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गाइनेकोमेस्टिया पर अभिनव शोध के साथ दुबई में चमके प्रो. इमरान अहमद, AMU को दिलाया अंतरराष्ट्रीय गौरव

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, अलीगढ़

– अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में प्रोफेसर इमरान अहमद ने अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा जगत में भारत का नाम रोशन करते हुए दुबई में आयोजित इंटरनेशनल एस्थेटिक मीट 2025 में अपने शोधपत्र के माध्यम से गाइनेकोमेस्टिया के आधुनिक उपचार और उससे जुड़े सामाजिक-स्वास्थ्यगत पहलुओं पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।

यह प्रतिष्ठित सम्मेलन, जो विश्वभर के शीर्ष प्लास्टिक सर्जनों और सौंदर्य चिकित्सा विशेषज्ञों का संगम है, में प्रो. अहमद द्वारा प्रस्तुत शोध “गाइनेकोमेस्टिया रोगियों में विभिन्न सर्जिकल तकनीकों के तुलनात्मक परिणाम” पर आधारित था, जिसे वैश्विक चिकित्सा विशेषज्ञों ने अत्यंत सराहा।

गाइनेकोमेस्टिया के कारणों पर गंभीर चिंता व्यक्त

अपने व्याख्यान में प्रो. इमरान अहमद ने युवाओं में तेजी से बढ़ रही गाइनेकोमेस्टिया की समस्या के जैविक और सामाजिक कारणों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में यह स्थिति केवल एक शारीरिक विकार नहीं रही, बल्कि यह जीवनशैली, आहार और बाजार आधारित उपभोक्तावाद की एक जटिल उपज बन चुकी है।

उन्होंने विशेष रूप से मिलावटी दूध उत्पादों, बॉडीबिल्डिंग प्रोटीन सप्लीमेंट्स और रासायनिक रूप से उगाई गई सब्जियों व पोल्ट्री उत्पादों को गाइनेकोमेस्टिया के उभरते कारणों के रूप में चिन्हित किया। इसके अलावा, उन्होंने फास्ट फूड संस्कृति और किशोरों में हार्मोनल असंतुलन को भी एक गंभीर चुनौती बताया।

न्यूनतम चीरा तकनीक: सर्जरी में नई दिशा

प्रो. अहमद ने अपने सर्जिकल अनुभव साझा करते हुए बताया कि गाइनेकोमेस्टिया के इलाज के लिए अब मिनिमल इनवेसिव तकनीक यानी न्यूनतम चीरा सर्जरी अत्यधिक प्रभावशाली सिद्ध हो रही है। इस तकनीक में न केवल रोगी की पीड़ा कम होती है, बल्कि रिकवरी भी तीव्र और कम जोखिमपूर्ण होती है।

उन्होंने अपने शोध में इस पद्धति को पारंपरिक सर्जिकल तकनीकों की तुलना में क्लीनिकल परिणामों, मरीज की संतुष्टि और दीर्घकालिक पुनरावृत्ति दर जैसे मानकों पर श्रेष्ठ साबित किया।

जेएन मेडिकल कॉलेज में व्यापक सेवा कार्य

प्रो. इमरान अहमद ने बताया कि जेएन मेडिकल कॉलेज और ट्रॉमा सेंटर न केवल गाइनेकोमेस्टिया जैसी स्थितियों का आधुनिक इलाज करता है, बल्कि जन्मजात और दर्दनाक हाथ की विकृतियों से पीड़ित मरीजों को भी समर्पित सेवा प्रदान करता है। यह केंद्र उत्तर भारत में प्लास्टिक सर्जरी के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ एक महत्वपूर्ण उपचार केंद्र बनता जा रहा है।

वैश्विक मंच पर एएमयू की चिकित्सा विशेषज्ञता का सम्मान

इस सम्मेलन में प्रो. अहमद की प्रस्तुति को अंतरराष्ट्रीय चिकित्सकों, अनुसंधानकर्ताओं और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों द्वारा अत्यंत सराहना मिली। इससे न केवल एएमयू के चिकित्सा संकाय की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई मिली है, बल्कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान की वैश्विक स्वीकृति को भी बल मिला है।