मौलाना हसन अली रजानी का ईरान पर विवादित दावा, दी धमकी की जानकारी
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, मुंबई
गुजरात के प्रमुख शिया धर्मगुरु मौलाना हसन अली रजानी अपने बयानों को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने ईरान और उसके दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को लेकर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले दावे किए हैं। मौलाना रजानी ने एक ईमेल के जरिए मीडिया में अपना बयान जारी किया है। इस बयान के बाद मुस्लिम समाज और सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है।
गरीब बच्चों का पैसा लौटाने की मांग
मौलाना हसन अली रजानी ने अपने बयान में सीधे तौर पर ईरान सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान दुनिया के सभी गरीब बच्चों का पैसा वापस कर देता तो ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की आत्मा को शांति मिलती। हालांकि मौलाना ने अपने इस दावे में यह साफ नहीं किया कि ईरान ने किन बच्चों के पैसे दबा रखे हैं। उन्होंने इस मामले में दिवंगत सुप्रीम लीडर की भूमिका को लेकर भी कोई साफ जानकारी नहीं दी।
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मौलाना ने दुनिया भर के शिया समुदाय के लोगों से अपनी आंखें खोलने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ईरान के दीवाने बन चुके शियाओं को अब सच देखना चाहिए। उनके मुताबिक ईरान अपनी छवि और नाम को बचाने के लिए अपने ही लीडर को कब्र में भी नुकसान पहुंचाने का काम कर रहा है।
इस्लाम कबूलने का किया बड़ा ऐलान
इस बयान का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा वह था जिसमें मौलाना हसन अली रजानी ने अपनी धार्मिक विचारधारा बदलने की बात कही। उन्होंने कहा कि शिया समुदाय के भीतर कई गलत काम और नई सोच आ चुकी है। इन सब बातों से परेशान होकर वह बहुत जल्द सच्चे दिल से इस्लाम अपनाने का बड़ा ऐलान करने वाले हैं। मौलाना के इस बयान से लोग हैरान हैं क्योंकि वह खुद एक स्थापित शिया मौलाना रहे हैं। वह शिया और सुन्नी विचारधारा के इस बड़े अंतर को लेकर खुलकर सामने आ गए हैं।
जान का खतरा और धमकियां मिलने का दावा
मौलाना रजानी ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में हजारों लोग उनके खून के प्यासे हो चुके हैं। उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। मौलाना के मुताबिक उनके खिलाफ नफरत की एकमात्र वजह यह है कि वह ईरान को अपने ईमान का हिस्सा नहीं मानते हैं। वह अपनी रोज की दुआओं में ईरान का नाम शामिल नहीं करते हैं। यहां तक कि अज़ान और इकामा पढ़ते समय भी वह ईरान का जिक्र नहीं करते हैं।
मौलाना ने शिया समाज के कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन लोगों ने हमेशा मोमिनों की मां हज़रत आयशा को लेकर गलत बातें कहीं और पैगंबर के साथियों को बदनाम किया। मौलाना ने चेतावनी दी कि अब यह पूरा मामला पूरी तरह बिगड़ चुका है और यह विवाद देश की सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय माहौल के बीच बड़ा उलटफेर
मौलाना हसन अली रजानी का यह तीखा बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान में विशेष धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रम चल रहे हैं। वहां सऊदी अरब समेत दुनिया के करीब 70 देशों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल मौजूद है। विभिन्न देशों के लाखों लोग इस समय ईरान में जुटे हुए हैं। इस वैश्विक माहौल के बीच भारतीय शिया मौलाना का यह बयान ईरान विरोधी रुख को खुलकर सामने लाता है।
इससे पहले भी मौलाना रजानी अमेरिका, इजरायल और सऊदी अरब के समर्थन में खुलकर बोलते रहे हैं। उन्होंने पिछले दिनों ईरान पर हुए सैन्य हमलों को भी एक तरह से सही ठहराया था। मौलाना के इस नए बयान ने मुस्लिम जगत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। हालांकि इस पूरे मामले में मौलाना ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि धमकियां मिलने के बाद उन्होंने पुलिस या कानून की मदद ली है या नहीं।

