प्रेमानंद महाराज मैसेंजर ऑफ रिलीजियस हार्मनी एंड डिवाइन लव’: धर्मों को जोड़ने वाले वृंदावन के अनोखे संत
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नौशाद अख्तर
वृंदावन के केली कुंज आश्रम में हर रोज हजारों लोग पहुंचते हैं। लोग वहां केवल आशीर्वाद लेने नहीं जाते। वे एक ऐसे विचार से जुड़ने जाते हैं जो समाज को जोड़ता है। प्रेमानंद महाराज आज एक ऐसे संत के रूप में उभरे हैं जिनकी बातें किसी एक धर्म तक सीमित नहीं हैं। हिंदू हों या मुस्लिम, हर वर्ग के लोग उन्हें सुनते हैं। उनके उपदेशों में किसी धर्म की बुराई नहीं होती। यही कारण है कि लोग पूछने लगे हैं कि प्रेमानंद महाराज क्या हैं। क्या वे एक संत हैं, फकीर हैं, दरवेश हैं या फरिश्ता हैं।
इसी सोच और जीवन शैली पर एक नई किताब सामने आई है। इस किताब का नाम ‘प्रेमानंद महाराज: मैसेंजर ऑफ रिलीजियस हार्मनी एंड डिवाइन लव’ है। इसे आनंद मिश्रा और रेश्मा मुखर्जी ने लिखा है। आनंद मिश्रा बिहार के धार्मिक शहर गया से आते हैं। यह वही धरती है जो भगवान विष्णु और गौतम बुद्ध की कर्मभूमि रही है। इस किताब में प्रेमानंद महाराज के जीवन और उनके विचारों को गहराई से समझाया गया है।


सर्वधर्म समभाव का जीता जागता उदाहरण
प्रेमानंद महाराज का जीवन बताता है कि सच्चा धर्म कभी इंसानों को नहीं बांटता। सच्चा धर्म दिल को बड़ा बनाता है। ईश्वर तक पहुंचने के कई रास्ते हो सकते हैं। अगर भक्ति और नीयत में सच्चाई हो, तो हर रास्ता एक ही मंजिल तक जाता है।
दलाई लामा ने भी हमेशा अंतरधार्मिक संवाद की बात की है। उन्होंने मस्जिद, मंदिर, चर्च और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्राएं की हैं। उनका मानना है कि अलग अलग धर्मों के पवित्र स्थानों का सम्मान करना जरूरी है। प्रेमानंद महाराज का संदेश भी इसी तरह का है। वे अपने आश्रम में संन्यासियों, पुजारियों और आम गृहस्थों को एक साथ बिठाते हैं। उनके विचारों में बंगाल के महान संत रामकृष्ण परमहंस की झलक मिलती है। रामकृष्ण परमहंस ने कहा था कि नदियां अलग हो सकती हैं, पर सब एक ही समुद्र में मिलती हैं। प्रेमानंद महाराज भी इसी विचार को आगे बढ़ा रहे हैं।
सूफी संतों और अन्य परंपराओं का सम्मान
प्रेमानंद महाराज केवल सैद्धांतिक बातें नहीं करते। वे अपने व्यवहार से समाज को जोड़ते हैं। सोशल मीडिया पर उनके कई वीडियो वायरल हुए हैं। इनमें वे सूफी संतों की तारीफ करते दिखते हैं। वे ख्वाजा गरीब नवाज, हजरत निजामुद्दीन औलिया और अमीर खुसरो का जिक्र सम्मान के साथ करते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने वालों के प्रति भी उनका दृष्टिकोण सकारात्मक रहा है।

आवाज द वॉइस हिंदी के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार मलिक असगर हाशमी ने उनके बारे में लिखा है। उनके अनुसार, आज के दौर में प्रेमानंद महाराज एक ऐसे दुर्लभ संत हैं जिन्हें हर धर्म के लोग पसंद करते हैं। मुस्लिम समाज के लोग भी वृंदावन स्थित उनके केली कुंज आश्रम में उनके प्रवचन सुनने आते हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे दिखावे और अंधविश्वास से दूर रहते हैं। वे कभी किसी दूसरे धर्म की आलोचना नहीं करते।

नामचीन हस्तियों ने की सराहना
किताब के आखिरी पन्नों पर देश की कई प्रमुख हस्तियों की प्रतिक्रियाएं दर्ज हैं। इन हस्तियों ने प्रेमानंद महाराज के काम और संदेश की खुलकर तारीफ की है।
- जया प्रदा (अभिनेत्री और पूर्व सांसद): कलयुग में प्रेमानंद महाराज का मार्गदर्शन लोगों को भटकने से बचाता है।
- दिग्विजय सिंह (पूर्व मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश): पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के विचार सनातन धर्म और सर्वधर्म समभाव की सच्ची भावना को दर्शाते हैं। हर धर्म के प्रति सम्मान का उनका संदेश समाज के लिए मार्गदर्शक है।
- अशोक मोदी (लेखक): अविश्वास और विभाजन के इस दौर में प्रेमानंद महाराज का प्यार और सद्भाव का संदेश बहुत जरूरी है। यह हमें संकीर्ण पहचान से बाहर निकालकर इंसानियत को अपनाने की सीख देता है।
- रशीद किदवई (राजनीतिक विश्लेषक): हमारा देश और समाज भाग्यशाली है कि हमारे पास प्रेमानंद महाराज जैसी आवाज है। उन्होंने धर्म, ईश्वर और जीवन के असली मकसद को समझा है।
- शेष कुमार पुलिपका: यह किताब बहुत शोध के साथ लिखी गई है। इसमें कठिन आध्यात्मिक विचारों को बहुत सरल भाषा में समझाया गया है।
खान सर ने भी जताई गहरी आस्था
पटना के प्रसिद्ध शिक्षक और यूट्यूबर फैजल खान, जिन्हें लोग खान सर के नाम से जानते हैं, उन्होंने भी प्रेमानंद महाराज की तारीफ की है। सोशल मीडिया पर उनके कई बयान मौजूद हैं। खान सर ने महाराज जी के आचरण और भक्ति भाव को अद्भुत बताया है। उन्होंने एक पुरानी कहावत का जिक्र किया कि प्रेमानंद जी इस दुनिया में रहते हुए भी दुनिया से अलग हैं।
खान सर ने अपने जीवन के एक कठिन दौर का जिक्र भी किया था। उन्होंने बताया कि वे शांति की तलाश में वृंदावन गए थे। वहां के माहौल और प्रेमानंद जी के सानिध्य में उन्हें मानसिक शांति मिली। यह दिखाता है कि प्रेमानंद महाराज का प्रभाव हर वर्ग के युवाओं और बुद्धिजीवियों पर पड़ रहा है।

आज के दौर में प्रेमानंद महाराज का महत्व
आज के समय में जब दूरियां बढ़ रही हैं, तब प्रेमानंद महाराज जैसे संत समाज के लिए बहुत जरूरी हैं। वे किसी एक समुदाय या पंथ की बात नहीं करते। वे प्रेम, सेवा और समर्पण का पाठ पढ़ाते हैं।
वृंदावन की पावन भूमि पर बैठकर वे जो संदेश दे रहे हैं, वह भारत की मूल आत्मा को दर्शाता है। भारत हमेशा से विविधताओं का देश रहा है। प्रेमानंद महाराज इसी विविधता को सुंदर रूप में पेश करते हैं। उनकी बातें लोगों को यह सिखाती हैं कि अपने धर्म का पालन करते हुए दूसरों के विश्वास का सम्मान कैसे किया जाए।
आनंद मिश्रा और रेश्मा मुखर्जी की किताब ‘प्रेमानंद महाराज: मैसेंजर ऑफ रिलीजियस हार्मनी एंड डिवाइन लव’ इस दिशा में एक अच्छा प्रयास है। यह किताब पाठकों को यह समझने में मदद करती है कि असली संत वही है जो समाज में दीवारें नहीं, बल्कि पुल बनाए। प्रेमानंद महाराज का जीवन यही संदेश देता है।

