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थाईलैंड और कंबोडिया के मुसलमान: धार्मिक सह-अस्तित्व और चुनौतियों की हकीकत

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

जब दो बौद्ध बहुल दक्षिण-पूर्व एशियाई देश—थाईलैंड और कंबोडिया—मंदिर विवाद और सीमा संघर्ष में उलझे हों, तो यह सवाल लाज़मी है: इन देशों में मुसलमानों की क्या स्थिति है? क्या वे सिर्फ गिनती भर में हैं या उन्होंने अपने धार्मिक और सांस्कृतिक अस्तित्व को इन बौद्ध राष्ट्रों में रच-बस लिया है? यह विशेष रिपोर्ट इन्हीं सवालों के जवाब खोजने की एक कोशिश है, जो न सिर्फ थाईलैंड और कंबोडिया के मुसलमानों की जनसंख्या को सामने लाती है, बल्कि उनकी सामाजिक स्थिति, धार्मिक स्वतंत्रता और समकालीन चुनौतियों को भी उजागर करती है।


थाईलैंड के मुसलमान: बहुसंस्कृति में अल्पसंख्यक

थाईलैंड में इस्लाम भले ही अल्पसंख्यक धर्म है, लेकिन इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रभाव क्षेत्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण है। थाई मुसलमानों की आबादी को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आते हैं। 2006 के आधिकारिक आंकड़ों में यह संख्या 4.9% बताई गई थी, लेकिन 2024 तक यह अनुमानित 12% यानी करीब 75 लाख तक पहुंच चुकी है।
थाईलैंड की कुल जनसंख्या लगभग 6.2 करोड़ है, जिसमें मुसलमानों की बड़ी संख्या दक्षिणी प्रांतों—याला, पट्टानी, नाराथिवात और सोंगखला—में केंद्रित है। ये क्षेत्र कभी मलेशिया का हिस्सा थे और यहाँ की आबादी सांस्कृतिक रूप से मलेशियाई मलय मुसलमानों के निकट है।

यहाँ के अधिकांश मुसलमान सुन्नी हैं और इस्लाम के शाफई विचारधारा को मानते हैं। कुछ क्षेत्रों में शिया, वहाबी और अहमदी समुदाय भी मौजूद हैं, जो बहुलतावादी धार्मिक ढांचे को रेखांकित करते हैं।


धार्मिक स्वतंत्रता और सरकारी नीति

थाईलैंड का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, लेकिन व्यवहार में मुसलमानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
सरकार धार्मिक समूहों को पंजीकरण की बाध्यता देती है, जिसमें गतिविधियों का विवरण, नेताओं की जानकारी और धन स्रोतों की पारदर्शिता मांगी जाती है। हालांकि बौद्ध धर्म को ‘राष्ट्रधर्म’ जैसा दर्जा प्राप्त है और सरकार बौद्ध शिक्षा को विशेष रूप से प्रोत्साहन देती है, जबकि अन्य धार्मिक समूहों को राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक प्रदर्शन से परहेज रखने की सलाह दी जाती है।

मुसलमानों के लिए मस्जिद बनाना, अज़ान देना और इस्लामी शिक्षण केंद्र चलाना तकनीकी रूप से वैध है, लेकिन सामाजिक स्वीकार्यता की दृष्टि से यह अभी भी विवाद का कारण बनता है। बैंकॉक जैसे शहरी क्षेत्रों में मस्जिदों के लाउडस्पीकर पर अज़ान देने पर शिकायतें दर्ज होती रही हैं।


मुसलमानों पर सुरक्षा का साया

थाईलैंड के दक्षिणी हिस्सों में दशकों से इस्लामी विद्रोह जारी है, जहाँ कुछ मुस्लिम समूह स्वायत्तता या स्वतंत्रता की मांग करते हैं। इस संघर्ष के कारण दक्षिणी प्रांतों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती रहती है और मुस्लिम समुदायों की निगरानी होती है।

हाल ही में थाई सरकार ने 34 कंबोडियाई मुसलमानों को निर्वासित कर दिया, जो वैध वीज़ा पर देश में दाख़िल हुए थे, लेकिन “आव्रजन आवश्यकताओं” को पूरा न करने के कारण वापस भेज दिए गए। सरकार का दावा था कि ये लोग दक्षिणी क्षेत्रों में काम करना चाहते थे, जिससे “सुरक्षा खतरे” उत्पन्न हो सकते थे। इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि मुसलमानों की आवाजाही को थाईलैंड में संदेह की दृष्टि से देखा जाता है।


कंबोडिया के मुसलमान: लघु संख्या, गहरी विरासत

कंबोडिया में मुस्लिम समुदाय की संख्या तुलनात्मक रूप से बेहद कम है, लेकिन उनका ऐतिहासिक अस्तित्व विशिष्ट है।
2024 तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कंबोडिया में मुसलमानों की संख्या 5% से भी कम है, जबकि कुछ मुस्लिम संगठनों का मानना है कि यह संख्या 8 लाख के आसपास है।

यहाँ के अधिकांश मुसलमान चाम समुदाय से हैं, जो मूलतः वियतनाम और कंबोडिया के मध्यवर्ती क्षेत्र में बसे हुए थे। चाम मुसलमानों की सांस्कृतिक परंपराएं पारंपरिक चाम रीति-रिवाजों और इस्लाम के शाफई स्कूल के मेल से बनी हैं। कई चाम परिवार अब नोम पेन्ह, कंपोंग चाम, कंपोट और सीम रीप जैसे शहरों में भी बस चुके हैं।


कंबोडिया में धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक स्थिति

कंबोडियाई संविधान भी धार्मिक स्वतंत्रता को मान्यता देता है, लेकिन यहाँ भी बौद्ध धर्म को विशेष दर्जा प्राप्त है। धार्मिक समूहों को पंजीकरण की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर सरकारी अनुमोदन जरूरी होता है। हालाँकि इस पंजीकरण की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है, फिर भी यह प्रक्रिया धार्मिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का एक माध्यम बनती है।

हाल ही में खबर आई कि 43 कंबोडियाई मुसलमान हज यात्रा पर सऊदी अरब गए, जिनमें से सात को सऊदी सरकार ने प्रायोजित किया। यह दर्शाता है कि सरकार और समाज में मुस्लिम समुदाय को धार्मिक स्वतंत्रता मिल रही है, लेकिन इसका आधार राजनीतिक शांति और बहुसांस्कृतिक सहिष्णुता पर टिका है।


चुनौतियाँ और उम्मीदें

थाईलैंड और कंबोडिया में मुस्लिम समुदायों को तीन स्तरों पर चुनौतियों का सामना है:

  1. धार्मिक स्वतंत्रता का सीमित व्यवहारिक रूप – जहाँ संविधान अधिकार देता है, वहीं सामाजिक व्यवहार और सरकारी प्रक्रियाएं कई बार अवरोध पैदा करती हैं।
  2. सुरक्षा और संदेह का वातावरण – विशेषकर थाईलैंड में मुसलमानों को देश की अखंडता के लिए खतरा मानने की प्रवृत्ति बनी हुई है, जो समुदाय के मनोबल को प्रभावित करती है।
  3. आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ापन – दोनों देशों में मुस्लिम समुदाय मुख्यतः मछुआरे, किसान या छोटे व्यापारी हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाओं की सीमित उपलब्धता इनके विकास में बाधा है।

हालांकि, दोनों देशों के मुसलमान अब धीरे-धीरे अपने अधिकारों और धार्मिक कर्तव्यों के लिए मुखर हो रहे हैं। मुस्लिम संस्थाएं धार्मिक शिक्षा, हज यात्रा, और सामुदायिक विकास को प्राथमिकता दे रही हैं।


निष्कर्ष

थाईलैंड और कंबोडिया के मुसलमान एक तरफ धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों का लाभ उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे सामाजिक स्वीकृति और राजनीतिक भागीदारी की कमी से जूझ रहे हैं। इन देशों में इस्लाम एक सह-अस्तित्व की तलाश में है, जहाँ बहुसंख्यक बौद्ध समाज के साथ संवाद, सहिष्णुता और समर्पण के माध्यम से अपना स्थान सुनिश्चित किया जा रहा है।

इन तमाम चुनौतियों के बीच, थाईलैंड और कंबोडिया के मुसलमान दक्षिण-पूर्व एशिया की बहुसांस्कृतिक विरासत में अपने धर्म, पहचान और अस्तित्व के साथ एक उम्मीद की तरह खड़े हैं।