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गाज़ा में तबाही का आलम: 60,000 से ज़्यादा मौतें, भुखमरी और जनसंहार

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

गाज़ा पट्टी में इज़राइल द्वारा जारी सैन्य कार्रवाई ने एक भयावह मोड़ ले लिया है। हमास-शासित गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक इस संघर्ष में 60,000 से अधिक फ़िलिस्तीनी नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। मंगलवार सुबह हुए हमलों में भी कम से कम 62 लोग मारे गए, जिनमें 19 वे थे जो राहत सामग्री के इंतज़ार में कतार में खड़े थे। यह घटनाएँ ऐसे समय में हो रही हैं जब इज़राइल और मध्यस्थ देशों द्वारा “मानवीय विराम” की घोषणाएँ की जा रही हैं, जो ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर प्रतीत होती हैं।

गाज़ा में स्थिति केवल युद्ध की नहीं, पूरी मानवता की तबाही का प्रतीक बन गई है।
Integrated Food Security Phase Classification (IPC) जैसे वैश्विक संस्थानों ने चेतावनी दी है कि गाज़ा अब “भुखमरी की सबसे भीषण स्थिति” के करीब पहुँच चुका है। इज़राइल द्वारा राहत सामग्री और खाद्य आपूर्ति पर लगाए गए सख्त प्रतिबंध इस त्रासदी को और विकराल बना रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, अब तक 60,034 लोग मारे जा चुके हैं, और लगभग 1,45,870 घायल हुए हैं। अनुमान है कि हज़ारों लोग मलबों के नीचे दबे हुए हैं, जिनका कोई पता नहीं चल पाया है।
हमास का दावा है कि मृतकों में लगभग आधी संख्या महिलाओं और बच्चों की है — हालांकि इन आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

वहीं इज़राइली सेना का कहना है कि उसने जनवरी 2025 तक गाज़ा में करीब 20,000 “सशस्त्र लड़ाकों” को मार गिराया है। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि 7 अक्टूबर 2023 के हमले, जिसमें 1,200 इज़राइली नागरिक मारे गए थे और 251 बंधक बनाए गए थे, के जवाब में लगभग 1,600 हमास सदस्यों को इज़राइली धरती पर मार दिया गया।

इस संघर्ष की आग अब केवल गाज़ा तक सीमित नहीं रही। हाल ही में पश्चिमी तट के मासाफ़ेर यत्ता क्षेत्र में एक इज़राइली बस्तिवासी द्वारा फ़िलिस्तीनी शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता ओदेह मुहम्मद हदालिन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना इज़राइली कब्जे के कारण जारी हिंसा की एक और भयावह मिसाल है।

इज़राइली मानवाधिकार संगठन B’Tselem और Physicians for Human Rights ने हाल की अपनी रिपोर्टों में गाज़ा में हो रही सैन्य कार्रवाई को “जनसंहार” की संज्ञा दी है। उनका कहना है कि इज़राइली नीति का लक्ष्य केवल हमास को खत्म करना नहीं, बल्कि पूरा फ़िलिस्तीनी समाज इस आक्रामकता की चपेट में है। लाखों निर्दोष नागरिक इसकी सीधी चपेट में हैं।

गाज़ा के कई इलाके पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुके हैं। स्कूल, अस्पताल, शरणार्थी शिविर — कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं बचा। सीमावर्ती इज़राइली इलाकों से ली गई तस्वीरों में गाज़ा की उजड़ी हुई इमारतें और ध्वस्त बस्तियाँ, इस युद्ध की भीषणता को शब्दों से अधिक बयान करती हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय बार-बार युद्धविराम और मानवीय सहायता की अपील कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है जो इस नरसंहार को रोक सके या पीड़ित नागरिकों को राहत पहुँचा सके।
संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियाँ और मानवाधिकार संगठन सभी इस बात पर एकमत हैं कि गाज़ा की त्रासदी अब केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं, एक सम्पूर्ण मानवीय आपदा बन चुकी है।

जैसे-जैसे यह युद्ध अपने दसवें महीने में प्रवेश कर रहा है, गाज़ा के नागरिक भुखमरी, बीमारियों और बुनियादी ज़रूरतों की किल्लत के बीच जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे हैं।
आज सबसे बड़ा सवाल यही है —
इस युद्ध का अंत कब होगा?
और इसकी कीमत कितनी भयावह होगी?