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नोबेल विजेता नर्गिस मोहम्मदी को फिर सज़ा, ईरान ने बढ़ाई कैद

ईरान की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता नर्गिस मोहम्मदी को एक बार फिर कड़ी सज़ा सुनाए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और प्रतिक्रिया तेज हो गई है। समर्थकों और उनके वकील के अनुसार, ईरानी अदालत ने उन्हें सात साल से अधिक की अतिरिक्त सज़ा सुनाई है। यह फैसला उस समय आया है जब मोहम्मदी ने जेल में अपनी स्थितियों और अधिकारों के विरोध में भूख हड़ताल शुरू की थी। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यह कदम ईरान में असहमति की आवाज़ों पर चल रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है।

दुबई से प्राप्त एजेंसी रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की रिवोल्यूशनरी कोर्ट ने मशहद शहर में सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। मोहम्मदी के वकील मुस्तफ़ा नीली ने सज़ा की पुष्टि करते हुए बताया कि अदालत ने उन्हें “राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ साज़िश और मिलीभगत” के आरोप में छह वर्ष की कैद और “सरकार विरोधी प्रचार” के आरोप में डेढ़ वर्ष की अतिरिक्त सज़ा दी है। इसके अलावा दो वर्ष के आंतरिक निर्वासन (इंटरनल एक्साइल) की सज़ा भी दी गई है, जिसके तहत उन्हें दक्षिण खोरासान प्रांत के खोसफ़ शहर में भेजा जाएगा। साथ ही उन पर दो साल का यात्रा प्रतिबंध भी लगाया गया है।

नर्गिस मोहम्मदी के पति ताघी रहमानी, जो पेरिस में रह रहे हैं, ने एक बयान में कहा कि मोहम्मदी ने अदालत में कोई बचाव पेश नहीं किया। उनके अनुसार, “नर्गिस का मानना है कि यह न्यायिक प्रक्रिया वैध नहीं है। वह इसे पहले से तय नतीजे वाला एक दिखावटी मुकदमा मानती हैं।” समर्थकों का कहना है कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया और मुकदमा बेहद संक्षिप्त प्रक्रिया के तहत पूरा किया गया।

मोहम्मदी ने 2 फरवरी से भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका आरोप था कि जेल प्रशासन उन्हें अपने वकीलों और परिवार से नियमित फोन संपर्क की अनुमति नहीं दे रहा। उनके फाउंडेशन ने बताया कि उन्होंने छह दिन बाद भूख हड़ताल समाप्त कर दी, लेकिन इस दौरान उनकी सेहत गंभीर रूप से बिगड़ गई। बयान के मुताबिक, “उनकी शारीरिक स्थिति बेहद चिंताजनक है।” रिपोर्टों में कहा गया है कि खराब स्वास्थ्य के कारण उन्हें कुछ दिन पहले अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उपचार पूरा होने से पहले ही वापस सुरक्षा हिरासत केंद्र भेज दिया गया।

53 वर्षीय नर्गिस मोहम्मदी को दिसंबर में मशहद में एक स्मृति समारोह के दौरान गिरफ्तार किया गया था। यह कार्यक्रम मानवाधिकार वकील ख़ोसरो अलीकोर्दी के सम्मान में आयोजित था। समारोह के दौरान उन्होंने कथित रूप से न्याय और जवाबदेही की मांग करते हुए नारे लगाए थे। इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह उनकी गिरफ्तारी का पहला मामला नहीं है — पिछले 25 वर्षों में उन्हें कई बार गिरफ्तार और दंडित किया जा चुका है।

मोहम्मदी को वर्ष 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें यह पुरस्कार ईरान में महिलाओं के अधिकार, मृत्युदंड के विरोध और अनिवार्य हिजाब कानून के खिलाफ शांतिपूर्ण अभियान चलाने के लिए दिया गया था। वह लंबे समय से ईरान में मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज़ उठाती रही हैं। वह 2022 में महसा अमीनी की हिरासत में मौत के बाद भड़के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की प्रमुख समर्थक रही हैं। उन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिजाब कानून का खुला विरोध किया था।

उनके समर्थकों का कहना है कि वह पहले से ही 13 साल 9 महीने की सज़ा काट रही थीं, जिसमें “राज्य सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों” और “सरकार विरोधी प्रचार” के आरोप शामिल थे। ईरानी कानून के तहत कई सजाएँ साथ-साथ चलती हैं, लेकिन उनके फाउंडेशन का दावा है कि नए फैसलों को जोड़ने पर उन्हें 17 वर्ष से अधिक की सक्रिय कैद झेलनी पड़ सकती है। इसके अलावा पिछली सजाओं से जुड़े 154 कोड़ों की सज़ा भी लंबित बताई गई है।

स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर चिंताएँ जताई गई हैं। समर्थकों के अनुसार, जेल में रहते हुए उन्हें कई बार दिल का दौरा पड़ा और 2022 में उनकी आपात सर्जरी भी हुई थी। बाद में डॉक्टरों ने एक हड्डी संबंधी घाव (बोन लीज़न) पाया था, जिसके कैंसर होने की आशंका जताई गई थी और उसे शल्यक्रिया द्वारा हटाया गया। उनके वकील ने कहा है कि उनकी मौजूदा हालत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए अस्थायी जमानत मिलनी चाहिए, लेकिन अभी तक ऐसी कोई राहत नहीं दी गई है।

उनकी बेटी कियाना ने भावुक अपील करते हुए कहा, “मुझे अपनी मां की हालत को लेकर गहरी चिंता है। उन्हें और ईरान के सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।” उल्लेखनीय है कि मोहम्मदी अपने जुड़वां बच्चों से 2015 से नहीं मिल पाई हैं, जो पेरिस में रहते हैं।

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ईरानी न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसिनी-एजेई ने हाल ही में दिए एक बयान में संकेत दिया कि सरकार विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी क्रांति के साथ थे और अब विरोध कर रहे हैं, उन्हें परिणाम भुगतने होंगे। इस बयान को विश्लेषक असहमति के प्रति सख्त रुख के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनावपूर्ण बातचीत चल रही है। ओमान में हाल ही में दोनों देशों के बीच वार्ता का एक दौर हुआ। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान की ताकत “महाशक्तियों को ना कहने की क्षमता” में है और देश यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। वहीं अमेरिकी पक्ष ने संकेत दिया है कि वह ईरान पर समझौते के लिए दबाव बनाए रखेगा।

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि नर्गिस मोहम्मदी का मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि ईरान में नागरिक स्वतंत्रता, महिला अधिकार और अभिव्यक्ति की आज़ादी की व्यापक स्थिति का प्रतीक बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उनकी रिहाई की मांग लगातार उठ रही है, जबकि ईरानी अधिकारी अब तक इस नए फैसले को औपचारिक रूप से स्वीकार करने से भी बचते दिखे हैं।

नर्गिस मोहम्मदी आज ईरान के भीतर और बाहर लाखों लोगों के लिए प्रतिरोध, साहस और मानवाधिकार संघर्ष का प्रतीक बनी हुई हैं।