त्रिपुरा के तारिब अली ने इंग्लैंड में बनाई नई पहचान
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, अगरतला
तारिब अली की कहानी आज त्रिपुरा के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। एक छोटे से गांव से निकलकर इंग्लैंड की स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाना आसान नहीं था। लेकिन मेहनत, धैर्य और सीखने की चाह ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचा दिया, जहां पहुंचने का सपना बहुत से युवा देखते हैं।
त्रिपुरा के कैलाशहर उपमंडल के तिला बाजार इलाके के कलेरकंडी गांव में जन्मे तारिब अली आज इंग्लैंड के सैलिसबरी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट में एनेस्थेटिक प्रैक्टिशनर के तौर पर काम कर रहे हैं। वह पिछले लगभग एक साल से वहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं और अपने काम की वजह से पहचान बना चुके हैं।
तारिब अली एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता स्वर्गीय यजीद अली शिक्षक थे। परिवार में शिक्षा का माहौल था, लेकिन संसाधन सीमित थे। इसके बावजूद तारिब ने अपनी पढ़ाई को कभी नहीं छोड़ा। उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने त्रिपुरा इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज में दाखिला लिया। यहीं से उनके करियर की असली शुरुआत हुई।
पैरामेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने देश के बड़े अस्पतालों में अनुभव हासिल किया। उन्होंने बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल और पश्चिम बंगाल के कई चिकित्सा संस्थानों में काम किया। इन वर्षों ने उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं की बारीकियां सिखाईं। ऑपरेशन थिएटर में काम करने का अनुभव मिला और मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी समझ आई।
लेकिन तारिब का सपना इससे बड़ा था। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने यूके की स्वास्थ्य व्यवस्था में प्रवेश की तैयारी शुरू की। यह सफर आसान नहीं था। अंग्रेजी भाषा की परीक्षा, तकनीकी मूल्यांकन और लंबे इंटरव्यू की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। कई महीनों की मेहनत के बाद उन्हें एचसीपीसी में पंजीकरण मिला। इसके बाद इंग्लैंड में नौकरी का रास्ता खुला।
आज तारिब इंग्लैंड में एनेस्थेटिक प्रैक्टिशनर के रूप में काम कर रहे हैं। उनका काम ऑपरेशन से पहले मरीजों को सुरक्षित तरीके से एनेस्थीसिया देना है। यह जिम्मेदारी बेहद संवेदनशील मानी जाती है। इसमें छोटी सी चूक भी गंभीर असर डाल सकती है। यही कारण है कि अस्पताल प्रशासन इस भूमिका में अनुभव, धैर्य और जिम्मेदारी को सबसे अधिक महत्व देता है।
तारिब कहते हैं कि त्रिपुरा से निकलकर यूके में काम करना उनके लिए सपने जैसा है। उनका मानना है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए तो छोटे राज्यों के छात्र भी दुनिया में अपनी जगह बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज जरूरत सिर्फ आत्मविश्वास और तैयारी की है।
उनकी सफलता पर त्रिपुरा के लोगों में खुशी है। खासकर युवा छात्र उन्हें प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तारिब ने यह साबित किया है कि गांव और छोटे शहर किसी की उड़ान को सीमित नहीं कर सकते।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भारतीय युवाओं की बढ़ती मौजूदगी दुनिया भर में देखी जा रही है। डॉक्टरों और नर्सों के साथ अब पैरामेडिकल विशेषज्ञ भी अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अपनी पहचान बना रहे हैं। तारिब अली इसी नई पीढ़ी का चेहरा बनकर सामने आए हैं।
त्रिपुरा जैसे सीमित अवसर वाले राज्य से निकलकर इंग्लैंड की स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचना केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है। यह उन हजारों छात्रों के लिए उम्मीद का संदेश भी है, जो छोटे शहरों में रहकर बड़े सपने देखते हैं।

