दिल्ली की रेसकोर्स मस्जिद पर संकट, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने उठाई आवाज
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली की ऐतिहासिक रेसकोर्स मस्जिद को खाली कराने और संभावित तोड़फोड़ का मामला गरमा गया है। मस्जिद को जारी बेदखली नोटिस और वहां बिजली तथा पानी जैसी जरूरी सुविधाओं को लेकर मुस्लिम संगठनों ने चिंता जताई है। इस मामले में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने प्रशासन से हस्तक्षेप करने और मस्जिद की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि मस्जिद के दस्तावेजों पर उचित विचार किया जाए और नमाजियों को इबादत के लिए वहां पहुंचने में कोई बाधा न हो।
मामले को लेकर मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की भी जानकारी सामने आई है। वहीं, मस्जिद से जुड़ा विवाद विदेशी मीडिया का ध्यान भी आकर्षित कर रहा है। ऐसे में अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम और मस्जिद की कानूनी स्थिति पर टिकी हैं।

मस्जिद और कब्रिस्तान की सुरक्षा की मांग
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने अधिकारियों से रेसकोर्स मस्जिद और उससे जुड़े कब्रिस्तान की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। मीडिया को जारी बयान में उन्होंने कहा कि यह मस्जिद लंबे समय से नमाजियों की इबादतगाह रही है। उनके अनुसार, मस्जिद वर्ष 1977 से राजपत्रित वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है।
मलिक मोतसिम खान ने कहा कि मस्जिद की दस्तावेजी स्थिति और संबंधित रिकॉर्ड की पूरी जांच किए बिना कोई ऐसा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए, जिससे ऐतिहासिक इबादतगाह और उससे जुड़े कब्रिस्तान को नुकसान पहुंचे।
उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि बेदखली नोटिस के कानूनी आधार को स्पष्ट किया जाए। साथ ही, मस्जिद की संपत्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड पर निष्पक्षता से विचार किया जाए।
बिजली और पानी बहाल करने की मांग
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने मस्जिद में बिजली काटे जाने और इमाम पर परिसर खाली करने के लिए दबाव बनाए जाने को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन की मांग है कि बिजली और पानी की आपूर्ति तत्काल बहाल की जाए। नमाजियों के लिए मस्जिद तक आने और वहां से लौटने का रास्ता भी निर्बाध रखा जाए।
मलिक मोतसिम खान के अनुसार, किसी धार्मिक स्थल से जुड़ा प्रशासनिक विवाद कानून और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपनी कार्रवाई का आधार बताना चाहिए और नमाजियों के अधिकारों तथा सम्मान का ध्यान रखना चाहिए।
संगठन का कहना है कि जरूरी सुविधाओं को बाधित करने और इमाम पर परिसर खाली करने का दबाव डालने जैसी कार्रवाइयों से लोगों की धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए प्रशासन को इस मामले में पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए।

वक्फ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
जमाअत के उपाध्यक्ष ने संबंधित वक्फ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा करना संबंधित संस्थानों की जिम्मेदारी है। जब किसी संपत्ति पर बेदखली या तोड़फोड़ का खतरा हो, तो अधिकारियों को समय रहते उचित कानूनी कदम उठाने चाहिए।
उनका कहना है कि वक्फ संस्थानों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी चाहिए, ताकि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर समुदाय में अनिश्चितता न बने।
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने यह भी कहा कि ऐतिहासिक मस्जिदों से जुड़े विवादों को निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया के जरिए सुलझाना जरूरी है। संगठन ने प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग और धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव की आशंकाओं पर भी चिंता जताई है।
हालांकि, रेसकोर्स मस्जिद के मामले में प्रशासन का विस्तृत पक्ष और बेदखली नोटिस से संबंधित सभी कानूनी दस्तावेज उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं हैं। इसलिए विवाद के कानूनी पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानना जरूरी है।
केंद्र और दिल्ली प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और संबंधित प्रशासनिक निकायों से मस्जिद तथा कब्रिस्तान की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन चाहता है कि बेदखली और संभावित तोड़फोड़ से जुड़ी कार्रवाई रोकी जाए तथा पूरे मामले का समाधान पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया के तहत निकाला जाए।
संगठन के मुताबिक, मस्जिद की दस्तावेजी स्थिति की जांच, जरूरी सेवाओं की बहाली और नमाजियों की आवाजाही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
दिल्ली की रेसकोर्स मस्जिद का मामला अब धार्मिक विरासत, वक्फ संपत्ति की सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठा रहा है। मुस्लिम संगठनों की मांग है कि ऐतिहासिक इबादतगाहों के मामलों में कानून का समान रूप से पालन किया जाए। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और निष्पक्ष प्रशासनिक प्रक्रिया से ही जनविश्वास तथा सांप्रदायिक सद्भाव मजबूत हो सकता है।
सवाल और जवाब
सवाल 1: दिल्ली की रेसकोर्स मस्जिद का मामला क्या है?
जवाब: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मस्जिद को बेदखली नोटिस दिया गया है और उसे संभावित रूप से ढहाए जाने को लेकर चिंता जताई गई है। मुस्लिम संगठनों ने मस्जिद की सुरक्षा की मांग की है।
सवाल 2: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने क्या मांग की है?
जवाब: संगठन ने मस्जिद और उससे जुड़े कब्रिस्तान की सुरक्षा, बिजली और पानी की बहाली, नमाजियों के लिए निर्बाध रास्ते तथा बेदखली संबंधी कार्रवाई के कानूनी आधार को स्पष्ट करने की मांग की है।
सवाल 3: मलिक मोतसिम खान ने क्या कहा?
जवाब: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने मस्जिद की दस्तावेजी स्थिति पर उचित विचार करने और प्रशासन से निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया अपनाने की अपील की है।
सवाल 4: रेसकोर्स मस्जिद को वक्फ संपत्ति कब से बताया गया है?
जवाब: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के बयान के अनुसार, मस्जिद वर्ष 1977 से राजपत्रित वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है।

