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लेबनान में बारूद की बरसात: हिजबुल्ला के 17 हमले, समझौते की उड़ी धज्जियां

बेरुत/यरूशलेम:

दक्षिणी लेबनान में शांति के दावे कागजों तक सिमट कर रह गए हैं। 14 मई 2026 की सुबह तक लेबनान की धरती एक बार फिर धमाकों से दहल उठी। हिजबुल्ला ने इजरायली सेना के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन शुरू करने का दावा किया है। महज 24 घंटों के भीतर इजरायली ठिकानों पर 17 बार हमले किए गए। इसमें ड्रोन, मिसाइल और घात लगाकर किए गए धमाके शामिल हैं।

हिजबुल्ला का ‘ऑपरेशन साउथ’

हिजबुल्ला ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उसने बुधवार को इजरायली सैन्य चौकियों और वाहनों को निशाना बनाया। इन ऑपरेशनों का ब्यौरा देते हुए समूह ने कहा कि आठ ड्रोन हमलों ने इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) के खेमे में खलबली मचा दी। इसके अलावा पांच रॉकेट हमले और गाइडेड मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया।

हिजबुल्ला का दावा है कि उसके लड़ाकों ने दो ‘निमर’ सैन्य वाहनों, दो ‘मर्कावा’ टैंकों और एक बख्तरबंद गाड़ी (APC) को पूरी तरह तबाह कर दिया। सबसे भीषण हमला हद्दाथा कस्बे के बाहरी इलाके में हुआ। यहाँ हिजबुल्ला ने इजरायली सैनिकों के लिए बारूदी सुरंगें बिछाई थीं। जैसे ही सैनिक वहां पहुंचे, जोरदार धमाके हुए और भारी गोलाबारी शुरू हो गई।

इजरायल की जवाबी कार्रवाई और खामोशी

दूसरी तरफ इजरायली सेना (IDF) का रुख थोड़ा अलग है। IDF ने अपने टेलीग्राम चैनल पर बताया कि उन्होंने एक ‘संदिग्ध हवाई लक्ष्य’ को हवा में ही नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई उसी इलाके में हुई जहां उनके सैनिक तैनात हैं। इजरायली सेना ने साफ किया कि उन्होंने सायरन नहीं बजाया क्योंकि प्रोटोकॉल के तहत इसकी जरूरत नहीं थी।

IDF के मुताबिक, हिजबुल्ला ने उनके सैनिकों के करीब एंटी-टैंक मिसाइल और मोर्टार दागे। राहत की बात यह रही कि किसी इजरायली सैनिक के हताहत होने की खबर नहीं है। हालांकि, सीमा पर तनाव इस कदर है कि किसी भी पल एक बड़ी जंग छिड़ सकती है।

“मैदान को नरक बना देंगे” – नईम कासिम

हिजबुल्ला के प्रमुख नईम कासिम ने एक टेलीविजन संबोधन में इजरायल को सीधी चुनौती दी। उन्होंने साफ कहा कि हिजबुल्ला के हथियार किसी भी शांति समझौते का हिस्सा नहीं होंगे। यह लेबनान का आंतरिक मामला है और इस पर कोई सौदेबाजी नहीं की जाएगी। कासिम ने कड़े शब्दों में कहा, “हम मैदान नहीं छोड़ेंगे। हम इस धरती को इजरायल के लिए नरक बना देंगे।”

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका दोनों देशों के बीच सुलह की कोशिश कर रहा है। कासिम ने साफ कर दिया कि हिजबुल्ला लंबी लड़ाई के लिए तैयार है और वे इजरायली दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

शांति समझौता: सिर्फ नाम का

17 अप्रैल 2026 को अमेरिका ने एक युद्धविराम (Ceasefire) कराया था। इसे बाद में आगे भी बढ़ाया गया। लेकिन जमीन पर हालात इसके उलट हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस तथाकथित शांति के दौरान भी अब तक 380 लोग मारे जा चुके हैं। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

हकीकत यह है कि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में एक ‘बफर जोन’ बना रखा है। मार्च से ही इजरायली सेना ने लेबनान के लगभग 6% हिस्से पर अपना कब्जा जमा रखा है। लेबनान के नेताओं का कहना है कि जब तक विदेशी सेना उनकी जमीन पर है, शांति की बात करना बेमानी है।

वाशिंगटन में निर्णायक बैठक

आज यानी 14 मई और कल 15 मई को अमेरिका के विदेश विभाग ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए बुलाया है। वाशिंगटन में होने वाली इस बैठक का मकसद एक स्थायी शांति समझौता करना है। लेकिन हिजबुल्ला का अड़ियल रुख और इजरायल की सैन्य मौजूदगी इस बातचीत की राह में बड़े रोड़े हैं।

दुनिया की नजरें अब वाशिंगटन पर टिकी हैं। क्या कूटनीति इस बारूदी खेल को रोक पाएगी? या फिर नईम कासिम की ‘नरक’ वाली चेतावनी हकीकत में बदल जाएगी? दक्षिणी लेबनान के लोगों के लिए फिलहाल हर सुबह नए धमाकों की आहट लेकर आ रही है।


मुख्य बिंदु:

  • हिजबुल्ला के हमले: 17 ऑपरेशन, 8 ड्रोन हमले, 5 रॉकेट हमले।
  • नुकसान: 2 टैंक, 2 सैन्य वाहन और 1 बुलडोजर तबाह होने का दावा।
  • इजरायल का पक्ष: कोई सैनिक घायल नहीं, हवाई खतरा टाला गया।
  • कूटनीति: वाशिंगटन में आज से शुरू हो रही है उच्च स्तरीय वार्ता।

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