736 दिनों बाद बंधक रिहाई, 1,968 फ़लस्तीनी कैदी आज़ाद — ट्रंप ने किया युद्धविराम का ऐलान
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, शरम अल-शेख/यरुशलम:
गाज़ा पट्टी में दो वर्षों से जारी हिंसा और युद्ध के बीच सोमवार को एक ऐतिहासिक मोड़ आया, जब इसराइल और हमास के बीच कैदी और बंधक आदान-प्रदान के बाद अमेरिका, मिस्र, कतर और तुर्किये के नेताओं ने गाज़ा युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पल को “दुनिया और मध्य पूर्व के लिए एक महान दिन” करार दिया।
इसराइल-हमास के बीच कैदी आदान-प्रदान
समझौते के तहत हमास ने गाज़ा में दो साल से बंदी बनाए गए 20 जीवित इसराइली नागरिकों को रिहा कर रेड क्रॉस को सौंप दिया। साथ ही, 28 इसराइली बंधकों के शव भी आज इसराइल को सौंपे जाएंगे।
जवाब में इसराइल ने 1,968 कैदियों—अधिकांश फ़लस्तीनी—को जेल से रिहा किया। इनमें से कई को आज गाज़ा और वेस्ट बैंक में उनके परिजनों के पास पहुंचाया गया। कुल 38 बसों में रिहा हुए कैदियों को गाज़ा लाया गया, जिनमें से 1,716 को नसर अस्पताल ले जाया गया है, जबकि कुछ आजीवन कारावास भुगत रहे कैदी वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम पहुंचे।
शांति सम्मेलन और वैश्विक नेतृत्व की भूमिका
इसराइल में संसद को संबोधित करने के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप मिस्र के शरम अल-शेख पहुंचे, जहां उन्होंने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी, कतर और तुर्किये के नेताओं के साथ मिलकर गाज़ा युद्धविराम घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए। 24 से अधिक वैश्विक नेताओं की उपस्थिति में ट्रंप ने कहा:
“यह दस्तावेज़ नियमों, शर्तों और भविष्य की कार्ययोजना को स्पष्ट करेगा… और मैं दोहराता हूं — यह समझौता टिकेगा।”
जनता की नाराज़गी और सवाल
हालांकि, इसराइल में बंधकों की रिहाई की खबर आने के साथ ही तेल अवीव और यरुशलम में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। सैकड़ों नागरिकों ने यह सवाल उठाया कि बंधकों को 736 दिन बाद क्यों रिहा किया गया? क्या यह सौदा पहले नहीं हो सकता था? कई लोगों का मानना है कि अगर यह समझौता पहले होता, तो अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती थी—चाहे वे इसराइली हों या फ़लस्तीनी।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ट्रंप के सलाहकार जेरेड कुश्नर तथा स्टीव विटकॉफ़ को इस देरी के लिए जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा।
गाज़ा में खुशी और भावनात्मक दृश्य
दूसरी ओर, गाज़ा में आज भावनात्मक दृश्य देखने को मिले। जैसे ही फ़लस्तीनी कैदी रिहा होकर पहुंचे, लोगों ने जश्न मनाया, फूल बरसाए और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। कई परिवारों ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वे अपने प्रियजनों को दोबारा देख पाएंगे।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस समझौते का स्वागत किया और सभी पक्षों से समझौते की शर्तों को निभाने की अपील की। उन्होंने कहा:
“बंधकों की रिहाई एक सकारात्मक कदम है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह स्थायी शांति की दिशा में बढ़ता हुआ कदम बने।”
गुटेरेस ने मारे गए बंधकों के शवों की वापसी की भी मांग की और कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय और शांति की आवश्यकता है।
शांति की राह में अड़चनें अब भी बाकी
हालांकि यह युद्धविराम एक बड़ी सफलता है, लेकिन कई जटिल मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं:
- हमास का हथियार न छोड़ना
- इसराइल का गाज़ा से पूर्ण सैन्य वापसी पर चुप्पी
- युद्ध के दौरान गाज़ा में हुई व्यापक तबाही का पुनर्निर्माण
राष्ट्रपति ट्रंप ने भरोसा जताया कि समझौते की अगली “फेज़ 2” शुरू हो चुकी है और आगे की वार्ताएं चल रही हैं।
उन्होंने कहा:
“हम मानते हैं कि अगला चरण शुरू हो चुका है। यह सारे चरण एक-दूसरे में मिलते-जुलते हैं।”
ट्रंप का 20-बिंदुओं वाला गाज़ा प्लान
सितंबर के अंत में ट्रंप ने 20 बिंदुओं वाला गाज़ा प्लान पेश किया था, जिसके आधार पर यह युद्धविराम संभव हो पाया। इसमें मानवीय सहायता, युद्ध बंदी रिहाई, सीमित पुनर्निर्माण और निगरानी प्रावधान शामिल थे।
मिस्र के राष्ट्रपति सीसी ने ट्रंप की प्रशंसा करते हुए कहा:
“यह शांति केवल एक व्यक्ति ला सकता है – डोनाल्ड ट्रंप।”
हमास की चेतावनी
हमास प्रवक्ता हज़ेम क़ासिम ने अमेरिका और अन्य मध्यस्थों से आग्रह किया कि वे इसराइल की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखें और यह सुनिश्चित करें कि वह फिर से हमला न करे।
गाज़ा युद्ध की भयावहता: आंकड़े बताते हैं सच्चाई
अक्टूबर 2023 से अब तक, गाज़ा पर इसराइली हमलों में 67,869 लोग मारे गए, जिनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।
वहीं, 7 अक्टूबर 2023 के हमले में इसराइल में 1,139 लोग मारे गए और लगभग 200 को बंधक बना लिया गया था।
निष्कर्ष: क्या यह स्थायी शांति की शुरुआत है?
कैदी और बंधकों की रिहाई, युद्धविराम समझौता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग — ये सभी संकेत हैं कि मध्य पूर्व में शांति की एक नई सुबह की उम्मीद की जा सकती है। लेकिन जब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति, ज़मीनी बदलाव और पारदर्शी निगरानी नहीं होगी, तब तक यह शांति अस्थायी साबित हो सकती है।
ट्रंप ने जो शुरुआत की है, क्या वह पूरी होगी — यह आने वाले हफ्तों और महीनों में तय होगा।

