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गुजरात में तालीम की रौशनी: हनीफ़ा स्कूल की ख़ामोश लेकिन असरदार क्रांति

जब भी गुजरात का ज़िक्र होता है, तो अक्सर चर्चा दंगों, सांप्रदायिक तनाव या फिर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों तक सिमट जाती है। लेकिन इस राज्य की एक और सच्चाई है, जो सुर्ख़ियों से दूर रहते हुए भी समाज की बुनियाद मज़बूत कर रही है और वह है शिक्षा। खास तौर पर मुस्लिम समाज द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे वे प्रयास, जो न सिर्फ़ बच्चों का भविष्य गढ़ रहे हैं, बल्कि गुजरात की सामाजिक तस्वीर को भी बदल रहे हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण है गुजरात के आनंद ज़िले में स्थित Hanifa School, जिसकी चर्चा इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर शैक्षणिक हलकों तक में हो रही है।

चार एकड़ में फैला हरियाली से भरपूर, प्रदूषण-मुक्त परिसर, आधुनिक इमारत, विशाल खेल मैदान, सुविधाओं से सुसज्जित छात्रावास और उच्चस्तरीय शैक्षणिक ढांचा—हनीफ़ा स्कूल को देखकर यह यक़ीन करना मुश्किल हो जाता है कि यह किसी सीमित संसाधनों वाले समुदाय की पहल है। यह स्कूल न सिर्फ़ एक शैक्षणिक संस्थान है, बल्कि एक सोच है, एक विज़न है, जो यह साबित करता है कि अगर इरादे मज़बूत हों तो हालात मायने नहीं रखते।

2005 से शुरू हुआ तालीमी सफ़र

हनीफ़ा स्कूल की स्थापना वर्ष 2005 में समाजसेवी और शिक्षाप्रेमी यूनुस फ़ज़लानी ने की थी। उनका सपना था—“Joyful Learning”, यानी ऐसी शिक्षा जो बच्चों के लिए बोझ नहीं, बल्कि आनंद का स्रोत बने। इसी विज़न के साथ शुरू हुआ यह स्कूल आज प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12वीं तक की सीबीएसई (CBSE) मान्यता प्राप्त शिक्षा प्रदान कर रहा है।

स्कूल का संचालन फ़ज़लानी ऐशाबाई और हाजी अब्दुल लतीफ़ चैरिटेबल ट्रस्ट के अंतर्गत होता है, जो शिक्षा को समाजसेवा का सबसे सशक्त माध्यम मानता है। ट्रस्ट का उद्देश्य सिर्फ़ डिग्रियां बांटना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो जिम्मेदार हों, संवेदनशील हों और समाज को सकारात्मक दिशा दे सकें।

इन्फ्रास्ट्रक्चर जो बड़े शहरों को टक्कर दे

हनीफ़ा स्कूल का परिसर किसी नामी कॉर्पोरेट स्कूल से कम नहीं। 3.57 एकड़ में फैले इस कैंपस में 29 से अधिक कक्षाएं, अत्याधुनिक विज्ञान और कंप्यूटर लैब्स, ऑडियो-विज़ुअल रूम, मल्टीपर्पज़ हॉल, विशाल लाइब्रेरी और अलग-अलग गतिविधियों के लिए संसाधन केंद्र मौजूद हैं। 5,000 वर्ग मीटर से अधिक का खेल मैदान छात्रों को शारीरिक रूप से भी मज़बूत बनाता है।

खास बात यह है कि स्कूल पूरी तरह सोलर एनर्जी से संचालित होता है, जो पर्यावरण के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्वच्छ भारत अभियान, वृक्षारोपण और गार्डनिंग क्लब जैसी गतिविधियां छात्रों को प्रकृति और समाज से जोड़ने का काम करती हैं।

पढ़ाई ही नहीं, सर्वांगीण विकास पर ज़ोर

हनीफ़ा स्कूल की शिक्षा नीति का केंद्र बिंदु है—“All Round Development”। यहां पढ़ाई को सिर्फ़ किताबों तक सीमित नहीं रखा गया। इंटर-हाउस प्रतियोगिताएं, खेलकूद, फाइन आर्ट, परफॉर्मिंग आर्ट, इंटर-स्कूल टूर्नामेंट—हर छात्र को अपनी प्रतिभा निखारने का पूरा मौका मिलता है।

स्कूल के छात्र जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया टी-20 सॉकर लीग से लेकर बारोदा डिस्ट्रिक्ट फ़ुटबॉल एसोसिएशन (BDFA) तक, हनीफ़ा स्कूल की मौजूदगी दर्ज की जाती रही है।

अकादमिक उपलब्धियां जो पहचान बन गईं

शैक्षणिक मोर्चे पर भी हनीफ़ा स्कूल का रिकॉर्ड प्रभावशाली है। आईसीएआई विज़ार्ड जैसी राष्ट्रीय शैक्षणिक प्रतियोगिताओं में छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। स्कूल को ब्रिटिश काउंसिल का प्रतिष्ठित “International School Award (ISA)” भी मिल चुका है। 2017 में भारतीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा आयोजित इंडियन टूरिज़्म ओलंपियाड में स्कूल ने देशभर में तीसरा स्थान हासिल किया।

सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे इस स्कूल की गुणवत्ता का सबसे बड़ा प्रमाण हैं। हाल के वर्षों में कक्षा 10वीं और 12वीं का रिज़ल्ट लगातार 100 प्रतिशत रहा है—जो किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए गर्व की बात है।

‘रटंत विद्या’ नहीं, अनुभव आधारित शिक्षा

स्कूल की प्रिंसिपल हरिंदर ढिल्लों के अनुसार, हनीफ़ा स्कूल में एक “Silent Revolution” चल रही है। यहां शिक्षा को 60 मिनट की क्लास या होमवर्क के घंटों से नहीं मापा जाता, बल्कि इस बात से मापा जाता है कि छात्र क्या महसूस करता है, क्या सोचता है और क्या रचता है। ज़ोर ‘फील फ़ैक्टर’ पर है, न कि सिर्फ़ रटने पर।

“Each One Teach One”, मॉक टेस्ट, रेमेडियल क्लासेस, स्टूडेंट प्रेज़ेंटेशन और स्कॉलर बैच जैसी पहलें छात्रों की अकादमिक समझ को और मज़बूत करती हैं।

मिशन और विज़न: नागरिक गढ़ने की कोशिश

हनीफ़ा स्कूल का विज़न सिर्फ़ नौकरी पाने वाले छात्र तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक बनाना है जो खुले दिमाग के हों, वैश्विक दृष्टि रखते हों और अपने अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों को भी समझते हों। स्कूल का मिशन है—एक सुरक्षित, प्रेरक और सकारात्मक माहौल में हर छात्र की व्यक्तिगत क्षमता को निखारना।

गुजरात की छवि बदलता एक स्कूल

हनीफ़ा स्कूल की कहानी सिर्फ़ एक स्कूल की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस मुस्लिम समाज की कहानी है, जो तमाम चुनौतियों के बावजूद शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार मानता है। यह स्कूल उस धारणा को तोड़ता है कि गुजरात में मुसलमान सिर्फ़ हाशिये पर हैं। वास्तव में, वे यहां तालीम के ज़रिये भविष्य गढ़ रहे हैं—ख़ामोशी से, लेकिन पूरी मजबूती के साथ।

आज जब देश में शिक्षा को लेकर बहसें जारी हैं, हनीफ़ा स्कूल एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आता है कि कैसे समाज, संसाधन और संकल्प मिलकर बदलाव की इबारत लिख सकते हैं। यह सिर्फ़ एक स्कूल नहीं, बल्कि उम्मीद की एक रौशनी है—जो गुजरात से निकलकर पूरे देश को रोशन कर रही है।