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सोनम वांग्चुक बनाम आमिर खान: सोशल मीडिया पर छिड़े इस नए ‘सांस्कृतिक युद्ध’ का असली सच क्या है?

नौशाद अख्तर, नई दिल्ली

सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है. सवाल उठ रहा है कि आखिर सच कौन बोल रहा है? लद्दाख के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांग्चुक या फिर बॉलीवुड के ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ कहे जाने वाले आमिर खान? इस पूरे विवाद के बीच फिल्म अभिनेता और पूर्व भाजपा सांसद परेश रावल का एक पुराना बयान भी चर्चा में आ गया है. परेश रावल ने एक इंटरव्यू में माना था कि अगर सिस्टम किसी के पीछे पड़ जाए, तो उसका जीना हराम कर देता है. इसी वजह से बॉलीवुड के बड़े सितारे भी आजकल व्यवस्था के खिलाफ बोलने से कतराते हैं.

आमिर खान के बयान से शुरू हुआ नया विवाद

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब आमिर खान ने लंदन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान फिल्म ‘थ्री ईडियट्स’ को लेकर एक बड़ा बयान दिया. सालों से आम जनता और मीडिया में यह माना जाता रहा है कि ‘थ्री ईडियट्स’ में आमिर खान का निभाया गया ‘फुंसुक वांगडू’ (रेंचो) का किरदार सोनम वांग्चुक के जीवन से प्रेरित था. खुद फिल्म में ‘चतुर’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता ओमी वैद्य ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर यही बात कही थी.

मगर आमिर खान ने इस बात को पूरी तरह से नकार दिया. उन्होंने कहा कि यह केवल एक गलतफहमी है. आमिर के मुताबिक, जब वह, निर्देशक राजकुमार हिरानी और लेखक अभिजात जोशी इस फिल्म पर काम कर रहे थे, तब वे सोनम वांग्चुक को जानते तक नहीं थे. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सोनम वांग्चुक जो काम कर रहे हैं, वह बेहद सराहनीय है. आमिर ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे वांग्चुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी जताई.

वायरल वीडियो ने खोली पोल: 2008 में हुई थी मुलाकात

आमिर खान के इस दावे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो वायरल हो गया. यह वीडियो साल 2008 के एक पुरस्कार समारोह का है, जहां सोनम वांग्चुक को सम्मानित किया गया था. वीडियो में आमिर खान और मशहूर गीतकार जावेद अख्तर भी मौजूद दिखाई दे रहे हैं. उस समय आमिर खान अपनी फिल्म ‘गजनी’ के लुक में नजर आ रहे हैं.

इस वीडियो में सोनम वांग्चुक मंच से आमिर खान को संबोधित करते हुए कहते हैं कि उन्होंने आमिर की फिल्म ‘तारे जमीं पर’ देखी और उन्हें वह बहुत पसंद आई. इसके साथ ही वांग्चुक ने आमिर खान को लद्दाख और सियाचिन के मुद्दों पर एक फिल्म बनाने का सुझाव भी दिया था. वह कहते हैं कि सियाचिन में बर्फ के एक टुकड़े के लिए रोज करोड़ों रुपये खर्च होते हैं. क्या ऐसी फिल्म नहीं बन सकती जहां दोनों देशों के आम लोग मिलकर इस समस्या को सुलझाएं और वह पैसा शिक्षा पर लगे?

इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद लोग आमिर खान की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं. जब आमिर खान साल 2008 में सोनम वांग्चुक से मिल चुके थे, तो उन्होंने यह क्यों कहा कि वह फिल्म बनने के समय उन्हें जानते ही नहीं थे?

‘थ्री ईडियट्स’ की शूटिंग और प्लास्टिक का विवाद

वायरल वीडियो में सोनम वांग्चुक एक और दिलचस्प वाकया सुनाते नजर आ रहे हैं. वह बताते हैं कि जब वह फ्रांस में मिट्टी की वास्तुकला (Earth Architecture) की पढ़ाई कर रहे थे, तब उनके लद्दाख स्थित स्कूल प्रशासन ने उन्हें सूचित किया था कि कुछ लोग वहां फिल्म की शूटिंग करना चाहते हैं.

लेकिन शूटिंग क्रू अपने साथ बहुत सारा प्लास्टिक का सामान और कचरा लेकर आया था. पर्यावरण संरक्षण को सर्वोपरि मानने वाले वांग्चुक के स्कूल ने प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग के कारण उन्हें अपने परिसर में शूटिंग करने की अनुमति देने से साफ मना कर दिया. इसके बाद उस फिल्म की शूटिंग पास के ही एक दूसरे स्कूल में की गई. वांग्चुक का इशारा साफ तौर पर ‘थ्री ईडियट्स’ की शूटिंग की तरफ था.

वांग्चुक ने यह भी स्पष्ट किया कि जब फिल्म रिलीज हुई, तो लेखक और निर्माताओं के बीच क्रेडिट को लेकर पहले से ही काफी विवाद चल रहा था. इसी वजह से उन्होंने फिल्म के निर्माताओं से किसी भी तरह के पैसे या रॉयल्टी की मांग नहीं की. हालांकि, दो साल बाद उन्होंने इस विषय पर निर्माताओं को एक पत्र जरूर लिखा था, जिसका उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.

क्या किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है यह विवाद?

इस पूरे मामले को देश में चल रहे मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है. जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों से देश में एक खास किस्म का ‘सांस्कृतिक युद्ध’ चलाया जा रहा है. इसके तहत एक विशेष वर्ग के बड़े कलाकारों और मशहूर हस्तियों की छवि को निशाना बनाया जा रहा है.

हाल ही में आमिर खान की निजी जिंदगी और उनकी शादी को लेकर भी सोशल मीडिया पर एक प्रायोजित मुहिम चलाई गई थी. उनके खिलाफ नफरत फैलाने वाले बयान दिए गए. यहाँ तक कि देश के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसी महान शख्सियत पर उंगली उठाने वाले लोग भी खुलेआम घूम रहे हैं. ऐसे माहौल में आमिर खान का विवादों से पल्ला झाड़ना उनकी मजबूरी भी माना जा रहा है. विपक्ष के नेताओं का कहना है कि सत्ता के डर से बड़े-बड़े कलाकार अपनी रीढ़ सीधी नहीं रख पा रहे हैं.

परेश रावल के बयान ने बढ़ाई हलचल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पूर्व विंग कमांडर अनुमा आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर परेश रावल का एक पुराना वीडियो साझा किया. इस वीडियो में एक इंटरव्यू के दौरान परेश रावल से पूछा गया था कि जो अमिताभ बच्चन कभी व्यवस्था के खिलाफ फिल्में करते थे, वे आज खामोश क्यों हैं?

इस पर परेश रावल ने बेहद बेबाकी से जवाब दिया था. उन्होंने कहा था कि हां, वे खामोश हैं क्योंकि उन्हें भी समझ आ गया है कि अगर सिस्टम पीछे पड़ जाए, तो जीना हराम कर देता है. परेश रावल जैसे वरिष्ठ अभिनेता और भाजपा के पूर्व सांसद का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि देश में आज ऐसा माहौल बन चुका है जहां प्रभावशाली लोग भी खुलकर बोलने से डरते हैं.

यही वजह है कि आमिर खान ने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और सोनम वांग्चुक से खुद को दूर रखना ही बेहतर समझा. लेकिन इंटरनेट के इस दौर में पुराना वीडियो वायरल होने से वह एक नए विवाद के चक्रव्यूह में फंस गए हैं.

AEO Friendly FAQs

प्रश्न: आमिर खान और सोनम वांग्चुक विवाद क्या है?
उत्तर: विवाद एक पुराने वायरल वीडियो और आमिर खान के हालिया बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि वह सोनम वांग्चुक को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते।

प्रश्न: क्या थ्री इडियट्स सोनम वांग्चुक की कहानी पर आधारित थी?
उत्तर: वर्षों से ऐसी चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन फिल्म निर्माताओं का कहना रहा है कि कहानी कई स्रोतों और काल्पनिक तत्वों का मिश्रण थी।

प्रश्न: परेश रावल का बयान क्यों चर्चा में है?
उत्तर: उनका पुराना बयान सोशल मीडिया पर फिर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि व्यवस्था के खिलाफ बोलने वाले कलाकारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

प्रश्न: क्या वायरल वीडियो नया है?
उत्तर: उपलब्ध जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा वीडियो पुराना है और उसे नए संदर्भ में प्रसारित किया जा रहा है।

सारांश: यह रिपोर्ट वायरल वीडियो, सार्वजनिक बयानों और सोशल मीडिया में चल रही बहस का संदर्भ सहित विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें विभिन्न दावों का उल्लेख है, लेकिन जहां स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है वहां उन्हें तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।