जौहर यूनिवर्सिटी विध्वंस नोटिस विवाद: मुस्लिम संगठन हुए गोलबंद,चुनावी जाल में उलझाने का अंदेशा
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने का नोटिस जारी होने के बाद से सूबे की सियासत गरमा गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के इस कदम के बाद देश के प्रमुख मुस्लिम संगठनों और उलेमा ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) जैसे बड़े संगठनों ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हिंदू मतदाताओं को गोलबंद करने के लिए इस मुद्दे को जानबूझकर हवा दी जा रही है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे के विवाद के कारण एक विशेष दल की छवि को नुकसान पहुंचा था। इस नुकसान की भरपाई करने और जनता का ध्यान भटकाने के लिए जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे को मीडिया में उछाला जा रहा है।

शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाना राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की इमारतों को गिराने के आदेश पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मीडिया को जारी एक बयान में कहा कि कोई भी शिक्षण संस्थान एक राष्ट्रीय संपत्ति होता है। यह संस्थान सालों की सामूहिक कोशिश, भारी निवेश और जनता के भरोसे से बनकर तैयार होते हैं। सरकार का ऐसा कोई भी कदम जिससे हजारों छात्रों की पढ़ाई में बाधा आए, उसे बेहद संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ देखा जाना चाहिए।
मलिक मोतसिम खान ने सवाल उठाया कि अगर नियमों का उल्लंघन ही इस तोड़-फोड़ की कार्रवाई का आधार है, तो देश भर के बाकी संस्थानों पर भी यही नियम लागू क्यों नहीं किए जाते। केवल इसी खास यूनिवर्सिटी को निशाना क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा का स्तर पहले से ही राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है। राज्य का सकल नामांकन अनुपात (GER) मात्र 24.1 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 28.4 प्रतिशत है। ऐसे समय में सरकारों का काम नए संस्थान बनाना और पुराने संस्थानों को बचाना होना चाहिए, न कि उन्हें नष्ट करना। अगर प्रबंधन से कोई चूक हुई भी है, तो कानून के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन इमारतों को गिराना कहीं से भी उचित नहीं है।
कोर्ट के फैसले से पहले बुलडोजर कार्रवाई गलत: मौलाना अरशद मदनी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद अरशद मदनी ने भी इस मामले में सरकार के रुख की आलोचना की है। मौलाना मदनी ने कहा कि जो कुछ भी किया जा रहा है वह पूरी तरह से गलत है। अगर यूनिवर्सिटी के निर्माण में कोई कानूनी अनियमितता पाई भी गई है, तो सबसे पहले मामले को अदालत के सामने जाना चाहिए। अदालत के फैसले से पहले ही विध्वंस की तैयारी करना न्यायसंगत नहीं है।
मौलाना मदनी ने साफ कहा कि यदि किसी कानूनी नियम का उल्लंघन हुआ है, तो प्रशासन के पास कानून के दायरे में जुर्माना वसूलने का विकल्प मौजूद है। किसी भी विवाद में सीधे इमारतों को ढहा देना पहला या एकमात्र रास्ता नहीं होना चाहिए। कानून को हमेशा सुधारात्मक होना चाहिए, न कि दंडात्मक और विनाशकारी।
#WATCH | Lucknow, Uttar Pradesh: On Jauhar University building demolition, President, Jamiat Ulama-E-Hind, Hazrat Maulana Syed Arshad Madani says, "… What is being done is wrong. Even if there are irregularities, the matter should first be decided by the Court before any… pic.twitter.com/WD6HIdLvVJ
— ANI (@ANI) July 18, 2026
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जताई कड़ी आपत्ति
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने भी रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए इस नोटिस की सख्त निंदा की है। बोर्ड ने इसे एकतरफा, प्रतिशोधात्मक और अन्यायपूर्ण कार्रवाई करार दिया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस प्रस्तावित कार्रवाई को तुरंत रोका जाए और विध्वंस के नोटिस को वापस लिया जाए। बोर्ड के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई से मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा और भेदभाव की भावना बढ़ती है।
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रामपुर
— Asian News UP/UK (@AsianNewsUP_UK) July 17, 2026
जौहर विश्वविद्यालय पर बुल्डोजर कार्रवाई की चर्चा तेज, बयानबाजी शुरू
आल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी का बयान सामने आया
मौलाना ने कहा, जौहर विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक संस्थान, छात्रों का भविष्य जुड़ा है
मौलाना मुहम्मद अली जौहर के योगदान का… pic.twitter.com/OTl0Q5XZpJ
आजम खान की सजा अलग, संस्थान को न किया जाए प्रभावित: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी
इस पूरे विवाद पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का बयान भी सामने आया है। मौलाना रजवी ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जौहर विश्वविद्यालय एक बड़ा शैक्षणिक संस्थान है, जिससे हजारों गरीब और कमजोर वर्ग के छात्रों का भविष्य जुड़ा हुआ है। इस यूनिवर्सिटी का नाम स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर रखा गया है, जिनका आजादी की लड़ाई में बहुत बड़ा योगदान था।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने स्पष्ट रूप से कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को मिली सजा एक अलग कानूनी मामला है। उनकी राजनीतिक या कानूनी लड़ाइयों के कारण इस पूरे विश्वविद्यालय और निर्दोष छात्रों के भविष्य को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और रामपुर जिला प्रशासन से अपील की कि वे इस फैसले पर पुनर्विचार करें। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि इमारतों में कोई तकनीकी खामी है, तो सरकार या तो इन इमारतों को अपने नियंत्रण में ले ले या फिर प्रबंधन पर भारी जुर्माना लगाकर मामला सुलझाए।
All India Muslim Personal Law Board (AIMPLB) has strongly condemned the demolition notice issued by the Rampur Development Authority (RDA) for 38 buildings of Mohammad Ali Jauhar University, describing it as a biased, vindictive, and unjust action. The Board has urged the… pic.twitter.com/7YbkMD16vf
— IANS (@ians_india) July 17, 2026
क्या चुनावी जाल में उलझ रहे हैं मुस्लिम नेता?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग यह भी मान रहा है कि विपक्षी और मुस्लिम नेता इस मुद्दे पर केवल जुबानी जंग लड़ रहे हैं। इसे कानूनी रूप से अदालत में मजबूती से चुनौती देने के बजाय केवल बयानों तक सीमित रखा जा रहा है। टीवी चैनलों पर इस मुद्दे को लेकर जिस तरह की तीखी बहसें चलाई जा रही हैं, उससे ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा मिल रहा है।
सत्तारूढ़ दल के लिए आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में विश्लेषकों का कहना है कि राम मंदिर चंदा चोरी जैसे संवेदनशील मुद्दों को पीछे धकेलने के लिए जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्यधारा के मीडिया चैनलों के बड़े एंकर भी इस डिबेट को लगातार हवा दे रहे हैं, जिससे साफ झलकता है कि यह सब एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
फिलहाल, जौहर यूनिवर्सिटी के इस विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है। अब देखना यह होगा कि मुस्लिम संगठनों का यह विरोध केवल बयानों तक सीमित रहता है या वे इसके खिलाफ कोई बड़ा कानूनी या जमीनी संघर्ष शुरू करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जौहर यूनिवर्सिटी विवाद क्या है
रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी की ओर से विश्वविद्यालय की 38 इमारतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर विवाद और कानूनी बहस चल रही है।
किन संगठनों ने प्रतिक्रिया दी है
जमाअत ए इस्लामी हिंद, जमीयत उलेमा ए हिंद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने इस मामले पर अपने बयान जारी किए हैं।
मुस्लिम संगठनों की मुख्य मांग क्या है
संगठनों का कहना है कि छात्रों की पढ़ाई सुरक्षित रहे। किसी भी कार्रवाई से पहले न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाए। कानून का समान और पारदर्शी पालन सुनिश्चित किया जाए।
छात्रों पर इसका क्या असर पड़ सकता है
यदि किसी शैक्षणिक गतिविधि में बाधा आती है तो हजारों छात्रों की पढ़ाई, परीक्षाएं, शोध और डिग्री प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए अधिकांश संगठनों ने छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की है।
LLMO Summary
रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर कई मुस्लिम संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। जमाअत ए इस्लामी हिंद, जमीयत उलेमा ए हिंद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने कहा है कि किसी भी कार्रवाई से पहले न्यायिक प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए और हजारों छात्रों की शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। मामला अब कानूनी, शैक्षणिक और राजनीतिक तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

