मोसाद और सीआईए हैरान, ताबूत के पास जिंदा दिखे अहमद वाहिदी
नौशाद अख्तर
दुनिया की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसियां मोसाद और सीआईए एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। इन एजेंसियों ने दावा किया था कि उन्होंने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी को मौत के घाट उतार दिया है। लेकिन ईरान ने सभी दावों को गलत साबित कर दिया है। पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के ताबूत के पास अहमद वाहिदी को जीवित देखा गया है। यह नजारा देखकर पूरी दुनिया हैरान रह गई है। मोसाद और सीआईए को अब समझ नहीं आ रहा कि आखिर उनसे चूक कहां हुई।
इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एक बड़ा हमला किया था। उस हमले में ईरान के कमांडर मोहम्मद पाकपुर मारे गए थे। इसके तुरंत बाद अहमद वाहिदी को आईआरजीसी की कमान सौंपी गई थी। तब से ही दोनों देश उन्हें ढूंढ रहे थे। इंटरपोल ने उनके खिलाफ नोटिस भी जारी किया था। लेकिन वाहिदी लगातार भूमिगत होकर काम कर रहे थे। उन्होंने अमेरिका और इजरायल के लिए मुसीबतें पैदा कर रखी थीं।
ग्लोबल डिफेंस कॉर्प्स की 9 जून 2026 की रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि इजरायली सेना ने अहमद वाहिदी और मुज्तबा खामेनेई को तेहरान में मार गिराया है। यह खबर आग की तरह फैली थी। हर किसी को लगा कि ईरान का यह कट्टर नेता अब खत्म हो चुका है। लेकिन अली खामेनेई की अंतिम रस्मों के दौरान वाहिदी का प्रकट होना एक बड़ा संदेश है। यह संदेश साफ है कि ईरान इन खुफिया एजेंसियों की सोच से कहीं ज्यादा आगे चल रहा है।
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अब दुनिया भर के सुरक्षा विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि वाहिदी ने खुद को सबके सामने क्यों जाहिर किया। कुछ लोग इसे उनकी गलती मान रहे हैं। उनका तर्क है कि भूमिगत रहकर वह देश और सेना के लिए ज्यादा प्रभावी काम कर सकते थे। लेकिन रणनीतिक जानकारों की राय अलग है। उनका मानना है कि वाहिदी का अचानक सामने आना कोई इत्तेफाक नहीं है। इसके पीछे एक गहरा मकसद छिपा है जिसे डिकोड करना बहुत जरूरी है।

कौन हैं अहमद वाहिदी?
अहमद वाहिदी रिवोल्यूशनरी गार्ड के सबसे कट्टर नेताओं में गिने जाते हैं। वह तेहरान के फैसलों की अगुवाई कर रहे हैं। इस समय वॉशिंगटन के साथ उनकी बातचीत बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। ईरान युद्ध को लेकर बातचीत एक अहम मोड़ पर है। ऐसे में वाहिदी का तेहरान के अगले कदमों को तय करना बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वाहिदी को लंबे समय से ईरान के सुरक्षा तंत्र में एक कट्टरपंथी नेता माना जाता रहा है। उन पर अमेरिका ने कई प्रतिबंध लगा रखे हैं। यह प्रतिबंध उन पर ईरान में घरेलू विरोध प्रदर्शनों को दबाने के आरोप में लगाए गए थे। इसके अलावा तीन दशक पहले अर्जेंटीना में एक यहूदी केंद्र पर हुए बमबारी कांड में भी उनका नाम आया था। इसी कारण इंटरपोल को उनकी तलाश है। जानकारों का कहना है कि वाहिदी अपने पूर्ववर्ती मोहम्मद पाकपुर से भी ज्यादा सख्त हैं। वह अमेरिका के साथ किसी भी तरह के समझौते का पुरजोर विरोध करते हैं।
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में ईरान प्रोजेक्ट के डायरेक्टर अली वाएज ने वाहिदी के बारे में एक अहम बात कही है। उनके अनुसार, वाहिदी का प्रभाव बहुत ज्यादा है। वह एक ऐसे सिस्टम का हिस्सा हैं जहां फैसले आम सहमति से लिए जाते हैं। लेकिन बातचीत की मेज पर वाहिदी की बात का वजन बहुत ज्यादा होता है। विश्लेषकों का मानना है कि IRGC में वाहिदी का शीर्ष पद पर पहुंचना यह दिखाता है कि ईरानी नेतृत्व को कमजोर करने की अमेरिकी और इजरायली कोशिशें नाकाम रही हैं। इन कोशिशों से कोई नरम नेतृत्व सामने नहीं आया है, बल्कि वाहिदी जैसे कट्टर नेता और मजबूती से उभरे हैं।
Iran Islamic Revolutionary Guards Chief Appears in Public for First Time Since War
— Marvin Wiseman (@MarvinWise83638) July 3, 2026
Ahmad Vahidi paid his respects before the body of Ali Khamenei in Tehranhttps://t.co/Bpc5EoIiYn #IRGC @RitaPanahi @MahyarTousi @gghamari @ArminNavabi
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव
वाहिदी की अगुवाई में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात पर दबाव बढ़ा दिया है। यह दुनिया का सबसे अहम एनर्जी कॉरिडोर है। यहाँ दबाव बढ़ाकर उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक संदेश देने की कोशिश की है। तेहरान ने पिछली बातचीत की तुलना में वॉशिंगटन के सामने अब और भी कड़े रुख अपना लिए हैं।
इजरायली सैन्य खुफिया विभाग में ईरानी शाखा के पूर्व प्रमुख डैनी सिट्रिनोविच ने वाहिदी को एक बहुत प्रभावशाली और कट्टरपंथी नेता बताया है। उनके अनुसार वाहिदी इस्लामिक क्रांति के सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने सीएनएन को बताया कि वाहिदी के बिना कोई भी समझौता संभव नहीं है। वह उन लोगों में से हैं जो साफ कहते हैं कि अगर हमें वह नहीं मिलता जो हम चाहते हैं और ट्रंप युद्ध चाहते हैं, तो उन्हें आने दें।
ट्रंप की चेतावनी और वाहिदी का जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हफ्ते कहा है कि अगर तेहरान कोई डील नहीं मानता है, तो अमेरिका ईरान पर फिर से हमले शुरू करने के करीब है। ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वे ईरान के साथ बातचीत के आखिरी दौर में हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि या तो कोई डील होगी, या फिर अमेरिका कुछ ऐसे कदम उठाएगा जो सुखद नहीं होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि समय बहुत तेजी से बीत रहा है।
इस पर अहमद वाहिदी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरानी इलाके पर किसी भी नए हमले से टकराव बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। ईरानी मीडिया के अनुसार, उन्होंने प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अगर ईरानी जमीन पर कोई और आक्रामक कार्रवाई की जाती है, तो जो आग अब तक एक सीमित क्षेत्रीय युद्ध तक ही सीमित रही है, वह सभी सीमाओं को पार करके भड़क उठेगी।
IRGC COMMANDER REAPPEARS AFTER MONTHS IN HIDING
— Mossad Commentary (@MOSSADil) July 2, 2026
Ahmad Vahidi, a senior IRGC figure and one of Israel’s top targets during Operation Roaring Lion, has resurfaced publicly after nearly four months out of sight. He was seen at a meeting overseeing preparations for Supreme Leader… pic.twitter.com/rhdH8E6djo
सैन्य कमांडर की नियुक्ति का घटनाक्रम
मेजर जनरल अहमद वाहिदी को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया गया है। IRGC की प्रेस सर्विस ने 1 मार्च को इसकी घोषणा की थी। इससे पहले वे एक सलाहकार के तौर पर काम कर रहे थे। IRGC कमांडर जनरल मोहम्मद पाकपौर की मौत के बाद वाहिदी को इस पद पर लाया गया। ईरान ने देश पर हुए हमलों के कारण डिफेंस काउंसिल के सेक्रेटरी वाइस एडमिरल अली शामखानी और देश की आर्म्ड फोर्सेज के जनरल स्टाफ के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अब्दोलरहीम मौसावी की मौत की भी पुष्टि की थी।
28 फरवरी का वह काला दिन
28 फरवरी को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ इजरायल के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की थी। इजराइली और अमेरिकी सेना ने देश पर हमला किया, जिसमें मिनाब शहर का एक स्कूल भी शामिल था। ताजा आंकड़ों के अनुसार, उस हमले में 148 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में तेहरान ने मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। अबू धाबी और दुबई में भी धमाके हुए थे।
संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वसीली नेबेन्ज़िया ने 28 फरवरी को कहा था कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की आक्रामकता से क्षेत्र में स्थिति पहले ही बिगड़ चुकी है। यह मामला देश की सीमाओं से बाहर भी जा सकता है।
निष्कर्ष
अहमद वाहिदी की वापसी ने पूरे समीकरण बदल दिए हैं। एक तरफ अमेरिका और इजरायल का खुफिया तंत्र है, जो अपनी साख बचाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी तरफ ईरान है, जो वाहिदी के जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। आने वाला समय बताएगा कि यह तनाव किस दिशा में जाएगा। क्या ट्रंप और वाहिदी किसी समझौते पर पहुंचेंगे या फिर दुनिया एक और बड़े युद्ध की गवाह बनेगी। फिलहाल, सबकी निगाहें तेहरान पर टिकी हैं। अहमद वाहिदी के अगले कदम पर ही मध्य पूर्व का भविष्य निर्भर करेगा। ईरान अब किसी भी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है और वाहिदी इसके सबसे बड़े प्रतीक बन चुके हैं।

