असम बाढ़ राहत 2026: मुंबई से शिवसागर पहुंचे हुसैन मंसूरी
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, गुवहाटी (असम)
असम में हर साल बारिश और नदियां तबाही मचाती हैं। इस साल भी हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। शिवसागर जिले में बाढ़ का पानी घुसने से कई गांव जलमग्न हो चुके हैं। लोगों के घर, खेत और मवेशी बह गए हैं। इस कठिन दौर में मुंबई के मशहूर समाजसेवी हुसैन मंसूरी असम पहुंचे हैं। वे सीधे ग्राउंड जीरो पर उतरकर प्रभावित परिवारों की मदद कर रहे हैं।
शिवसागर के आपदा प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। हुसैन मंसूरी की इस जमीनी पहल से पीड़ितों को बड़ा सहारा मिला है।
जमीनी स्तर पर राहत सामग्री का वितरण
शिवसागर के दूर-दराज गांवों में बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी कीचड़ और मलबे की समस्या बनी हुई है। बुनियादी जरूरतों के सामान पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। हुसैन मंसूरी ने अपने दो दिवसीय दौरे में स्थानीय लोगों से सीधी मुलाकात की। उन्होंने परिवारों का दर्द सुना और उनकी तात्कालिक जरूरतों को समझा।
राहत अभियान के दौरान जरूरतमंद परिवारों को कई आवश्यक सामान दिए गए:

- सूखा राशन kit: दाल, चावल, आटा और अन्य खाद्य सामग्री
- पीने का साफ पानी: जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए बोतल बंद पानी E
- मेडिकल किट: जरूरी दवाएं, पट्टियां और प्राथमिक उपचार का सामान
- स्कूल बैग: छोटे बच्चों की पढ़ाई न रुके, इसलिए उन्हें बैग बांटे गए
हुसैन मंसूरी का मानना है कि आपदा चाहे कितनी भी बड़ी हो, बच्चों की शिक्षा रुकनी नहीं चाहिए। इसलिए भोजन और पानी के साथ-साथ बच्चों के लिए स्कूल बैग उपलब्ध कराए गए हैं।
मुंबई से असम तक मानवता का संदेश
मुंबई के धारावी जैसे इलाकों से निकलकर पहचान बनाने वाले हुसैन मंसूरी पहले भी कई सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते रहे हैं। इस बार उन्होंने भौगोलिक दूरियों को पीछे छोड़ते हुए पूर्वोत्तर भारत का रुख किया। उनका कहना है कि इंसानियत की कोई सीमा नहीं होती। जब देश का कोई भी हिस्सा संकट में हो, तो हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह मदद के लिए आगे आए।
शिवसागर के बाढ़ पीड़ितों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा देश इस मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़ा है। आपदा से हुए नुकसान की भरपाई में समय लगेगा, लेकिन हिम्मत बनाए रखना बहुत जरूरी है।
असम में बाढ़ के बाद पुनर्वास की चुनौती
असम के कई जिलों में नदियों का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन असली समस्या अब सामने आ रही है। घरों के अंदर 3 से 4 फीट तक गाद और बालू जमी है। पीने के साफ पानी के स्रोत दूषित हो गए हैं। मवेशियों के बह जाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है।
सरकारी राहत कार्यों के साथ-साथ निजी स्वयंसेवकों और संस्थाओं का योगदान यहां बेहद अहम साबित हो रहा है। तत्काल भोजन और दवाइयों के बाद अब इन परिवारों को अपने मकान दोबारा बनाने और आजीविका शुरू करने के लिए दीर्घकालिक सहायता की जरूरत होगी।
सोशल मीडिया के जरिए मदद का दायरा
हुसैन मंसूरी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी काफी सक्रिय रहते हैं। वे अपने ग्राउंड रिपोर्ट और राहत कार्यों के वीडियो शेयर करते हैं। इससे न केवल असम के हालात की सही तस्वीर लोगों तक पहुंच रही है, बल्कि अन्य युवाओं को भी मदद के लिए प्रेरणा मिल रही है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उन्होंने देश-विदेश के लोगों से असम के बाढ़ पीड़ितों की मदद करने की अपील की है। उनके इस कदम से कई अन्य स्वयंसेवक भी राहत सामग्री जुटाने में जुट गए हैं।
असम के शिवसागर में राहत बांटने का यह सिलसिला यह दिखाता है कि जब नीयत साफ हो, तो एक व्यक्ति भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। आपदा के इस समय में हुसैन मंसूरी की यह पहल पीड़ितों के चेहरे पर उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई है।

