Culture

सुरों का संगम: भारतीय शास्त्रीय संगीत और यूएई राष्ट्रगान ने रची एकता की मिसाल

दुबई | विशेष संवाददाता

जब कला सीमाओं को लांघकर दिलों को जोड़ने का जरिया बन जाती है, तो वह केवल एक प्रदर्शन नहीं रह जाती, बल्कि एक ऐतिहासिक क्षण बन जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा हाल ही में दुबई में देखने को मिला, जहाँ भारतीय शास्त्रीय वाद्यों की मधुर धुनों पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रगान ‘इशी बिलादी’ की प्रस्तुति ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है।

दुबई स्थित भारतीय कला केंद्र ‘मल्हार’ के 13 छात्रों द्वारा तैयार किए गए इस वीडियो ने न केवल अमीरात में रहने वाले प्रवासियों को भावुक कर दिया है, बल्कि यह भारत और यूएई के बीच गहरे होते सांस्कृतिक रिश्तों की एक जीवंत तस्वीर बनकर उभरा है।


सादगी में छिपी गहरी संवेदना

इस वायरल वीडियो की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सादगी है। एक शांत सफेद बैकग्राउंड के सामने, सफेद भारतीय पारंपरिक परिधानों में सजे ये छात्र यूएई के ध्वज के रंगों वाले स्कार्फ पहने नजर आते हैं। यहाँ कोई चमक-धमक या स्पेशल इफेक्ट्स नहीं हैं, बल्कि केवल शुद्ध संगीत और समर्पण है।

लेकिन जैसे ही संगीत शुरू होता है, दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यूएई का राष्ट्रगान, जिसे आमतौर पर ऑर्केस्ट्रा या मार्चिंग बैंड पर सुना जाता है, उसे पहली बार भारतीय शास्त्रीय वाद्ययंत्रों के अनूठे मेल के साथ प्रस्तुत किया गया। इसमें शामिल वाद्ययंत्रों की फेहरिस्त ही इसकी भव्यता बयां करती है:

  • हार्मोनियम और बांसुरी की कोमल तान।
  • सितार और सरोद के तारों की झंकार।
  • तबला, तबला तरंग, ढोलक और पखावज की गूँजती ताल।
  • जलतरंग की खनकती स्वर लहरियां।

इन वाद्ययंत्रों के माध्यम से जब राष्ट्रगान की धुन निकली, तो उसमें भारतीय शास्त्रीय परंपरा की गहराई और अमीराती पहचान का गौरव एक साथ महसूस किया गया।


प्रेरणा: “यूएई में हम सब अमीराती हैं”

मल्हार के संस्थापक और निदेशक जोगीराज सिकिदार, जो पिछले दो दशकों से अधिक समय से दुबई में रह रहे हैं, इस विचार के पीछे के सूत्रधार हैं। उन्होंने बताया कि यह विचार एक ऐसे समय में आया जब दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही थी।

सिकिदार कहते हैं, “वह हम सभी के लिए एक तनावपूर्ण समय था। लेकिन हमने देखा कि यूएई के अधिकारी यहाँ रहने वाले हर निवासी का ख्याल कितनी शिद्दत से रख रहे हैं। उसी दौरान मैंने हाईवे पर एक होर्डिंग देखी जिस पर लिखा था, ‘यूएई में, सभी अमीराती हैं।’ यह संदेश मेरे दिल को छू गया और मुझे इस देश के प्रति और भी गहरा लगाव महसूस हुआ।”

यह वीडियो उस देश के प्रति उनकी कृतज्ञता का एक तरीका है जिसने उन्हें और लाखों अन्य भारतीयों को एक घर, सुरक्षा और पहचान दी।


क्यों वायरल हुआ यह वीडियो?

सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और स्कूलों के समुदायों में इस वीडियो के तेजी से फैलने का कारण केवल संगीत नहीं, बल्कि इसके साथ जुड़ी ‘यादें’ हैं।

  1. स्कूली यादें: कई माता-पिता ने साझा किया कि इस धुन को सुनकर उन्हें अपने बच्चों को सुबह स्कूल छोड़ने, स्कूल के गेट पर ट्रैफिक और असेंबली के दौरान बजने वाले राष्ट्रगान की याद आ गई।
  2. भावनात्मक जुड़ाव: यूएई में पले-बढ़े और अब विदेशों में रह रहे युवाओं और उनके परिवारों के लिए यह वीडियो ‘पुरानी यादों का झोंका’ बन गया है।
  3. पहचान की तलाश: यह प्रदर्शन इस बात की पुष्टि करता है कि यूएई केवल एक कार्यस्थल नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जगह है जहाँ लोग अपनी जड़ों (भारतीय संस्कृति) को सुरक्षित रखते हुए नई पहचान (अमीराती जीवन) को अपनाते हैं।

सिकिदार के अनुसार, “यूएई में रहने वाले, यहाँ पढ़ने वाले या यहाँ अपने बच्चों को पालने वाले हम सभी के लिए, स्कूल की यादें केवल यादें नहीं हैं। ये वे भावनाएं हैं जिन्हें हम जीवन भर अपने साथ रखते हैं।”


राजनयिक और शैक्षणिक गलियारों में सराहना

इस कलात्मक पहल को केवल आम जनता का ही नहीं, बल्कि उच्चाधिकारियों का भी समर्थन मिला है। अबू धाबी में भारतीय दूतावास ने इसे “भारत और यूएई के बीच दोस्ती का एक दिल को छू लेने वाला प्रदर्शन” करार दिया।

यूएई में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल ने भी इस प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए इसे भारतीय शास्त्रीय वाद्ययंत्रों का एक “उत्कृष्ट प्रयोग” बताया। इसके अलावा, कई प्रमुख शिक्षाविदों ने इसे अपने नेटवर्क में साझा किया है, क्योंकि यह विविधता में एकता (Unity in Diversity) के वैश्विक संदेश को पूरी तरह चरितार्थ करता है।


सांस्कृतिक सेतु का निर्माण

भारत और यूएई के संबंध वर्तमान में अपने स्वर्णिम युग में हैं। आर्थिक और रणनीतिक समझौतों के साथ-साथ, इस तरह के ‘पीपल-टू-पीपल’ (जन-जन के बीच) भावनात्मक जुड़ाव इन संबंधों को और मजबूती प्रदान करते हैं।

यह वायरल प्रदर्शन हमें याद दिलाता है कि संगीत की कोई भाषा नहीं होती। जब भारत का ‘सितार’ और यूएई का ‘राष्ट्रगान’ मिलते हैं, तो वह एक ऐसी गूँज पैदा करते हैं जो सरहदों के पार तक सुनाई देती है। यह वीडियो इस बात का प्रमाण है कि यूएई में एकता केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जिसे यहाँ का हर निवासी रोज जीता और महसूस करता है।


निष्कर्ष: मल्हार के इन 13 छात्रों ने अपनी उंगलियों के जादू से यह साबित कर दिया है कि कला ही वह सूत्र है जो विभिन्न संस्कृतियों को एक माला में पिरो सकता है। यह ‘वायरल मोमेंट’ लंबे समय तक उन लोगों के दिलों में रहेगा जो यूएई को अपना घर कहते हैं।

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