पंजाब : मुस्लिम परिवार ने मंदिर के लिए 80 लाख की जमीन दान की, निर्माण खर्च भी उठाएगा
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मुस्लिम नाउ,नई दिल्ली/मोहाली।
पंजाब की सरज़मीं से एक बार फिर गंगा-जमुनी तहज़ीब की खुशबू आई है। जिला मोहाली के झामपुर इलाके में एक मुस्लिम परिवार ने मंदिर निर्माण के लिए अपनी निजी जमीन दान कर सांप्रदायिक सौहार्द की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है।
यह कहानी सिर्फ 325 गज जमीन की नहीं, बल्कि उस भरोसे, भाईचारे और आपसी सम्मान की है, जो पंजाब की मिट्टी में रचा-बसा है।
80 लाख रुपये की जमीन मंदिर के नाम
मोहाली निवासी मोहम्मद इमरान उर्फ हैप्पी मलिक ने सनातन धर्म सभा झामपुर को 325 गज जमीन दान की है। इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई जा रही है।
स्थानीय हिंदू समुदाय लंबे समय से मंदिर निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश में था, लेकिन संसाधनों की कमी आड़े आ रही थी। जब मोहम्मद इमरान को यह जानकारी मिली, तो उन्होंने बिना देर किए आगे बढ़कर समाधान पेश किया।
उन्होंने बताया कि इस निर्णय से पहले उन्होंने मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमान लुधियानवी, जो पंजाब के शाही इमाम हैं, से सलाह-मशविरा किया। शाही इमाम ने भी इस कदम का स्वागत किया और इसे भाईचारे की भावना का प्रतीक बताया।
रजिस्ट्री पूरी, हवन के साथ निर्माण शुरू
12 फरवरी को शाही इमाम की मौजूदगी में जमीन की विधिवत रजिस्ट्री मंदिर कमेटी को सौंप दी गई। इसके बाद हवन-यज्ञ के साथ मंदिर निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत हुई।
इस भूमि पर हनुमान जी का मंदिर और सनातन धर्म मंदिर बनाया जाएगा। कार्यक्रम में स्थानीय हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
मंदिर कमेटी के सदस्य पंडित राजाराम ने कहा, “इतनी बड़ी जमीन दान करना आसान नहीं होता। यह मोहम्मद इमरान की सच्ची नीयत और इंसानियत का प्रमाण है।”
मुस्लिम परिवार ने ₹80 लाख की जमीन मंदिर को दी: निर्माण का खर्च भी उठाएंगे; मोहाली में रजिस्ट्री करवाने शाही इमाम को बुलाया #Punjab #Mohalihttps://t.co/tB1ufxl4J2 pic.twitter.com/N2uYtC6BCz
— Dainik Bhaskar (@DainikBhaskar) February 13, 2026
सिर्फ जमीन नहीं, निर्माण खर्च भी खुद उठाएंगे
मोहम्मद इमरान हैप्पी मलिक ने घोषणा की कि वे केवल जमीन ही नहीं, बल्कि मंदिर निर्माण का पूरा खर्च भी स्वयं वहन करेंगे। उनके मित्र संजय जिंदल भी इस नेक कार्य में सहयोग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “धर्म इंसान को जोड़ने के लिए है, तोड़ने के लिए नहीं। अगर हमारे इस कदम से समाज में प्रेम और विश्वास बढ़ता है, तो इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है।”
यह पहली बार नहीं है जब इमरान ने ऐसा कदम उठाया हो। उन्होंने बताया कि इससे पहले वे मस्जिद और चर्च के लिए भी जमीन उपलब्ध करा चुके हैं। उनका मानना है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।
शाही इमाम का संदेश: नफरत की नहीं, मोहब्बत की ज़मीन
मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमान लुधियानवी ने अपने संबोधन में कहा कि पंजाब की धरती पर नफरत के लिए कोई जगह नहीं है।
उन्होंने कहा, “जिस तरह इस्लामी देशों में गैर-मुस्लिम उपासना स्थलों का सम्मान किया जाता है, उसी तरह यहां भी हर धर्म का आदर होना चाहिए। कुछ दिन पहले दो हिंदू भाइयों और एक बुजुर्ग सिख महिला ने मस्जिद निर्माण के लिए जमीन दान की थी, और आज एक मुस्लिम युवक मंदिर के लिए जमीन दे रहा है। यही भारत की असली पहचान है।”
उन्होंने पैगंबर इस्लाम के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि मुसलमानों की जिम्मेदारी है कि वे जहां भी रहें, वहां के सभी समुदायों के साथ न्याय और सम्मान का व्यवहार करें।
सामाजिक सेवा का बड़ा सपना
37 वर्षीय मोहम्मद इमरान पेशे से रियल एस्टेट कारोबारी हैं। उनके परिवार में माता, पत्नी और बच्चे हैं। उनके दिवंगत भाई के बच्चे भी उनके साथ ही रहते हैं।
इमरान का सपना केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है। वे भविष्य में एक अस्पताल खोलना चाहते हैं, जहां गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ती या मुफ्त चिकित्सा सुविधा मिल सके।
वे कहते हैं, “अगर अल्लाह ने चाहा तो मैं एक ऐसा अस्पताल बनाऊंगा, जहां किसी से यह नहीं पूछा जाएगा कि उसका धर्म क्या है।”

मंदिर कमेटी और स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया
सनातन धर्म सभा की ओर से पंडित राजाराम, अध्यक्ष हरप्रीत सिंह गिल और रूबी सिद्धू ने मोहम्मद इमरान और शाही इमाम को सम्मानित किया।
हरप्रीत सिंह गिल ने कहा, “यह कदम आने वाली पीढ़ियों को सिखाएगा कि हम सब एक हैं। जब एक मुस्लिम भाई मंदिर के लिए जमीन देता है, तो यह नफरत फैलाने वालों के लिए जवाब है।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना झामपुर को सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बना देगी।
विविधता में एकता की जीवंत तस्वीर
भारत की पहचान उसकी विविधता में एकता से है। पंजाब, जहां गुरुद्वारों की गूंज, मस्जिदों की अजान और मंदिरों की घंटियां साथ-साथ सुनाई देती हैं, वहां ऐसी घटनाएं समाज को नई दिशा देती हैं।
आज जब देश में सांप्रदायिक मुद्दों पर बहसें तेज होती हैं, तब मोहाली के झामपुर से आई यह खबर उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है।
यह घटना बताती है कि समाज में प्रेम और विश्वास की जड़ें अभी भी गहरी हैं। अगर एक मुस्लिम परिवार मंदिर के लिए जमीन दान कर सकता है, और उससे पहले हिंदू और सिख समुदाय मस्जिद के लिए जमीन दे सकते हैं, तो यह संदेश साफ है—भारत की आत्मा भाईचारे में बसती है।
सांप्रदायिक सौहार्द की मजबूत मिसाल
मोहम्मद इमरान हैप्पी मलिक का यह कदम केवल दान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।
यह कहानी बताती है कि धर्मों के बीच दीवारें नहीं, पुल बनाए जा सकते हैं।
आज झामपुर में जो नींव रखी गई है, वह सिर्फ एक मंदिर की नहीं, बल्कि विश्वास और सद्भाव की भी है।
पंजाब से उठी यह ठंडी और सुखद हवा पूरे देश को यह संदेश दे रही है—इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है, और भाईचारा ही सबसे बड़ी ताकत।

