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क्या कमल हासन का सरनेम याकूब हसन से जुड़ा है? जानिए सच

दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज और अब राज्यसभा सांसद कमल हासन का नाम जब भी लिया जाता है, तो जेहन में एक मंझे हुए कलाकार की छवि उभरती है। लेकिन उनके नाम के पीछे छिपा ‘हासन’ शब्द दशकों से एक पहेली बना हुआ है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद यह चर्चा फिर से गर्म हो गई है। क्या कमल हासन का गहरा संबंध स्वतंत्रता सेनानी याकूब हसन से है? क्या एक हिंदू ब्राह्मण परिवार में जन्मे बच्चों के नाम के पीछे एक मुस्लिम क्रांतिकारी की दोस्ती की कहानी छिपी है? आइए इस दिलचस्प कूटनीतिक और भावनात्मक रिश्ते की तह तक चलते हैं।

एक वायरल वीडियो और मंच की मुस्कुराहट

अक्सर विवादों और चर्चाओं से दूर रहने वाले कमल हासन हाल ही में एक नए कारण से सुर्खियों में आए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक शख्स मंच से बड़े दावे के साथ कहता है कि कमल हासन के नाम का ‘हासन’ दरअसल याकूब हसन के सम्मान में रखा गया था। जब यह बात कही जा रही थी, तब कैमरे की नजर कमल हासन पर पड़ी। वह मंच के नीचे बैठे इस दावे को सुनकर गर्व से मुस्कुरा रहे थे। उनकी यह खामोश मुस्कान बहुत कुछ कह गई। हालांकि उन्होंने इस पर कभी सार्वजनिक तौर पर लंबा भाषण नहीं दिया, लेकिन उनकी देह भाषा ने इस पुराने रहस्य को फिर से जिंदा कर दिया है।

कौन थे याकूब हसन?

इस कहानी के केंद्र में जो शख्स हैं, उनका नाम है याकूब हसन। वह सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के बेहद करीबी मित्र और एक कट्टर राष्ट्रवादी थे। जब गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे, तब उनके स्वागत के लिए बनी समिति के अध्यक्ष याकूब हसन ही थे। उन्होंने खिलाफत आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और मद्रास (अब चेन्नई) की राजनीति में हिंदू-मुस्लिम एकता के सबसे बड़े पैरोकार बनकर उभरे। याकूब हसन ने जेल यात्राएं सहीं और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में रामजी लाल जैसे नेताओं के साथ मिलकर कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। वह एक ऐसे दौर के नायक थे जहां धर्म से ऊपर देश और दोस्ती थी।

श्रीनिवास अयंगर और याकूब हसन की वह ऐतिहासिक दोस्ती

कमल हासन का जन्म 7 नवंबर 1954 को परमकुडी के एक कट्टर तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता डी. श्रीनिवास अयंगर पेशे से वकील थे और खुद एक स्वतंत्रता सेनानी थे। आजादी की लड़ाई के दौरान ही उनकी मुलाकात याकूब हसन से हुई थी। इतिहास के जानकार बताते हैं कि इन दोनों के बीच दोस्ती इतनी गहरी थी कि वह किसी सगे भाई के रिश्ते से कम नहीं थी।

उस दौर में जब सांप्रदायिक ताकतें सिर उठा रही थीं, तब इन दोनों दोस्तों ने एकता की एक अनोखी मिसाल पेश करने की ठानी। कहा जाता है कि श्रीनिवास अयंगर अपने दोस्त याकूब हसन के बलिदान और उनकी शख्सियत से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने अपने बच्चों के नाम में अपने दोस्त की याद को हमेशा के लिए संजोने का फैसला किया।

पार्थसारथी से कमल हासन बनने का सफर

बहुत कम लोग जानते हैं कि कमल हासन का असली नाम शुरुआत में पार्थसारथी रखा गया था। यह नाम चेन्नई के मशहूर पार्थसारथी मंदिर के देवता के नाम पर था। लेकिन बाद में उनके पिता ने इसे बदलकर कमल हासन कर दिया। सिर्फ कमल ही नहीं, उनके बड़े भाइयों के नाम भी चारु हासन और चंद्र हासन रखे गए। उनकी बहन का नाम नलिनी हासन है।

जानकारों का दावा है कि पिता श्रीनिवास अयंगर ने अपने दोस्त ‘हसन’ का नाम अपने बच्चों के साथ जोड़ दिया। समय के साथ बोलचाल और उच्चारण के फेर में ‘हसन’ बदलकर ‘हासन’ हो गया। यह सिर्फ एक सरनेम नहीं था, बल्कि एक ब्राह्मण पिता की अपने मुस्लिम क्रांतिकारी दोस्त को दी गई सबसे बड़ी श्रद्धांजलि थी।

कमल हासन की चुप्पी और कयासों का बाजार

कमल हासन से कई बार इंटरव्यू में उनके सरनेम को लेकर सवाल पूछे गए। कभी यह कयास लगाए गए कि शायद उनका झुकाव इस्लाम की तरफ है, तो कभी इसे सिर्फ एक फिल्मी नाम माना गया। कमल हासन ने अक्सर इन सवालों को बहुत ही सलीके से टाल दिया। उन्होंने कभी भी खुलकर याकूब हसन के साथ अपने पारिवारिक रिश्तों का कच्चा चिट्ठा नहीं खोला।

लेकिन उनके करीबी और पुराने लोग बताते हैं कि कमल हासन के मन में अपने पिता के उस फैसले के प्रति अगाध सम्मान है। वह इसे सांप्रदायिक सद्भाव का एक ऐसा प्रतीक मानते हैं जिसे शब्दों में बयां करने की जरूरत नहीं है। उनके लिए ‘हासन’ शब्द एक विरासत है, जो उन्हें उस दौर की याद दिलाता है जब हिंदुस्तान के लिए हिंदू और मुसलमान एक साथ जेल की सलाखों के पीछे हँसते हुए चले जाते थे।

सिनेमा और राजनीति में एक अलग पहचान

आज कमल हासन किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वह राज्यसभा के सदस्य हैं और पद्म पुरस्कारों से सम्मानित हैं। 250 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके कमल हासन ने हमेशा अपनी कला के जरिए सामाजिक मुद्दों को उठाया है। उन्होंने अपनी पार्टी ‘मक्कल निधि मय्यम’ के जरिए भी एक समावेशी राजनीति की बात की है। शायद यह उनकी परवरिश और उनके नाम के पीछे छिपी उस विचारधारा का ही असर है कि वह हमेशा कट्टरपंथ से दूर रहे हैं।

दोस्ती का एक जीवंत स्मारक

कमल हासन का ‘हासन’ सरनेम आज भी एक पहेली भले ही बना रहे, लेकिन वायरल वीडियो और इतिहास के पन्नों को जोड़ने पर जो तस्वीर उभरती है, वह बेहद खूबसूरत है। अगर यह सच है कि एक ब्राह्मण परिवार ने अपने बच्चों का नाम एक मुस्लिम दोस्त के नाम पर रखा, तो यह आज के दौर के लिए सबसे बड़ा सबक है। याकूब हसन और श्रीनिवास अयंगर की वह दोस्ती आज कमल हासन के नाम के रूप में पूरी दुनिया के सामने मौजूद है। यह नाम चीख-चीख कर कह रहा है कि इंसानियत और दोस्ती की कोई सरहद और कोई धर्म नहीं होता।

कमल हासन की वह रहस्यमयी मुस्कुराहट शायद इसी गौरव की गवाह है। वह जानते हैं कि उनके नाम में एक इतिहास धड़कता है। वह इतिहास, जिसने भारत को आजाद कराया और वह दोस्ती, जिसने सरनेम के जरिए खुद को अमर कर लिया।

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