसी तुलना कर सकता था। इस टिप्पणी ने कार्यक्रम के प्रारूप और एंकर की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।

अभिजीत के पुराने विवाद भी चर्चा में

अभिजीत भट्टाचार्य पहले भी अपने बयानों और राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर विवादों में रहे हैं। बॉलीवुड के कुछ प्रमुख कलाकारों, विशेषकर खान उपनाम वाले अभिनेताओं के प्रति उनकी टिप्पणियां समय-समय पर चर्चा का विषय बनी हैं। वे कई मौकों पर फिल्म उद्योग के कुछ बड़े नामों और पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।

उनकी राजनीतिक और राष्ट्रवादी विचारधारा को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस होती रही है। समर्थक उनके विचारों को राष्ट्रहित से जोड़कर देखते हैं, जबकि आलोचक इसे कला और मनोरंजन की दुनिया में अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप मानते हैं।

ताजा विवाद में भी कुछ यूजर्स ने उनके पुराने बयानों का उल्लेख किया। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि किसी कलाकार के राजनीतिक विचारों से असहमति होने पर भी उसकी गायकी का मूल्यांकन अलग तरीके से होना चाहिए।

टीवी चैनल की भूमिका पर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले में केवल अभिजीत भट्टाचार्य का व्यवहार ही चर्चा में नहीं है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने टीवी9 के कार्यक्रम की प्रस्तुति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान के तीन गायकों की तस्वीरें दिखाकर इस तरह का सवाल पूछने के पीछे कार्यक्रम की क्या मंशा थी।

कुछ लोगों ने इसे जानबूझकर विवाद पैदा करने वाला सवाल बताया। हालांकि, उपलब्ध सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि कार्यक्रम पहले से किसी विवाद की योजना बनाकर तैयार किया गया था।

इसलिए इस घटना में चैनल की भूमिका और कार्यक्रम की मंशा पर भी निष्पक्ष चर्चा जरूरी है। किसी भी टेलीविजन कार्यक्रम में सवाल पूछने की स्वतंत्रता होती है, लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कलाकारों के बीच तुलना को किस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है।

कलाकार की पहचान उसकी कला से होनी चाहिए

अभिजीत भट्टाचार्य और नुसरत फतेह अली खान से जुड़ा यह विवाद एक बार फिर याद दिलाता है कि संगीत की दुनिया राजनीतिक सीमाओं से कहीं बड़ी है। कलाकारों के विचार अलग हो सकते हैं। उनकी राष्ट्रीयता भी अलग हो सकती है। लेकिन उनकी कला का मूल्यांकन इन बातों से अलग होना चाहिए।

नुसरत फतेह अली खान ने अपनी गायकी से दुनिया भर में पहचान बनाई। उनकी आवाज आज भी भारत, पाकिस्तान और दूसरे देशों में सुनी जाती है। दूसरी ओर अभिजीत भट्टाचार्य भी हिंदी फिल्म संगीत के लोकप्रिय पार्श्व गायकों में रहे हैं। दोनों कलाकारों की संगीत यात्रा और पहचान अलग-अलग है।

ऐसे में किसी एक कलाकार को बड़ा साबित करने के लिए दूसरे का अपमान करना संगीत की परंपरा के अनुरूप नहीं है। सोशल मीडिया पर उठी नाराजगी का एक बड़ा हिस्सा भी इसी बात को रेखांकित करता है। आखिरकार, संगीत की ताकत लोगों को जोड़ने में है, उन्हें राष्ट्रीयता और राजनीतिक विचारधारा के आधार पर बांटने में नहीं।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (AEO)

1. अभिजीत भट्टाचार्य को लेकर नया विवाद क्या है?

अभिजीत भट्टाचार्य ने एक टीवी कार्यक्रम में पाकिस्तान के तीन गायकों की तस्वीरें दिखाए जाने पर अपना जूता उतारकर फर्श पर झाड़ा। इस व्यवहार को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपमानजनक बताया।

2. अभिजीत भट्टाचार्य ने किस पाकिस्तानी गायक को लेकर विवादित व्यवहार किया?

इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर विशेष रूप से मशहूर सूफी गायक उस्ताद नुसरत फतेह अली खान का नाम चर्चा में है।

3. नुसरत फतेह अली खान कौन थे?

नुसरत फतेह अली खान पाकिस्तान के विश्वप्रसिद्ध सूफी गायक और कव्वाल थे। उन्होंने कव्वाली को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

4. अभिजीत भट्टाचार्य के व्यवहार पर सोशल मीडिया की क्या प्रतिक्रिया रही?

कई यूजर्स ने उनके व्यवहार की आलोचना की और कहा कि संगीत को राजनीति तथा राष्ट्रीय सीमाओं से ऊपर रखा जाना चाहिए। कुछ लोगों ने टीवी चैनल के सवाल पूछने के तरीके पर भी आपत्ति जताई।

5. इस विवाद में टीवी9 की क्या भूमिका है?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, टीवी9 के एक कार्यक्रम में अभिजीत को पाकिस्तान के तीन गायकों की तस्वीरें दिखाकर उनसे पसंदीदा गायक के बारे में पूछा गया था। कार्यक्रम की प्रस्तुति को लेकर भी कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए हैं।

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