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य़ुद्ध के मैदान से ज़्यादा ख़तरनाक अफ़वाहों का बाज़ार: मोजतबा कोमा में और नेतन्याहू की मौत के दावे

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

युद्ध सिर्फ गोलियों और बमों से नहीं लड़ा जाता. झूठ और अफ़वाहों की एक बड़ी लड़ाई भी साथ-साथ चलती है. इज़रायल-अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. इसी तनाव के बीच अब सोशल मीडिया और मीडिया के एक बड़े हिस्से में अजीबोगरीब दावों की बाढ़ आ गई है.

ये दावे चौंकाने वाले हैं. एक दावा ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के बारे में है. कहा जा रहा है कि उनका एक पैर कट गया है. उनका लीवर डैमेज हो चुका है. वह कोमा में हैं. दूसरा दावा इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर है. कहा जा रहा है कि वह मारे जा चुके हैं. एक वीडियो में उनकी लाश को बड़ी सी चादर में लपेटकर एम्बुलेंस में रखते हुए देखा गया है.

कौन फैला रहा है ये दावे? सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन दावों में कितनी सच्चाई है. असल में ‘मुस्लिम नाउ’ के पास भी इन दावों का कोई सबूत नहीं है. ये खबरें महज़ सोशल मीडिया पर तैर रही जानकारी का हिस्सा हैं. युद्ध के दोनों पक्षों के समर्थक मीडिया में इस तरह के दावे कर रहे हैं. ज़्यादातर ये खबरें वे लोग साझा कर रहे हैं जो अपने दुश्मन देश को हारता हुआ देखना चाहते हैं.

सनसनीखेज़ खबरें: अमेरिका से भारत तक अफ़वाह फैलाने के लिए दुनियाभर में बदनाम अमेरिकी अख़बार ‘द सन’ ने एक रिपोर्ट छापी है. इस रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से मोजतबा खामेनेई के बारे में गंभीर दावे किए गए हैं. अख़बार की वेबसाइट पर शीर्षक है- “किलर इन कोमा… किलर इन ए कोमा ईरान के लाचार नए अयातुल्ला कोमा में हैं और कम से कम एक पैर खो चुके हैं – क्योंकि उनका बदमाश शासन दुनिया को अराजकता में धकेल रहा है.”

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई कोमा में पड़े हैं. उनके पास दुनिया भर में अफ़रा-तफ़री मचाने वाली लड़ाई लड़ने की ताकत नहीं है.

Fact Check: Is Mojtaba Khamenei in a Coma After Recent Airstrike Injuries? रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया है कि मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के 56 साल के बेटे मोजतबा का कम से कम एक पैर कट गया है. उनके पेट या लीवर को भी गंभीर नुकसान हुआ है. यह स्पष्ट नहीं है कि वह किस दिन घायल हुए.

मोजतबा खामेनेई ईरान के मरहूम सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि मोजतबा उस रणनीति को निर्देशित नहीं कर रहे हैं जिससे ऊर्जा बाज़ार में उथल-पुथल मची हुई है. वह अभी शहर के ऐतिहासिक इलाक़े में सिना यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में इंटेंसिव केयर में हैं. अस्पताल के एक हिस्से को भारी सुरक्षा के बीच सील कर दिया गया है.

मोजतबा की हालत पर सवाल अख़बार का सूत्र अपनी पहचान नहीं बताना चाहता. वह जान के डर से ईरान के लगभग पूरे इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच से लंदन में रहने वाले एक विरोधी को मैसेज भेजने में कामयाब रहा.

वह सूत्र डॉक्टर नहीं है. लेकिन वह अस्पताल की ट्रॉमा टीम के सदस्यों को जानता है. उन्होंने ही उसे बताया कि मोजतबा “बहुत गंभीर” हालत में हैं.

दावा किया गया है कि मोजतबा का इलाज डॉक्टर मोहम्मद रजा ज़फ़रगंदी की देखरेख में चल रहा है. ज़फ़रगंदी ईरान के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री हैं. वह देश के टॉप ट्रॉमा सर्जनों में से एक भी हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़ मोजतबा का लिवर या पेट फट गया है. वह कोमा में भी हो सकते हैं.

सूत्रों की सच्चाई पर सवाल मोज़तबा कब और कैसे घायल हुए, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है. अख़बार का शीर्षक और रिपोर्ट साफ़ तौर पर ईरान विरोधी लगती है. अख़बार भी यह पक्का दावा नहीं कर रहा है कि अस्पताल में मोजतबा ही भर्ती हैं. सब कुछ सूत्रों के हवाले से कहा गया है.

हैरानी की बात यह है कि भारतीय मीडिया हाउस ‘ज़ी’ ने भी ‘द सन’ की रिपोर्ट को बिना किसी जाँच-परख के आगे बढ़ाया. ‘ज़ी’ पर भी पहले अफ़वाह फैलाने के आरोप लग चुके हैं. अदालत उसे कई बार फटकार लगा चुकी है. ‘ज़ी’ पर मुस्लिम विरोधी खबरें छापने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं. खाड़ी का एक प्रतिष्ठित अख़बार भी इस तरह की खबरें फैलाने में शामिल है. मोजतबा ने जब अपना पहला राष्ट्र के नाम संदेश दिया था तो इस अख़बार ने सवाल उठाया था कि मोजतबा संदेश में नज़र नहीं आए.

The Truth Behind Viral Video Claims of Benjamin Netanyahu’s Death in 2026 ईरान समर्थक मीडिया के दावे ईरान विरोधी मीडिया की ही तरह ईरान समर्थक मीडिया हाउस भी अफ़वाहें फैलाने में पीछे नहीं हैं. युद्ध शुरू होने से अब तक कई बार नेतन्याहू को मारने की खबर चलाई गई है. एक बार तो अफ़वाह इतनी तेज़ फैली कि नेतन्याहू को सार्वजनिक रूप से सामने आना पड़ा.

अब ‘नेशनल दस्तक’ ने खबर दी है कि नेतन्याहू मारे गए. सोशल मीडिया पर एक वीडियो के साथ दावा किया गया है कि नेतन्याहू की लाश चादर में लिपटी हुई देखी गई है. वीडियो के साथ टिप्पणी है- “बेंजामिन नेतन्याहू मारे गये…! अब यह खबर सत्य होती प्रतीत हो रही है”.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है- “बड़ी खबर: इज़रायली प्रधानमंत्री का एक्सक्लूसिव फुटेज—सफेद चादर में लिपटे हुए, एम्बुलेंस के पिछले हिस्से में ले जाते हुए.”

इन तमाम खबरों में सच्चाई का पता लगाना नामुमकिन है. क्योंकि ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट है. ऐसे में किसी भी दावे की पुष्टि करना मुश्किल है.

यह साफ़ है कि युद्ध के दौरान अफ़वाहों का बाज़ार गर्म रहता है. दोनों पक्ष अपने-अपने तरीक़े से सूचनाओं को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं. ऐसे समय में मीडिया को बहुत सतर्क रहने की ज़रूरत है. किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले उसकी सच्चाई को परखना ज़रूरी है. बिना किसी सबूत के इस तरह के दावे करना किसी भी तरह से पत्रकारिता नहीं है.

युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं लड़ा जाता, सूचनाओं का खेल भी उतना ही महत्वपूर्ण है. ऐसे में सच्चाई को सामने लाना ही पत्रकारिता का मुख्य धर्म है.

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