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जानिए, दो पाकिस्तानी कौन हैं जो 40 वर्षों से सऊदी अरब में मक्का की ग्रैंड मस्जिद में कर रहे काम

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, काहिरा, जद्दा

ऐसे विरले होंगे जिन्हें लंबे समय तक मक्का की ग्रैंड मस्जिद में सेवा करने का मौका नसीब हुआ हो. ऐसे चुनिंदा लोगों में से दो पाकिस्तानी हैं. जानकर हैरान रह जाएंगे कि ये दो ही पाकिस्तानी पिछले 40 वर्षों से अधिक समय से मक्का की ग्रैंड मस्जिद में काम करते आ रहे हैं. आज भी वे उतना ही सक्रिय हैं.

मक्का की ग्रैंड मस्जिद में इतना लंबा समय बिताने का प्रभाव है कि उन्हें यहां के चप्पा-चप्पा के बारे में पता है. इसलिए मस्जिद में इमरजेंसी में सबसे पहले इन दोनों पाकिस्तानियों को याद किया जाता है.

इन दो पाकिस्तानियों से एक का नाम है गालिब हुसैन और दूसरे का अहमद खान कंदल.अलखबरियात टीवी ने अपने एक्स हैंडल सेगालिब  हुसैन का एक वीडियो साझा किया है. साथ ही इस बारे में बताया है, ‘’जमजम कार्यकर्ता अधीक्षक गालिब हुसैन ने अपने जीवन के 40 साल ग्रैंड मस्जिद के अंदर काम करते हुए बिताए हैं.’’

गालेब हुसैन ने अलखबरियात टीवी से बात करते हुए कहा-‘‘जब मैं पाकिस्तान जाता हूं तो वे मेरा हाथ चूमते हैं, क्योंकि मैं मक्का की ग्रैंड मस्जिद में काम करता हूं.अब बात करते हैं मक्का की ग्रैंड मस्जिद में चार दशक सेवा दे रहे 63 वर्षीय अहमद खान कंदल की. वह मक्का में स्वच्छता पर्यवेक्षक हैं और 1983 से सऊदी अरब में रहकर काम कर रहे हैं.

अरब न्यूज से बात करते हुए अहमद खान कंदल ने बताया कि वह 1983 के अंत में 23 साल की उम्र में पाकिस्तान के मंडी बहाउद्दीन से मक्का आए थे. तब उन्होंने यह कतई नहीं सोचा था कि वह अपनी जिंदगी के 40 से अधिक साल सऊदी अरब में बिताएंगे, विशेष रूप से मक्का की ग्रैंड मस्जिद की एक स्वच्छता कार्यकर्ता की हैसियत से.

कंदल ने शुरू में अपने माता-पिता से वादा किया था कि वह जल्द से जल्द घर लौट आएगा. लेकिन मक्का और ग्रैंड मस्जिद की सेवा ने उन्हें व्यस्त रखा. इस बीच उनके माता-पिता का निधन हो गया.साल बीतते गए और आज 63 वर्षीय कंदल ग्रैंड मस्जिद में स्वच्छता कार्य के पर्यवेक्षक हैं.

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उनकी स्मृति सऊदी अरब की कई खास घटनाएं दफन हैं, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण ग्रैंड मस्जिद की दूसरी और तीसरी सऊदी विस्तार और काबा बहाली परियोजनाएं.कंदल ने बताया, चूंकि मैं लगभग 40 साल पहले सऊदी अरब आया था, मुझे लगा कि मैं परिवार के बीच हूं और मुझे कभी भी अलग-थलग महसूस नहीं हुआ.वह आगे कहते हैं,“जब भी मैं किसी नए व्यक्ति से मिलता हूं, वे मुझे बताते हैं कि मैं कितना भाग्यशाली हूं.

ग्रैंड मस्जिद की सेवा करना वहां इबादत करने जैसा है. मैं हमेशा पवित्र काबा के निकट रहता हूं .यह एक बड़ा सम्मान है, जो केवल अल्लाह के साथ विशेष संबंध रखने वालों को ही मिलता है. मुझे चार दशकों तक यह काम करने का सौभाग्य प्राप्त है.”

उन्होंने कहा कि वह दिवंगत किंग फहद बिन अब्दुल अजीज के शासनकाल के दौरान सऊदी अरब आए थे.कंदल ने कहा, मैंने बाहरी प्रांगणों की सफाई का काम किया. लगभग चार साल बाद, ग्रैंड मस्जिद का दूसरा सऊदी विस्तार हुआ. मैं इस बात का गवाह हूं कि कैसे मुसलमानों ने अपने इबादतों को अधिक आराम से करना शुरू कर दिया.

पाकिस्तानी कार्यकर्ता ने दिवंगत राजा फहद के शासनकाल के दौरान काबा की बहाली देखी है. कहा कि यह उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और सुंदर चरणों में से एक है.कंडल का मानना है कि अल्लाह ने उन्हें कई महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह बनने के लिए चुना, जिसमें दिवंगत राजा अब्दुल्ला के शासनकाल के दौरान तीसरा सऊदी विस्तार भी शामिल है.

ग्रैंड मस्जिद में अपने समय के अलावा, कंदल ने सऊदी बिनलादीन समूह में स्थानांतरित होने तक 11 वर्षों तक सफाई कंपनी के साथ काम किया. इन वर्षों में उन्हांेने अपनी कार्यकुशलता और कड़ी मेहनत से नई पहचान बनाई.
ग्रैंड मस्जिद में अपने समय के दौरान दुनिया भर से आए गर्मजोशी से स्वागत करने वालांे के साथ काम करना कंदल के लिए सबसे बड़ी बात रही.
उन्होंने कहा, हम सभी प्यारे भाई हैं. ग्रैंड मस्जिद और पैगंबर की मस्जिद के मामलों के लिए जनरल प्रेसीडेंसी के सभी कार्यकर्ता दो पवित्र मस्जिदों को सर्वोत्तम तरीके से देखभाल के लिए एक संयुक्त टीम के रूप में काम करते हैं.कंदल के दो बेटे और एक बेटी हैं. उनका एक बेटा ग्रैंड मस्जिद में विद्युत विभाग में काम करता है और दूसरा अपनी बहन के साथ पाकिस्तान में रह रहा है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी इच्छा मक्का में दफन होने की है. जिस शहर में वह रहते हैं, उन्होंने बताया कि जो कोई भी दो पवित्र मस्जिदों की सेवा में रहता है वह किसी भी तरह से ऊब या अकेला महसूस नहीं कर सकता.कंदल ने कहा, खुशी, प्यार, सद्भाव, सहिष्णुता, दया और शांति ग्रैंड मस्जिद के सभी कोनों में है. “जहाँ दुनिया भर से आने वाले मुसलमान अल्लाह की स्तुति करने आते हैं.