नीट परीक्षा में हिजाब पर विवाद
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह परीक्षा का प्रश्नपत्र या परिणाम नहीं, बल्कि परीक्षा केंद्रों पर ड्रेस कोड और हिजाब को लेकर सामने आए अलग अलग दावे हैं। राजस्थान के अजमेर से सामने आए एक वीडियो और जम्मू कश्मीर से वायरल हुए दूसरे वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या देश भर में नीट परीक्षा के लिए एक समान नियम लागू हैं या अलग अलग परीक्षा केंद्र अपने स्तर पर अलग व्यवस्था अपना रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और पोस्ट के अनुसार राजस्थान के अजमेर में रहने वाली 18 वर्षीय छात्रा कुलसुम बानो को कथित तौर पर नीट यूजी परीक्षा केंद्र में प्रवेश को लेकर कठिनाई का सामना करना पड़ा। दावा किया जा रहा है कि छात्रा को बुर्का और सिर पर दुपट्टा पहनकर आने के कारण शुरू में परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया।
दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर कश्मीर का एक वीडियो भी तेजी से साझा किया जा रहा है। इस वीडियो में एक मुस्लिम छात्रा परीक्षा समाप्त होने के बाद अपना अनुभव साझा करती दिखाई दे रही है। वीडियो में छात्रा हिजाब और पारंपरिक परिधान में नजर आती है। इसी को लेकर इंटरनेट पर बहस तेज हो गई है।
हालांकि इन दोनों वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। न ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया है।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मुद्दे को लेकर हजारों प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों ने परीक्षा केंद्रों पर एक समान नियम लागू करने की मांग की है। वहीं कुछ लोगों ने सुरक्षा जांच को सर्वोपरि बताते हुए परीक्षा प्रक्रिया में निर्धारित दिशा निर्देशों का पालन करने की बात कही है।
अजमेर में बुर्क़ा पहनकर NEET पेपर देने आयी मुस्लिम लड़की कुलसुम बानो ने अंदर नहीं जाने पर कहा,
— Nargis Bano (@Nargis_Bano78) June 21, 2026
" ये जानबूझकर हमें परेशान कर रहे है , जबकि NTA ने हिजाब की इज़ाज़त दी है , में पेपर देने अपने बुर्के के साथ जाउंगी नहीं तो पेपर नहीं दूंगी , मेरे लिये मेरा हिजाब और बुर्क़ा मायने रखता… pic.twitter.com/qj2j5AocZr
वायरल पोस्ट के अनुसार कुलसुम बानो राजस्थान के ब्यावर की रहने वाली हैं और पिछले तीन वर्षों से नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में दावा किया गया कि छात्रा ने परीक्षा केंद्र अधिकारियों से कहा कि यदि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने हिजाब या बुर्का पहनकर परीक्षा देने की अनुमति दी है तो स्थानीय स्तर पर उन्हें क्यों रोका जा रहा है।
कुछ पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि लगभग एक घंटे तक चली बातचीत और विवाद के बाद छात्रा को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दे दिया गया। हालांकि इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर परीक्षा केंद्रों पर ड्रेस कोड और धार्मिक पहचान से जुड़े प्रश्नों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी समय समय पर परीक्षा संबंधी दिशा निर्देश जारी करती है। इन दिशा निर्देशों में आमतौर पर अभ्यर्थियों को हल्के कपड़े पहनने, धातु की वस्तुओं से बचने और सुरक्षा जांच में सहयोग करने की सलाह दी जाती है। कुछ मामलों में धार्मिक परिधान पहनने वाले अभ्यर्थियों के लिए अतिरिक्त जांच प्रक्रिया भी निर्धारित की जाती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी परीक्षा में ड्रेस कोड लागू है तो उसके दिशा निर्देश सभी केंद्रों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। इससे भ्रम की स्थिति समाप्त होगी और छात्रों को मानसिक तनाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।
कई अभिभावकों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं पहले ही छात्रों के लिए अत्यधिक तनावपूर्ण होती हैं। ऐसे में परीक्षा केंद्र पर किसी भी प्रकार की असमंजस की स्थिति विद्यार्थियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।
Location: Ajmer, Rajasthan
— The Muslim (@TheMuslim786) June 21, 2026
"The exam doesn't matter to me. What matters is my burqa and my identity."🔥
A Muslim student, Kulsum Bano, was refused entry to take the NEET exam because she was wearing a burqa. pic.twitter.com/p2GOQxomjn
सोशल मीडिया पर इस विवाद को लेकर दो अलग अलग धाराएं दिखाई दे रही हैं। एक पक्ष का कहना है कि धार्मिक पहचान का सम्मान करते हुए छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति मिलनी चाहिए, बशर्ते सुरक्षा जांच पूरी तरह से हो। दूसरा पक्ष सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादों से बचने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को स्पष्ट और विस्तृत दिशा निर्देश जारी करने चाहिए। साथ ही सभी परीक्षा केंद्रों पर इन नियमों का समान पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कश्मीरी लड़की ने NEET-UG परीक्षा समाप्त होने के बाद किया कुछ कहा सुनिए… pic.twitter.com/0IMf1AxN1X
— Qalb E Haq (@qalbEhaq) June 21, 2026
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या देश के सभी परीक्षा केंद्रों पर एक समान नियम लागू किए जा रहे हैं। इस पूरे मामले पर अब सभी की निगाहें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
जब तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आता, तब तक सोशल मीडिया पर वायरल दावों को अंतिम सत्य मानने से बचना चाहिए। लेकिन यह विवाद निश्चित रूप से परीक्षा प्रणाली में एकरूपता और पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

