Education

यूएई में स्कूल खुलने की तैयारी, 17 अप्रैल अहम

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई

खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव का असर अब धीरे धीरे कम होता दिख रहा है। संयुक्त अरब अमीरात में ठप पड़ी शिक्षा व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की तैयारी शुरू हो गई है। कई हफ्तों से बंद स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी अब दोबारा खुलने की ओर बढ़ रहे हैं।

मार्च की शुरुआत से ही पूरे यूएई में पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। क्लासरूम खाली हैं। बच्चे घरों में बैठकर पढ़ रहे हैं। यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया था। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हमलों के खतरे को देखते हुए सरकार ने एहतियात बरती।

अब हालात में कुछ सुधार दिख रहा है। इसी के चलते 15 अप्रैल को एक अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि स्कूल कब और कैसे खोले जाएं। उम्मीद है कि 17 अप्रैल से धीरे धीरे क्लासें फिर शुरू हो सकती हैं।

जंग का सीधा असर शिक्षा पर

इस संकट की जड़ में ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव है। इस टकराव में इजरायल भी शामिल है। हालात इतने बिगड़े कि पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।

यूएई ने तुरंत कदम उठाया। बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। 2 मार्च 2026 से डिस्टेंस लर्निंग लागू कर दी गई। पहले इसे कुछ दिनों के लिए रखा गया था। लेकिन हालात ठीक न होने के कारण इसे कई बार बढ़ाया गया।

अब यह व्यवस्था 17 अप्रैल तक लागू है। इसके बाद क्या होगा, यह सबसे बड़ा सवाल है।

क्या 17 अप्रैल से खुलेंगे स्कूल

सरकार ने साफ किया है कि अभी कोई अंतिम तारीख तय नहीं हुई है। लेकिन संकेत साफ हैं। स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से खोलने की तैयारी चल रही है।

शिक्षा, मानव संसाधन और सामुदायिक विकास परिषद ने कहा है कि नर्सरी से शुरुआत होगी। छोटे बच्चों के लिए संस्थान इस हफ्ते से ही सीमित स्तर पर खुलने लगेंगे।

बड़ी कक्षाओं के लिए फैसला हालात देखकर लिया जाएगा। 15 अप्रैल को आधिकारिक घोषणा की जाएगी। शिक्षा मंत्रालय अपने चैनलों के जरिए पूरी जानकारी देगा।

अफवाहों पर सरकार सख्त

सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें चल रही हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई 1 मई तक चलेगी। कुछ का दावा है कि 20 अप्रैल से स्कूल खुल जाएंगे।

सरकार ने इन दोनों बातों को गलत बताया है। शिक्षा मंत्रालय ने साफ कहा है कि अभी ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है। लोगों से अपील की गई है कि वे सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।

नर्सरी के लिए नई व्यवस्था

दुबई में छोटे बच्चों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। KHDA ने नई सेवाएं शुरू की हैं।

अब नर्सरी छोटे ग्रुप में बच्चों को पढ़ा सकती हैं। एक ग्रुप में आठ बच्चों तक की अनुमति होगी। इसके अलावा टीचर घर जाकर भी पढ़ा सकते हैं। चार बच्चों तक के छोटे ग्रुप बनाए जा सकते हैं।

इसका मकसद यह है कि छोटे बच्चों की पढ़ाई भी रुके नहीं और सुरक्षा भी बनी रहे।

परीक्षाओं पर बड़ा असर

इस पूरे संकट का असर परीक्षाओं पर भी पड़ा है। कई इंटरनेशनल बोर्ड ने इस साल के एग्जाम रद्द कर दिए हैं।

इनमें CBSE और ISC शामिल हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल बैकलॉरिएट और केम्ब्रिज जैसे बड़े बोर्ड ने भी अपने एग्जाम कैंसिल कर दिए हैं।

इसका मतलब है कि इस साल IGCSE और A लेवल के एग्जाम यूएई में नहीं होंगे। अब स्कूल और बोर्ड मिलकर तय करेंगे कि छात्रों को ग्रेड कैसे दिए जाएंगे।

यूनिवर्सिटी में क्या हाल

यूएई की यूनिवर्सिटी भी अभी पूरी तरह ऑनलाइन चल रही हैं। सरकारी और प्राइवेट दोनों संस्थान इसी मॉडल पर काम कर रहे हैं।

हालांकि यूनिवर्सिटी के पास ज्यादा लचीलापन होता है। कुछ जगहों पर हाइब्रिड मॉडल पर भी विचार हो रहा है। यानी कुछ क्लास ऑनलाइन और कुछ ऑफलाइन।

प्रैक्टिकल विषयों के लिए खास व्यवस्था की जा सकती है। छात्रों को जरूरी सेवाएं ऑनलाइन ही मिल रही हैं।

क्या वार्ता से बदलेगा माहौल

यूएई की स्थिति काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात पर भी निर्भर है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद बढ़ी है।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में दूसरे दौर की वार्ता जल्द हो सकती है। अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो पूरे क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है।

इसका सीधा असर यूएई पर भी पड़ेगा। शिक्षा व्यवस्था को सामान्य करने में मदद मिलेगी।

आगे की राह

अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। लेकिन सरकार सतर्क है। हर कदम सोच समझकर उठाया जा रहा है।

स्कूल खोलने से पहले सभी इंतजाम देखे जाएंगे। सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। धीरे धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ने की कोशिश हो रही है।

माता पिता और छात्र भी इंतजार में हैं। सभी चाहते हैं कि बच्चे फिर से स्कूल जाएं। क्लासरूम में पढ़ाई शुरू हो।

निष्कर्ष

यूएई में शिक्षा व्यवस्था एक कठिन दौर से गुजर रही है। लेकिन अब उम्मीद की किरण दिख रही है।

अगर हालात और सुधरते हैं, तो 17 अप्रैल एक अहम तारीख साबित हो सकती है। यही वह दिन हो सकता है जब स्कूलों में फिर से रौनक लौटे।

फिलहाल सबकी नजर 15 अप्रैल की घोषणा पर है। उसी दिन तय होगा कि आगे का रास्ता क्या होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *