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अमेरिका ईरान जंग में चीन की एंट्री, डमीएटा पोर्ट पर बड़ा ड्रोन हमला

 मुस्लिम नाउ ब्यूरो, वाॅशिंगटन

वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहा भीषण सैन्य तनाव अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से पूरे मध्य पूर्व में बड़े युद्ध की आशंका गहराने लगी है। अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान पर बहुत सख्त सैन्य कार्रवाई करने जा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने भी पुष्टि की है कि अमेरिकी सशस्त्र बलों ने ईरान के खिलाफ नए और बड़े हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। ये हमले बुधवार शाम आठ बजे से लगातार जारी हैं। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों का मुंहतोड़ जवाब है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कड़े शब्दों में कहा कि अब ईरान पर दोबारा प्रहार करने की अमेरिका की बारी है।

इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई एक खबर ने पश्चिमी देशों के कान खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के रास्ते चीन से ईरान को 400 आधुनिक कंधे पर रखकर दागे जाने वाले रॉकेट लॉन्चर और मिसाइल सिस्टम मिलने की तैयारी है। जब व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से इस बारे में सवाल पूछा, तो ट्रम्प ने अपनी निराशा जाहिर की। ट्रम्प ने बताया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनसे बहुत सख्ती से वादा किया था कि चीन इस तरह के किसी सैन्य सौदे में शामिल नहीं होगा। ट्रम्प के अनुसार अगर चीन ऐसा कदम उठाता है तो यह उनके लिए बेहद हैरान करने वाला और निराशाजनक होगा।

मिस्र के डमीएटा पोर्ट पर अमेरिकी एलएनजी टैंकर पर बड़ा हमला

जैसे ही वाशिंगटन में युद्ध की रणनीति पर चर्चा चल रही थी, ठीक उसी समय मिस्र के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण डमीएटा पोर्ट से एक बहुत बड़ी खबर आई। भूमध्य सागर के तट पर स्थित डमीएटा बंदरगाह पर खड़े एक अमेरिकी स्वामित्व वाले तरल प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी जहाज पर भीषण ड्रोन हमला हुआ। इस हमले के बाद जहाज में जोरदार धमाका हुआ और भयंकर आग लग गई। अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसी एम्ब्रे और ब्रिटिश सुरक्षा फर्मों ने इस घटना की पुष्टि की है।

हमले का शिकार बना जहाज एनर्जोस विंटर एक फ्लोटिंग स्टोरेज एंड रिगैसिफिकेशन यूनिट है, जो अमेरिकी कंपनी एनर्जोस इंफ्रास्ट्रक्चर का है। जिस समय हमला हुआ, उस समय जहाज से गैस उतारे जाने का काम चल रहा था। एक अज्ञात मानवरहित हवाई वाहन यानी ड्रोन ने जहाज के दाहिने हिस्से को सीधा निशाना बनाया। धमाका इतना भयानक था कि लपटें पास में ही खड़े एक अन्य एलएनजी वाहक जहाज गैसलाग सेलम और एक टगबोट तक फैल गईं।

घटना की खबर मिलते ही मिस्र के पेट्रोलियम और खनिज संसाधन मंत्रालय में हड़कंप मच गया। मिस्र के पेट्रोलियम मंत्री करीम बदावी खुद स्थिति का जायजा लेने के लिए डमीएटा पोर्ट पहुंचे। दमकल की कई टीमों और आपातकालीन सुरक्षा दस्तों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी नाविक या कर्मचारी की जान नहीं गई है और सभी को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। मिस्र सरकार ने माना है कि जहाजों में आग लगी थी, हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर इसे ड्रोन हमला कहने से फिलहाल दूरी बनाई रखी है।

ओवल ऑफिस से ट्रम्प की तेहरान को सीधी और आखिरी चेतावनी AajTak

मिस्र के बंदरगाह पर हुए इस रहस्यमयी धमाके की जानकारी जब राष्ट्रपति ट्रम्प तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया दी। ओवल ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा कि उन्हें घटना की पूरी ब्रीफिंग मिल चुकी है। ट्रम्प ने तेहरान के हुक्मरानों को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि वे अच्छी तरह जानते हैं कि क्या होने वाला है। ट्रम्प ने संकेत दिया कि अमेरिकी सेना बहुत जल्द एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाने वाली है।

हालांकि ट्रम्प ने यह भी जोड़ा कि भविष्य में किसी मोड़ पर कूटनीतिक समझौते की गुंजाइश से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन फिलहाल हालात ऐसे हैं जहां सैन्य कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प दिख रही है। ट्रम्प ने रूस पर तैयार किए जा रहे नए प्रतिबंध कानून का जिक्र करते हुए मांग रखी कि इसमें ईरान पर भी कड़े व्यापारिक शुल्क यानी टैरिफ लगाए जाने चाहिए। उनका मानना है कि ईरान को आर्थिक रूप से पंगु बनाकर ही उसे बैकफुट पर लाया जा सकता है।

चीन, पाकिस्तान और ईरान का नया त्रिस्तरीय सैन्य समीकरण

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि अगर पाकिस्तान के गलियारे का इस्तेमाल करके चीन निर्मित 400 रॉकेट लॉन्चर और वायु रक्षा प्रणालियां ईरान तक पहुंच जाती हैं, तो इस युद्ध का पूरा संतुलन बदल जाएगा। कंधे से दागे जाने वाले ये मिसाइल सिस्टम ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लड़ाकू विमानों को गिराने में बेहद माहिर होते हैं। यदि तेहरान को ये हथियार मिलते हैं तो फारस की खाड़ी और लाल सागर में अमेरिकी लड़ाकू जहाजों और विमानों के लिए भारी खतरा पैदा हो जाएगा।

ट्रम्प के बयानों से साफ है कि वाशिंगटन इस संभावित सैन्य आपूर्ति को लेकर बीजिंग पर भारी दबाव बना रहा है। शी जिनपिंग ने निजी वार्ताओं में ट्रम्प को भरोसा दिया था कि चीन इस संघर्ष में ईंधन नहीं डालेगा। लेकिन जमीनी हकीकत और खुफिया रिपोर्टें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। अगर यह हथियार आपूर्ति सच साबित होती है, तो अमेरिका और चीन के आपसी रिश्तों में भी एक नया और गंभीर तनाव पैदा होना तय है।

फारस की खाड़ी से निकलकर भूमध्य सागर तक फैली जंग की लपटें AajTak

अब तक अमेरिका और ईरान के बीच का सैन्य टकराव मुख्य रूप से फारस की खाड़ी, इराक, सीरिया और लाल सागर तक ही सीमित माना जा रहा था। लेकिन मिस्र के डमीएटा पोर्ट पर हुए हमले ने यह साबित कर दिया है कि युद्ध का दायरा अब भूमध्य सागर तक फैल चुका है। मिस्र एक ऐसा देश है जो अब तक इस पूरे विवाद से खुद को दूर रखता आया था।

डमीएटा पोर्ट मिस्र का एक प्रमुख ऊर्जा निर्यात केंद्र है, जहां से हर साल लाखों टन प्राकृतिक गैस यूरोप और अन्य वैश्विक बाजारों में भेजी जाती है। इस बंदरगाह पर खड़े अमेरिकी एलएनजी टैंकर को निशाना बनाए जाने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मच गया है। वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में अचानक उछाल देखा जा रहा है। दुनिया भर के निवेशक और कारोबारी इस बात से चिंतित हैं कि अगर ऊर्जा संपत्तियों पर ऐसे हमले जारी रहे तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह ठप हो सकती है।

सेंटकॉम के भीषण हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने साफ कर दिया है कि वे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। ईरान की ओर से हाल के दिनों में अमेरिकी सैन्य अड्डों और जहाजों पर कई बार हमले करने की कोशिशें की गई हैं। जवाब में अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ईरान के मिसाइल लॉन्चिंग पैड, ड्रोन ठिकानों और नौसैनिक बुनियादी ढांचों को लगातार निशाना बना रही हैं।

ईरान ने भी घोषणा की है कि वह किसी भी सूरत में झुकने वाला नहीं है। तेहरान ने ओमान द्वारा पेश किए गए उस कूटनीतिक प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के संयुक्त प्रबंधन की बात कही गई थी। ईरान का कहना है कि यह जलमार्ग उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता का हिस्सा है और वह अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।

विश्व राजनीति पर क्या पड़ेगा इस सैन्य टकराव का असर?

अमेरिका, ईरान और अब अप्रत्यक्ष रूप से चीन की इस जंग में भागीदारी से वैश्विक व्यवस्था पर बेहद गंभीर प्रभाव पड़ने वाले हैं। एक तरफ जहां मध्य पूर्व के देश इस बात से डरे हुए हैं कि उनके अपने ऊर्जा क्षेत्र इस आग की चपेट में न आ जाएं, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी देश इस बात को लेकर परेशान हैं कि गैस और तेल की किल्लत से उनकी अर्थव्यवस्थाएं मंदी की चपेट में आ सकती हैं।

डोनाल्ड ट्रम्प का यह कहना कि वे ईरान को बहुत भारी नुकसान पहुंचाएंगे, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले दिनों में यह सैन्य संघर्ष और अधिक उग्र रूप धारण करेगा। आने वाले 24 से 48 घंटे यह तय करने में बेहद निर्णायक साबित होंगे कि मध्य पूर्व में कूटनीति के लिए कोई गुंजाइश बचती है या फिर दुनिया एक और विनाशकारी महायुद्ध की गवाह बनने जा रही है।

मुख्य बातें और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Quick Facts & FAQ)

प्रश्न 1: डमीएटा पोर्ट की घटना में किस अमेरिकी जहाज को निशाना बनाया गया?

उत्तर: मिस्र के डमीएटा पोर्ट पर अमेरिकी कंपनी एनर्जोस इंफ्रास्ट्रक्चर के एलएनजी फ्लोटिंग स्टोरेज जहाज एनर्जोस विंटर पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां खड़े जहाजों में भयंकर आग लग गई।

प्रश्न 2: क्या चीन ईरान को हथियार मुहैया करा रहा है?

उत्तर: मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चीन से पाकिस्तान के रास्ते ईरान को लगभग 400 कंधे पर रखकर दागे जाने वाले मिसाइल और रॉकेट लॉन्चर मिलने की खबरें हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि शी जिनपिंग ने उनसे ऐसा न करने का वादा किया था।

प्रश्न 3: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का ईरान पर क्या रुख है?

उत्तर: ट्रम्प ने ओवल ऑफिस से बयान जारी करते हुए ईरान पर बहुत सख्त सैन्य हमले करने की चेतावनी दी है और कहा है कि अब तेहरान पर हमला करने की अमेरिका की बारी है।

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