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मजदूर की बेटी बनी स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नागपुर

कहते हैं कि मेहनत, सब्र और भरोसा अगर एक साथ हों तो मंजिल देर से ही सही, लेकिन मिलती जरूर है। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले की रहने वाली आशरीन अशफाक शेख की कहानी इसी सच की मिसाल है। कई बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल कर स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर बनने का गौरव हासिल किया है।

आशरीन की इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में सक्रिय मुस्लिम सामाजिक संगठन ‘सेवा’ को भी गर्व से भर दिया है। संगठन ने इस सफलता को अपनी 12 वर्षों की यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया है।

नागपुर और यवतमाल में शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में काम करने वाला संगठन सेवा पिछले कई वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध करा रहा है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि आशरीन उन छात्रों में शामिल हैं जिन्होंने संघर्ष को अपनी ताकत बना लिया।

आशरीन अशफाक शेख का सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता एक मजदूर हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित रही। इसके बावजूद उन्होंने बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करती रहीं।

सेवा संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार पिछले छह वर्षों से आशरीन संगठन के मार्गदर्शन में अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए थीं। हालांकि संगठन के कई सदस्यों की उनसे व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई, लेकिन उनकी लगन, अनुशासन, इबादत और अल्लाह पर अटूट भरोसे ने सभी को प्रभावित किया।

आशरीन का परिचय सबसे पहले शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जव्वाद काजी ने सेवा से कराया था। जव्वाद काजी ने शुरुआत से ही उनकी प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने आशरीन से कहा था कि उन्हें जब भी किसी सहायता या मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी, वे हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे। बताया जाता है कि उन्होंने अपने इस वादे को पूरी तरह निभाया और हर मुश्किल दौर में आशरीन का हौसला बढ़ाया।

आशरीन ने देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली की परीक्षाओं में कई बार सफलता हासिल की। लेकिन संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में बार बार असफलता का सामना करना पड़ा।

हर बार उन्हें उम्मीद रहती थी कि इस बार प्रीलिम्स पार कर अंतिम सूची तक पहुंचेंगी। लेकिन किस्मत बार बार पहली सीढ़ी पर ही उन्हें रोक देती थी। यही नहीं, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भी उन्होंने कई बार मुख्य परीक्षा पास की, लेकिन इंटरव्यू चरण में सफलता नहीं मिल सकी।

लगातार मिल रही असफलताओं ने मानसिक दबाव भी बढ़ाया। समय के साथ उम्र बढ़ रही थी। परिवार और समाज की ओर से शादी को लेकर दबाव भी बढ़ने लगा था। एक तरफ बेटी के सपनों को पूरा करने की चिंता थी, दूसरी तरफ सामाजिक अपेक्षाएं थीं। इस स्थिति ने आशरीन और उनकी मां दोनों को परेशान किया।

सेवा से जुड़े लोगों के अनुसार हर असफलता के बाद आशरीन टूटती जरूर थीं, लेकिन बिखरती नहीं थीं। वे अपने मार्गदर्शकों से बात करतीं, रोतीं, फिर खुद को संभालतीं और नए संकल्प के साथ तैयारी में जुट जातीं।

उनका विश्वास था कि अगर अल्लाह ने उनके दिल में यह सपना डाला है तो एक दिन उसे पूरा भी करेगा। यही सोच उन्हें बार बार खड़ा करती रही। असफलताओं के बावजूद उन्होंने मेहनत करना नहीं छोड़ा।

आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर उन्होंने स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर पद पर चयन प्राप्त किया। यह सफलता सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और धैर्य का परिणाम है।

आशरीन की जिंदगी में खुशियां यहीं नहीं रुकीं। परिवार और करीबी लोगों के मुताबिक उन्हें एक नेक, शिक्षित और राजपत्रित अधिकारी जीवनसाथी भी मिला है। इसे उनके संघर्षों के बाद मिली दोहरी खुशी के रूप में देखा जा रहा है।

सेवा संगठन का कहना है कि आशरीन की सफलता उन हजारों छात्राओं के लिए प्रेरणा है जो आर्थिक कठिनाइयों, सामाजिक दबाव और लगातार असफलताओं के बावजूद अपने सपनों को जिंदा रखे हुए हैं।

आज आशरीन अशफाक शेख की कहानी यह संदेश देती है कि असफलता अंत नहीं होती। यदि इरादे मजबूत हों, मेहनत लगातार जारी रहे और खुद पर भरोसा बना रहे तो सफलता एक दिन जरूर कदम चूमती है।