Education

सेवा की पुलिस भर्ती मुफ्त कोचिंग के लिए उमड़े महाराष्ट्र के युवा

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नागपुर (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में सामाजिक बदलाव के लिए काम करने वाली अग्रणी संस्था सेवा ने एक बार फिर युवाओं के सपनों को उड़ान दी है। खराब मौसम, रिमझिम बारिश और आसमान में छाए बादलों के बावजूद युवाओं का हौसला कम नहीं हुआ। संस्था की ओर से महाराष्ट्र पुलिस भर्ती की मुफ्त कोचिंग क्लास के सातवें बैच के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए चार और पांच जुलाई दो हजार छब्बीस को विशेष इंटरव्यू का आयोजन किया गया।

इस इंटरव्यू में शामिल होने के लिए पूरे महाराष्ट्र से भारी संख्या में छात्र और छात्राएं पहुंचे। इनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम लड़कियां भी शामिल थीं, जो पुलिस बल में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहती हैं। युवाओं के साथ उनके माता-पिता भी इस चयन प्रक्रिया को देखने के लिए आए थे।

खराब मौसम पर भारी पड़ा युवाओं का जज्बा

इंटरव्यू के पहले दिन यानी चार जुलाई दो हजार छब्बीस को नागपुर और आसपास के जिलों में सुबह से ही रिमझिम बारिश हो रही थी। मौसम काफी खराब था, लेकिन युवाओं का जोश देखने लायक था। दूर-दराज के इलाकों से छात्र समय पर इंटरव्यू केंद्र पहुंचे। पहले ही दिन कुल नब्बे उम्मीदवारों के इंटरव्यू पूरे किए गए।

कैंडिडेट्स सिर्फ नागपुर या यवतमाल से नहीं थे। वे विदर्भ और मराठवाड़ा के सुदूर इलाकों से सफर करके आए थे। जलगांव जिले के पाचोरा, हिंगोली जिले के औंढा नागनाथ, उमरखेड़, जादगांव और नांदेड़ जैसे शहरों से युवा आए थे। इसके अलावा अमरावती और औरंगाबाद की सीमाओं से सटे गांवों और कस्बों के युवाओं ने भी इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

उच्च शिक्षित युवाओं ने भी दिखाई दिलचस्पी

इस बार के पुलिस भर्ती बैच नंबर सात के इंटरव्यू में एक बेहद दिलचस्प बात सामने आई। पुलिस कांस्टेबल पद की कोचिंग के लिए कई ऐसे उम्मीदवार भी आए जो बहुत ज्यादा शिक्षित थे। इनमें कुछ पोस्ट ग्रेजुएट यानी परास्नातक युवा थे, तो एक छात्र फूड टेक्नोलॉजी में बीटेक की डिग्री धारक था।

संस्था के पदाधिकारियों ने जब इन उच्च शिक्षित युवाओं के दस्तावेज देखे, तो उन्हें एक बेहतर सलाह दी। सेवा संस्था ने इन होनहार छात्रों को पुलिस कांस्टेबल के बजाय उच्च पदों के लिए तैयार करने का फैसला किया। बीटेक और पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को संस्था द्वारा पहले से चलाई जा रही एमपीएससी (MPSC) यानी महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कक्षाओं में भेज दिया गया। दो विशेष छात्रों को सीधे एमपीएससी परीक्षा की तैयारी करने का सुझाव देकर मार्गदर्शन दिया गया ताकि वे बड़े अधिकारी बन सकें।

दिहाड़ी मजदूरी कर तैयारी कर रहे छात्र भी पहुंचे

संस्था की इस मुफ्त कोचिंग का लाभ उठाने के लिए केवल संपन्न परिवारों के बच्चे ही नहीं, बल्कि बेहद गरीब तबके के युवा भी आ रहे हैं। इंटरव्यू में एक बड़ी संख्या ऐसे गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों की भी थी जो पहले से ही यवतमाल और नागपुर में रहकर पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे हैं।

ये छात्र इतने गरीब हैं कि पढ़ाई और रहने का खर्च निकालने के लिए दिन में दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। इसके बाद जो समय बचता है, उसमें वे पुलिस भर्ती की फिजिकल और लिखित परीक्षा की तैयारी करते हैं। सेवा संस्था के पदाधिकारियों ने इन बच्चों की लगन को देखकर उनकी हर संभव मदद करने का भरोसा दिया।

पूरी पारदर्शिता के साथ दो पैनलों ने लिए इंटरव्यू

इंटरव्यू की प्रक्रिया को तेजी से और पूरी पारदर्शिता के साथ निपटाने के लिए सेवा संस्था ने विशेष तैयारी की थी। इसके लिए दो अलग-अलग पैनल बनाए गए थे। हर पैनल में संस्था के दो वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल थे। इन टीमों ने बच्चों के सभी जरूरी कागजातों की जांच की। इसके साथ ही पुलिस भर्ती के लिए जरूरी शारीरिक मापदंडों का भी सत्यापन किया गया।

इंटरव्यू केंद्र पर बच्चों के साथ आई महिलाओं और अभिभावकों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य और करियर की संभावनाओं को देखकर माता-पिता की आंखों में उम्मीद की चमक साफ नजर आ रही थी। संस्था की ओर से की गई व्यवस्थाओं को देखकर अभिभावकों ने इस सामाजिक कार्य की जमकर तारीफ की।

सेवा संस्था का लगातार जारी है सामाजिक मिशन

सेवा संस्था पिछले कई सालों से नागपुर, यवतमाल और पूरे विदर्भ क्षेत्र में मुस्लिम बच्चों के शैक्षिक और सामाजिक उत्थान के लिए लगातार जमीनी स्तर पर काम कर रही है। पुलिस भर्ती के लिए मुफ्त कोचिंग देना, उनके रहने की उत्तम व्यवस्था करना और पढ़ाई-लिखाई का पूरा खर्च उठाना संस्था के मुख्य कार्यों का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

इस मुफ्त कोचिंग के जरिए अब तक सैकड़ों गरीब और जरूरतमंद युवा पुलिस विभाग और अन्य सरकारी नौकरियों में शामिल होकर अपने पैरों पर खड़े हो चुके हैं। पांच जुलाई दो हजार छब्बीस को भी इंटरव्यू का दौर जारी रहा, जिसमें बचे हुए उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच की गई। संस्था का लक्ष्य है कि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े युवा को भी मुख्यधारा में शामिल होने का पूरा मौका मिले।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *