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एग्जिट पोल 2026: किस राज्य में किसकी सरकार

नई दिल्ली।

देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के बाद एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आ गए हैं। तस्वीर साफ कम और उलझी ज्यादा दिख रही है। कहीं स्पष्ट बहुमत के संकेत हैं, तो कहीं मुकाबला बेहद कड़ा नजर आ रहा है। असली फैसला अब 4 मई को मतगणना के बाद ही होगा, लेकिन फिलहाल इन अनुमानों ने सियासी हलचल तेज कर दी है।

सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की है। यहां के एग्जिट पोल पूरी तरह एक राय नहीं हैं। कुछ एजेंसियां भारतीय जनता पार्टी को बढ़त में दिखा रही हैं। वहीं कुछ तृणमूल कांग्रेस की वापसी का दावा कर रही हैं। चाणक्य स्ट्रैटेजीज के मुताबिक भाजपा 150 से 160 सीटों तक पहुंच सकती है। तृणमूल कांग्रेस 130 से 140 सीटों पर सिमट सकती है। मीटराइज ने भी लगभग यही तस्वीर पेश की है। उसके अनुसार भाजपा 146 से 161 सीटें जीत सकती है।

पोल डायरी का अनुमान भाजपा को और मजबूत दिखाता है। यहां पार्टी 142 से 171 सीटों तक पहुंच सकती है। जबकि ममता बनर्जी की पार्टी 99 से 127 सीटों के बीच रह सकती है। लेकिन पीपल्स प्लस ने पूरी तरह अलग तस्वीर दी है। इस एजेंसी के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस भारी बहुमत के साथ वापसी कर सकती है। उसे 177 से 187 सीटें मिल सकती हैं। भाजपा को 95 से 110 सीटों तक सीमित बताया गया है।

यही वजह है कि बंगाल की तस्वीर सबसे ज्यादा दिलचस्प बनी हुई है। राज्य में करीब 90 प्रतिशत मतदान हुआ। इसे भारी जनभागीदारी माना जा रहा है। पूर्वी बर्धमान में सबसे ज्यादा वोट पड़े। हावड़ा, हुगली और उत्तर 24 परगना में भी मुकाबला तेज रहा। दक्षिण 24 परगना में भी लंबी कतारें दिखीं। यह संकेत है कि जनता ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

राजनीतिक तौर पर यहां सीधा मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच है। ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता में लौटना चाहती हैं। भाजपा पहली बार स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा कर रही है। चुनाव के दौरान कई जगह तनाव की खबरें भी आईं। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर आरोप लगाए। अब निगाहें नतीजों पर हैं।

असम की तस्वीर अपेक्षाकृत साफ दिख रही है। यहां एग्जिट पोल भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को बढ़त में दिखा रहे हैं। एक्सिस माई इंडिया के अनुसार भाजपा 88 से 100 सीटें जीत सकती है। कांग्रेस 24 से 36 सीटों तक रह सकती है। जेवीसी का अनुमान भी लगभग ऐसा ही है। उसके मुताबिक भाजपा 88 से 101 सीटें ला सकती है।

असम में इस बार मतदान भी काफी ज्यादा हुआ। करीब 85 प्रतिशत से अधिक लोगों ने वोट डाला। इसे सत्ता के प्रति विश्वास और बदलाव की इच्छा दोनों के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पहले ही दावा कर चुके हैं कि एनडीए 100 का आंकड़ा पार कर सकता है। एग्जिट पोल भी इसी दिशा में इशारा कर रहे हैं।

पिछले चुनाव में एनडीए ने 75 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इस बार अगर अनुमान सही साबित होते हैं, तो भाजपा गठबंधन और मजबूत होकर लौट सकता है। कांग्रेस ने छह दलों के साथ गठबंधन किया था, लेकिन आंकड़े उसके पक्ष में नहीं दिख रहे।

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके गठबंधन की वापसी के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को बढ़त मिलती दिख रही है। पीपुल्स प्लस के अनुसार डीएमके 125 से 145 सीटें जीत सकती है। एआईएडीएमके को 65 से 80 सीटें मिल सकती हैं।

मीटराइज का अनुमान भी डीएमके के पक्ष में है। उसके मुताबिक गठबंधन 122 से 132 सीटों तक पहुंच सकता है। एआईएडीएमके 80 से 100 सीटों पर रह सकती है। कुछ सर्वे में अभिनेता विजय की पार्टी को भी सीमित सफलता मिलती दिख रही है। हालांकि एक एजेंसी ने उसे 30 से 40 सीटें देकर चौंकाया है।

तमिलनाडु में मतदान प्रतिशत भी अच्छा रहा। कई जिलों में लंबी कतारें दिखीं। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में लोगों ने उत्साह दिखाया। चेन्नई जैसे शहरों में भी मतदान में सुधार देखा गया। इससे साफ है कि जनता ने इस चुनाव को गंभीरता से लिया।

केरल में कहानी बदलती नजर आ रही है। यहां एग्जिट पोल कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को बढ़त दे रहे हैं। एक्सिस माई इंडिया के मुताबिक यूडीएफ 78 से 90 सीटें जीत सकता है। वाम मोर्चा 49 से 62 सीटों तक सिमट सकता है।

पीपुल्स प्लस का अनुमान भी यूडीएफ के पक्ष में है। उसके अनुसार गठबंधन 75 से 85 सीटें ला सकता है। एलडीएफ 55 से 60 सीटों के बीच रह सकता है। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को यहां खास सफलता मिलती नहीं दिख रही।

केरल में परंपरा रही है कि हर पांच साल में सरकार बदलती है। 2021 में एलडीएफ ने इस ट्रेंड को तोड़ा था। अब एग्जिट पोल संकेत दे रहे हैं कि राज्य फिर पुराने पैटर्न की ओर लौट सकता है। हालांकि अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही होगा।

पुडुचेरी में मुकाबला छोटा है, लेकिन दिलचस्प है। यहां 30 सीटों की विधानसभा है। एग्जिट पोल एनडीए को बढ़त में दिखा रहे हैं। इंडिया टुडे और एक्सिस माई इंडिया के अनुसार गठबंधन सरकार बना सकता है। लेकिन यहां नई राजनीतिक ताकतों की मौजूदगी ने समीकरण बदल दिए हैं।

छोटे राज्यों में अक्सर मामूली अंतर बड़ा असर डालता है। पुडुचेरी में भी यही स्थिति है। कुछ सीटों का फर्क पूरी तस्वीर बदल सकता है। इसलिए यहां भी नतीजों का इंतजार जरूरी है।

कुल मिलाकर एग्जिट पोल एक दिशा जरूर देते हैं, लेकिन इन्हें अंतिम सच नहीं माना जा सकता। पिछले चुनावों में भी कई बार अनुमान गलत साबित हुए हैं। इस बार भी कई राज्यों में एजेंसियों के आंकड़े एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।

सबसे ज्यादा अनिश्चितता पश्चिम बंगाल में है। यहां नतीजे चौंका सकते हैं। असम में तस्वीर साफ दिख रही है। तमिलनाडु में सत्ता वापसी के संकेत हैं। केरल में बदलाव की आहट है। पुडुचेरी में मुकाबला खुला है।

अब सबकी नजर 4 मई पर है। उसी दिन तय होगा कि किसका दावा सही था और किसका अनुमान गलत। तब तक सियासी बयानबाजी जारी रहेगी और अटकलों का दौर भी।