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105 की उम्र में ‘डिजिटल अब्दुल्ला’! केरल बनेगा भारत का पहला डिजिटल साक्षर राज्य


मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम।
तकनीक की इस तेज़ रफ्तार दुनिया में जहाँ युवा भी डिजिटल बदलाव से तालमेल बिठाने में कभी-कभी हिचकिचा जाते हैं, वहीं 105 वर्षीय अब्दुल्ला ने सभी को चौंका दिया है। उन्होंने न सिर्फ स्मार्टफोन और इंटरनेट का इस्तेमाल करना सीखा, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि उम्र डिजिटल ज्ञान की राह में बाधा नहीं बन सकती।

अब्दुल्ला की यह प्रेरणादायक कहानी उस ऐतिहासिक घोषणा के साथ जुड़ गई है, जब 21 अगस्त को केरल को आधिकारिक रूप से भारत का पहला पूर्ण डिजिटल साक्षर राज्य घोषित किया जाएगा। राज्य सरकार का दावा है कि यहाँ का हर नागरिक डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने में सक्षम है।

अब्दुल्ला का यह सफर और केरल की उपलब्धि मिलकर यह संदेश देती है कि डिजिटल इंडिया की असली तस्वीर अब घर-घर में दिखाई देने लगी है—जहाँ न केवल युवा, बल्कि बुज़ुर्ग भी नई तकनीक को आत्मसात कर रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, 99.98 प्रतिशत शिक्षार्थियों के बुनियादी डिजिटल कौशल हासिल करने के साथ, केरल अब देश का ‘पहला डिजिटल साक्षर राज्य’ घोषित होने जा रहा है।

यह महत्वाकांक्षी अभियान 22 सितंबर 2022 को स्थानीय स्वशासन विभाग (एलएसजीडी) द्वारा शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य 1991 के ऐतिहासिक संपूर्ण साक्षरता आंदोलन की तर्ज पर राज्य को पूर्ण डिजिटल साक्षर बनाना है। इसके तहत, डिजिटल रूप से निरक्षर व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें स्मार्टफोन का उपयोग, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं तक पहुंच और डिजिटल उपकरणों के प्रयोग का प्रशिक्षण दिया गया।

एलएसजीडी मंत्री एम. बी. राजेश ने बताया कि 83,45,879 परिवारों के सर्वेक्षण के बाद पहचाने गए 21,87,677 डिजिटल रूप से निरक्षर व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन 21 अगस्त को तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित समारोह में केरल को डिजिटल रूप से पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करेंगे।

राजेश ने कहा, “डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम उसी तरह लागू किया गया है, जैसे दशकों पहले संपूर्ण साक्षरता आंदोलन लागू किया गया था।”

उन्होंने यह भी बताया कि डिजिटल शिक्षा पाने वालों में 15,000 से अधिक लोग 90 वर्ष से ज्यादा उम्र के हैं, जिनमें अब्दुल्ला मौलवी जैसे प्रेरणास्रोत भी शामिल हैं।

अब्दुल्ला के बेटे फैजल ने कहा, “डिजिटल शिक्षा ने इस उम्र में भी उनके जीवन को बेहद आसान बना दिया है। अब वह यूट्यूब पर समाचार देखते हैं और आसानी से विदेश में पोते से वीडियो कॉल कर पाते हैं।”