क्योटो चैलेंज कप 2026 में भारत का डंका, गुलफाम अहमद ने जीता गोल्ड मेडल
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क्योटो, जापान।
भारत के पैरा पावरलिफ्टर गुलफाम अहमद ने जापान की धरती पर तिरंगा लहरा दिया है। क्योटो में आयोजित चैलेंज कप 2026 टूर्नामेंट में गुलफाम ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 65 किलोग्राम भार वर्ग में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता है। गुलफाम ने इस प्रतियोगिता में 155 किलोग्राम का वजन उठाकर सबको हैरान कर दिया। 30 और 31 मई 2026 को हुए इस मुकाबले में उनकी इस कामयाबी से पूरा देश गौरवान्वित है।
दिल्ली के भजनपुरा के रहने वाले गुलफाम अहमद की यह जीत उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा है। खेल के मैदान पर उनका जज्बा हमेशा से अलग स्तर का रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला यह गोल्ड मेडल उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि है।

दुखों के पहाड़ को तोड़ा, खेल को नहीं छोड़ा
गुलफाम की इस कामयाबी के पीछे संघर्ष की एक ऐसी कहानी है जो किसी को भी भावुक कर दे। उन्होंने बेहद कम समय में अपने माता-पिता को खो दिया। साल 2021 में उनकी मां का साया सिर से उठ गया। इसके बाद साल 2024 में उनके पिता का कैंसर के कारण निधन हो गया। इन दोनों हादसों ने गुलफाम को अंदर से तोड़ दिया था।
इतने बड़े व्यक्तिगत नुकसान के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने की ठानी। गुलफाम ने मुश्किल समय में भी अपनी ट्रेनिंग जारी रखी। आज उनकी यही जिद पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल बन चुकी है।
रिकॉर्ड्स से भरा है गुलफाम का सफर
यह पहली बार नहीं है जब गुलफाम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। इससे पहले जून 2025 में चीन के बीजिंग में आयोजित वर्ल्ड कप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। घरेलू मैदान पर भी गुलफाम का दबदबा रहा है। वे अब तक 10 बार नेशनल मेडलिस्ट रह चुके हैं। उनके नाम राष्ट्रीय स्तर पर दो गोल्ड, दो सिल्वर और छह ब्रॉन्ज मेडल दर्ज हैं।
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— Hatinder Singh🦅🦅 (@Panjaab131313) May 30, 2026
S. Chandeep Singh wins gold at 11th Asian Para Taekwondo Championships in Mongolia, brings Glory To India
11-year-old He Suffered a life-threatening electric current of 11,000 volts. Survived But Never Gave Up.
Congratulations Veer.
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साल 2023 में दिल्ली में हुए पहले खेलो इंडिया पैरा गेम्स में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इसके बाद साल 2025 में दूसरे खेलो इंडिया पैरा गेम्स में उन्होंने शानदार वापसी की। वहां उन्होंने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। इन जीतों ने उन्हें भारत के सबसे प्रतिभाशाली पैरा पावरलिफ्टर्स की कतार में खड़ा कर दिया है।
अगला निशाना एशियाई पैरा गेम्स और पैरालंपिक
जापान में गोल्ड मेडल जीतने के बाद गुलफाम के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने अपने भविष्य के लक्ष्यों को लेकर खुलकर बात की। गुलफाम ने कहा कि उनका अगला ध्यान एशियाई पैरा गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करने पर है। वे देश के लिए पैरालंपिक खेलों में क्वालिफाई करना चाहते हैं। उनका अंतिम सपना पैरालंपिक में भारत के लिए मेडल जीतना है।
गुलफाम की यह यात्रा युवाओं को प्रेरित करने वाली है। वे सिखाते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी कैसे अपने सपनों को जिंदा रखा जाता है।

मददगारों का जताया आभार
अपनी इस ऐतिहासिक जीत के बाद गुलफाम अहमद ने उन सभी लोगों को याद किया जिन्होंने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया। उन्होंने अपनी इस सफलता को अपने स्वर्गीय माता-पिता को समर्पित किया है।
गुलफाम ने अपने कोच राजिंदर सिंह राहेलु का विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि कोच के मार्गदर्शन और लगातार मोटिवेशन के बिना यह मुमकिन नहीं था। इसके साथ ही उन्होंने इंडिया पैरा पावरलिफ्टिंग फेडरेशन के चेयरमैन जेपी सिंह और सीओओ नितिन आर्या को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
खिलाड़ियों को अच्छे खेल कपड़े मुहैया कराने के लिए उन्होंने शिव नरेश ब्रांड की तारीफ की। पोषण और डाइट के मोर्चे पर मदद के लिए उन्होंने एडीपी और एचसीएल फाउंडेशन का शुक्रिया अदा किया। दिल्ली पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव गौरव और सूरत के रहने वाले विवेक भाई के प्रति भी उन्होंने आभार प्रकट किया। विवेक भाई के भरोसे ने गुलफाम को हर मुश्किल से लड़ने की ताकत दी। गुलफाम अब आगे की तैयारियों में जुट गए हैं ताकि देश की झोली में और भी मेडल डाल सकें।

