‘मोहम्मद दीपक’ पर संकट, जिम बेचने की नौबत
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
उत्तराखंड के कोटद्वार से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सामाजिक सौहार्द, धार्मिक पहचान और आर्थिक बहिष्कार जैसे सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में खड़े हुए जिम ट्रेनर दीपक कुमार, जिन्हें स्थानीय लोग ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से जानते हैं, अब आर्थिक तंगी के ऐसे दौर से गुजर रहे हैं कि उन्हें अपना जिम बेचने और शहर छोड़ने तक का विचार करना पड़ रहा है।
कोटद्वार के पटेल मार्ग इलाके में ‘हल्क जिम’ चलाने वाले 42 वर्षीय दीपक कुमार का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में हालात इतने बदल गए हैं कि रोज़ी-रोटी बचाना भी मुश्किल हो गया है। जिस जिम को उन्होंने मेहनत और लगन से खड़ा किया था, वही अब उनके लिए बोझ बनता जा रहा है। किराया चुकाने में असमर्थता, घटते ग्राहक और सामाजिक दबाव ने उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान कर दिया है।
दीपक का नाम उस समय अचानक सुर्खियों में आया जब उन्होंने जनवरी में एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में आवाज़ उठाई। मामला तब शुरू हुआ जब कथित तौर पर कुछ संगठनों के कार्यकर्ता पटेल मार्ग स्थित ‘बाबा क्लॉथिंग स्टोर’ के मालिक, 70 वर्षीय वकील अहमद पर दुकान का नाम बदलने का दबाव बना रहे थे। इसी दौरान जब वहां मौजूद लोगों ने दीपक से उनका नाम पूछा तो उन्होंने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया और दुकानदार के साथ एकजुटता दिखाई।
यह घटना सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय चर्चाओं तक फैल गई। लेकिन दीपक का कहना है कि इसके बाद से उनकी ज़िंदगी पहले जैसी नहीं रही। उनका आरोप है कि धीरे-धीरे उनके जिम का बहिष्कार शुरू हो गया और ग्राहकों की संख्या लगातार घटती चली गई।
एक समाचार एजेंसी से बातचीत में दीपक ने बताया कि उनके मकान मालिक ने चार महीने का किराया न चुकाने पर उन्हें अंतिम चेतावनी दे दी है। उनके मुताबिक, जिम का मासिक किराया 40 हजार रुपये है, जिसे मौजूदा हालात में निकाल पाना बेहद मुश्किल हो गया है।
उन्होंने कहा, “मैं पिछले चार महीनों का किराया नहीं दे पाया हूं। अब समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या करूं। लगता है कि जिम का सामान बेचकर किसी दूसरे शहर में जाकर नौकरी करनी पड़ेगी।”
दीपक ने यह भी आशंका जताई कि संभव है मकान मालिक पर किसी प्रकार का दबाव डाला गया हो, हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई ठोस दावा नहीं किया। उनका कहना है कि अचानक बदले रवैये ने उन्हें हैरान किया है।
फिलहाल ‘हल्क जिम’ में लगभग 60 से 65 सदस्य हैं, लेकिन दीपक का कहना है कि इतनी संख्या जिम के खर्च पूरे करने के लिए पर्याप्त नहीं है। बिजली, किराया, उपकरणों की देखरेख और अन्य खर्चों के बाद बचत लगभग खत्म हो जाती है। गर्मी के मौसम और चल रहे विवादों के कारण नए सदस्यों के जुड़ने की संभावना भी कम नजर आ रही है।
दीपक ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता उनके ग्राहकों पर भी दबाव बना रहे हैं। उनका दावा है कि जिन युवाओं के परिवार किसी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े हैं, उनके घर जाकर जिम छोड़ने के लिए कहा जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
उन्होंने कहा, “जब लोगों को डर या दबाव महसूस कराया जाता है, तो उसका असर कारोबार पर पड़ता है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। मेहनत से तैयार किया गया काम अब टूटता हुआ दिख रहा है।”
इस पूरे विवाद के बीच 31 जनवरी को स्थिति और तनावपूर्ण हो गई थी, जब कथित तौर पर कपड़ों की दुकान और दीपक के जिम के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। सड़क पर नारेबाजी हुई और माहौल तनावपूर्ण बन गया। पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े मामलों में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं।
कोटद्वार का यह मामला अब केवल एक जिम मालिक की आर्थिक परेशानी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी खड़े कर रहा है कि क्या सामाजिक और वैचारिक मतभेद किसी व्यक्ति की आजीविका को प्रभावित कर सकते हैं? वहीं, स्थानीय लोग इस पूरे मामले को संवेदनशील बताते हुए शांति और संवाद की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।

