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जामिया में छात्रसंघ बहाली की पहल, संविधान बनाने के लिए समिति गठित

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ (JMISU) का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की है। इस फैसले को छात्रों की प्रतिनिधित्व संबंधी मांगों पर आगे बढ़ने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, नई समिति जामिया मिल्लिया इस्लामिया अधिनियम, 1988 के अनुच्छेद 23 (J) और (K) के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए छात्रसंघ के संविधान का मसौदा तैयार करेगी। इसके लिए वर्ष 2006 में छात्रसंघ भंग किए जाने की परिस्थितियों, संबंधित अदालतों के फैसलों, लिंगदोह समिति की सिफारिशों और विश्वविद्यालय के मौजूदा नियमों का अध्ययन किया जाएगा।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब छात्र लंबे समय से छात्रसंघ बहाल करने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ की बहाली छात्रों का जायज अधिकार है और छात्र राजनीति को पुलिस बल या लाठीचार्ज के जरिए दबाया नहीं जा सकता।

छात्रसंघ के संविधान के लिए बनेगी समिति

जामिया प्रशासन ने छात्रसंघ के संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए समिति गठित करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य छात्रसंघ की बहाली से जुड़े कानूनी, संस्थागत और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा करना है।

विश्वविद्यालय के मुताबिक, जामिया में आखिरी छात्रसंघ वर्ष 2006 में भंग किया गया था। इसके बाद लगभग दो दशकों में कानूनी और संस्थागत परिस्थितियों में कई बदलाव हुए हैं। ऐसे में छात्रसंघ की बहाली के सवाल पर मौजूदा नियमों और न्यायिक आदेशों के आधार पर विचार करना जरूरी है।

समिति अदालतों के उन आदेशों की समीक्षा करेगी, जो जामिया में छात्रसंघ और उसके चुनावों से संबंधित हैं। इसके साथ ही लिंगदोह समिति की सिफारिशों पर भी विचार किया जाएगा। वर्ष 2007 में लिंगदोह समिति ने देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ तथा छात्र चुनावों के लिए दिशा निर्देश सुझाए थे।

समिति जामिया मिल्लिया इस्लामिया के लागू अध्यादेशों और नियमों का भी अध्ययन करेगी। इसके बाद छात्रसंघ के प्रस्तावित संविधान का मसौदा तैयार किया जाएगा। प्रशासन की ओर से इसे छात्र प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया के रूप में पेश किया गया है।

सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति ने छात्रों से की बातचीत

जामिया प्रशासन ने 18 अक्टूबर 2026 को वरिष्ठ डीन और प्रोफेसरों की सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। समिति को प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करने और उनकी मांगों की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

अगली सुबह, 19 अक्टूबर को समिति के सदस्य प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। वहां उन्होंने छात्रों से बातचीत शुरू की। विश्वविद्यालय के अनुसार, शुरुआती चर्चा सकारात्मक रही और आगे संवाद का रास्ता खुला।

इसके बाद समिति ने विश्वविद्यालय के नियमित छात्रों की सूची मांगी और प्रतिनिधि समूह को सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन के कार्यालय में चर्चा के लिए आमंत्रित किया। 20 अक्टूबर को छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ करीब दो घंटे बैठक हुई। इस दौरान उनकी शिकायतें सुनी गईं और मांगों पर चर्चा की गई।

इसी दिन शाम 6:30 बजे छात्र कल्याण अधिष्ठाता यानी डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर के कार्यालय में एक और बैठक आयोजित की गई। इसका उद्देश्य बातचीत के बिंदुओं को लिखित रूप देना और बैठक की कार्यवाही को अंतिम रूप देना था।

प्रशासन के अनुसार, कई दौर की चर्चा के बावजूद छात्र प्रतिनिधि बैठक की कार्यवाही के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत नहीं हुए। हालांकि, विश्वविद्यालय ने कहा कि इससे समाधान खोजने की कोशिशें बंद नहीं हुईं।

कुलपति की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक

छात्रसंघ विवाद पर आगे का रास्ता तलाशने के लिए कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें रजिस्ट्रार प्रोफेसर एमडी महताब आलम रिजवी और 18 अक्टूबर को गठित उच्चस्तरीय समिति के सदस्य शामिल हुए।

बैठक में विश्वविद्यालय के सभी संकायों के डीन, डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर, परीक्षा नियंत्रक, डीन ऑफ अकादमिक अफेयर्स, मुख्य प्रॉक्टर, सभी प्रोवोस्ट, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी और सुरक्षा सलाहकार भी मौजूद थे।

बैठक में उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों और छात्रों के साथ हुई बातचीत की समीक्षा की गई। साथ ही, परिसर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के उपायों पर विचार किया गया।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि वह छात्रों के अधिकारों की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने और परिसर में सामान्य शैक्षणिक माहौल बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासन के सामने छात्रों की मांगों पर विचार करने के साथ विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और संस्थागत प्रतिष्ठा को बनाए रखने की चुनौती भी है।

इमरान प्रतापगढ़ी ने छात्रसंघ बहाली का किया समर्थन

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने जामिया के प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात कर छात्रसंघ बहाल करने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रसंघ बहाल करना चाहिए और छात्रों की मांगें जायज हैं।

प्रतापगढ़ी ने सवाल उठाया कि जामिया प्रशासन छात्रसंघ की बहाली से क्यों हिचक रहा है। उनके अनुसार, छात्रसंघ होने से विद्यार्थियों को अपने अधिकारों और समस्याओं को संस्थागत स्तर पर उठाने का अवसर मिलता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र राजनीति को सीमित करने की कोशिशें हो रही हैं। उनका कहना था कि छात्रों की आवाज को पुलिस बल या लाठीचार्ज के जरिए दबाया नहीं जा सकता।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी छात्रों के साथ खड़े हैं। यह उनका राजनीतिक बयान है, जबकि छात्रसंघ की बहाली पर अंतिम फैसला विश्वविद्यालय के नियमों और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होना है।

2006 से लंबित है छात्रसंघ की बहाली का सवाल

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। वर्ष 2006 में छात्रसंघ भंग होने के बाद से इसकी बहाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए समिति गठित किए जाने से इस मुद्दे पर संस्थागत स्तर पर समीक्षा की प्रक्रिया शुरू हुई है।

हालांकि, समिति के गठन का अर्थ यह नहीं है कि छात्रसंघ के चुनाव तत्काल कराए जाएंगे। इसके लिए प्रस्तावित संविधान, अदालतों के आदेशों, विश्वविद्यालय के नियमों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों पर विचार करना होगा।

फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि समिति अपनी समीक्षा कब पूरी करती है और उसके सुझावों के आधार पर छात्रसंघ की बहाली की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं। छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जामिया में छात्रसंघ की बहाली का मुद्दा केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है। यह छात्रों के प्रतिनिधित्व, लोकतांत्रिक भागीदारी और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ संवाद से भी जुड़ा है। आने वाले दिनों में समिति की कार्रवाई और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि इस विवाद का समाधान किस दिशा में आगे बढ़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ को लेकर क्या फैसला हुआ है?

विश्वविद्यालय प्रशासन ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ का संविधान तैयार करने के लिए समिति गठित करने की घोषणा की है।

2. जामिया में छात्रसंघ का संविधान कौन तैयार करेगा?

विश्वविद्यालय की ओर से गठित समिति संविधान का मसौदा तैयार करेगी। वह अदालतों के आदेशों, लिंगदोह समिति की सिफारिशों और जामिया के नियमों की समीक्षा करेगी।

3. जामिया में आखिरी छात्रसंघ कब भंग हुआ था?

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, जामिया का आखिरी छात्रसंघ वर्ष 2006 में भंग किया गया था।

4. इमरान प्रतापगढ़ी ने छात्रों की मांग पर क्या कहा?

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने छात्रसंघ की बहाली का समर्थन किया और छात्रों की मांगों को जायज बताया।

5. क्या जामिया में छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित हुई है?

दी गई जानकारी में छात्रसंघ चुनाव की कोई तारीख घोषित नहीं की गई है। फिलहाल संविधान तैयार करने और संबंधित कानूनी पहलुओं की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की गई है।

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