साझा विरासत की अनूठी झलक: ओखला में भारतीय मुस्लिम इतिहास की भव्य प्रदर्शनी शुरू
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नई दिल्ली:
राजधानी दिल्ली के ओखला स्थित अबुल फज़ल एन्क्लेव इन दिनों इतिहास की खुशबू से महक रहा है। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद (JIH) के मुख्यालय में मंगलवार से एक ऐसी प्रदर्शनी की शुरुआत हुई है, जो महज तस्वीरों का संग्रह नहीं बल्कि भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत दस्तावेज है। “द वोवन लैंड: ए विजुअल नैरेटिव ऑफ मुस्लिम हिस्ट्री इन इंडिया” शीर्षक वाली यह प्रदर्शनी बताती है कि कैसे सदियों से मुसलमानों ने भारत की मिट्टी को अपनी मेहनत, इल्म और कला से सींचा है।

प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी में शानदार आगाज
मंगलवार सुबह 11 बजे जब इस प्रदर्शनी का फीता कटा तो माहौल में एक अलग ही उत्साह था। ‘इंडियन हिस्ट्री फोरम’ की इस पहल को सराहने के लिए समाज के हर तबके के बुद्धिजीवी पहुंचे। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने इस मौके पर साझा विरासत के महत्व पर जोर दिया। अजमेर शरीफ से आए मौलाना सैयद सरवर चिश्ती और मौलाना असगर अली इमाम मेहदी जैसे आध्यात्मिक गुरुओं ने भी अपनी मौजूदगी से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शमशाद आलम ने इसे कानून और इतिहास के नजरिए से एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
तस्वीरों में कैद सदियों का सफर
प्रदर्शनी में प्रवेश करते ही आपको महसूस होगा कि आप समय की मशीन में सवार होकर पीछे चले गए हैं। यह केवल राजा-महाराजाओं की कहानी नहीं है। इसमें आम इंसान, व्यापार, शिक्षा और सामाजिक सुधारों की बारीक झलकियां हैं।

आयोजकों ने इसे बहुत सलीके से सजाया है। प्रदर्शनी के मुख्य पड़ाव कुछ इस प्रकार हैं:
- शिक्षा और अनुवाद: यहां दिखाया गया है कि कैसे प्राचीन ग्रंथों का अनुवाद कर ज्ञान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया गया।
- विज्ञान और खगोल विज्ञान: सितारों की चाल समझने से लेकर गणित के क्षेत्र में मुस्लिम विद्वानों के योगदान को मॉडलों के जरिए समझाया गया है।
- महिला सशक्तिकरण: इतिहास की उन गुमनाम नायिकाओं की कहानियां भी यहां मौजूद हैं, जिन्होंने समाज को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभाई।
- वास्तुकला और कला: भारत की ऊंची मीनारें और नक्काशीदार गुंबद कैसे भारतीय और इस्लामी कला का संगम बने, इसे तस्वीरों में बेहद खूबसूरती से उतारा गया है।
360-डिग्री अनुभव: इतिहास से सीधा संवाद
इस पूरी प्रदर्शनी का सबसे बड़ा आकर्षण इसका ‘360-डिग्री विजुअल अनुभव’ है। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर एक ऐसा माहौल बनाया गया है जहां दर्शक खुद को इतिहास के बीच खड़ा महसूस करते हैं। यह डिजिटल यात्रा दर्शकों को बताती है कि भारत की मिली-जुली संस्कृति रातों-रात नहीं बनी। इसके पीछे सदियों का मेल-जोल और आपसी भाईचारा रहा है। कहानी सुनाने का यह तरीका (Storytelling) बच्चों और युवाओं को खूब लुभा रहा है।

क्यों जरूरी है ऐसी प्रदर्शनी?
प्रदर्शनी के आयोजकों का मानना है कि आज के दौर में इतिहास को सही और संतुलित तरीके से पेश करना बहुत जरूरी है। अक्सर इतिहास को किताबी नजरिए से देखा जाता है, लेकिन जब लोग इसे दृश्यों और सबूतों के साथ देखते हैं, तो उनकी समझ गहरी होती है। इसका मकसद किसी एक समुदाय की तारीफ करना नहीं, बल्कि उस ‘साझा विरासत’ को सामने लाना है जिसे हम सबने मिलकर बनाया है। यह प्रदर्शनी हमें याद दिलाती है कि हमारी आस्थाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारा इतिहास और हमारी मंजिल एक ही है।

जनता के लिए जानकारी और समय
अगर आप भी इतिहास के शौकीन हैं या अपने बच्चों को भारत की समृद्ध संस्कृति से रूबरू कराना चाहते हैं, तो यह सही मौका है।
- तारीख: 14 अप्रैल से 19 अप्रैल 2026 तक।
- समय: हर दिन सुबह 10:00 बजे से रात 9:00 बजे तक।
- स्थान: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद मुख्यालय, अबुल फज़ल एन्क्लेव, ओखला, नई दिल्ली।
एक अपील: साथ आएं और समझें
उद्घाटन के पहले ही दिन छात्रों और शोधकर्ताओं की भारी भीड़ देखी गई। आयोजकों ने विशेष रूप से अपील की है कि लोग अपने साथ अलग-अलग धर्मों के दोस्तों और परिचितों को भी लाएं। उनका कहना है कि जब हम एक-दूसरे के इतिहास को करीब से जानते हैं, तो नफरत की दीवारें गिर जाती हैं और आपसी समझ का रास्ता खुलता है।
आने वाले चार-पांच दिनों में यहां हजारों लोगों के जुटने की उम्मीद है। ओखला का यह कोना इस समय केवल इतिहास नहीं दिखा रहा, बल्कि भविष्य के लिए एकता का पैगाम भी दे रहा है। अगर आप दिल्ली में हैं, तो इस विजुअल यात्रा का हिस्सा जरूर बनें। यह अनुभव आपकी सोच को एक नई गहराई देगा।

