ईरानी हुकूमत और दोमुंहे मुल्लाओं का असली चेहरा बेनकाब’: मौलाना हसन अली रजानी
Table of Contents
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
दिल्ली में 27 मार्च को एक बेहद सनसनीखेज बयान सामने आया है। शिया मौलाना हसन अली रजानी ने ईरान की सरकार और उसके समर्थकों पर तीखा प्रहार करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ईरान की नीतियों को ‘यजीदी शासन’ के समान बताते हुए दुनिया भर के मुसलमानों को आगाह किया है। रजानी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और ईरान की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ी हुई है।
ईरान की ‘खोखली’ बयानबाजी और बर्बादी का मंजर
मौलाना रजानी ने कहा कि ईरानी सरकार पिछले कई दशकों से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ खोखले नारे लगा रही है। इन नारों का मकसद केवल दुनिया भर के मुसलमानों को आपस में लड़ाना है। उन्होंने दावा किया कि इस कथित ‘प्रतिरोध’ की राजनीति की वजह से अब तक 4 करोड़ 46 लाख शिया और सुन्नी मुसलमान अपनी जान गंवा चुके हैं।
मौलाना ने हालिया फिलिस्तीन संकट का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान ने फिलिस्तीन को युद्ध की आग में धकेल दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि 75 हजार से ज्यादा बेगुनाह मुसलमान, बच्चे और महिलाएं मारी गईं। अब जब ईरान खुद अमेरिका और इजरायल के सीधे निशाने पर है, तो उसके समर्थक दुनिया भर में लोगों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतनी जिल्लत के बावजूद ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।
ALSO READ
इजरायल-अमेरिका चोर-चोर मौसेरे भाई, ईरान को हराना नामुमकिन: बाबा रामदेव
देना पोत त्रासदी: कूटनीतिक चुप्पी पर भारत घिरा सवालों में
हर्मुज की नाकेबंदी और ‘यजीद’ से तुलना
रजानी ने ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ हर्मुज’ (आबनाये हर्मुज) को बंद करने की धमकी की तुलना 1400 साल पहले कर्बला में हुई घटना से की। उन्होंने कहा, “जो काम यजीद ने 1400 साल पहले फरात नदी का पानी रोककर किया था, आज वही काम ईरान समुद्र के रास्ते बंद करके कर रहा है।” उन्होंने भारतीय राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भारत ने पाकिस्तान जाने वाली नहर का पानी रोकने की बात कही थी, तब यही ईरान समर्थक मुल्ला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘वक्त का यजीद’ बताकर युद्ध की बातें कर रहे थे। लेकिन आज जब ईरान जलमार्ग रोक रहा है, तो यही ‘अंधभक्त’ मुल्ला इसे अपनी जीत बता रहे हैं। रजानी ने इसे दोहरा मापदंड करार दिया।
मुल्लाओं का पाखंड: ‘गरीब की पेप्सी और अमीर का अमेरिका’
मौलाना रजानी ने उन शिया धर्मगुरुओं पर भी निशाना साधा जो इजरायली और अमेरिकी उत्पादों के बहिष्कार का दिखावा करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई गरीब 10-20 रुपये की पेप्सी या थम्स-अप पीता है, तो ये मुल्ला उसे ‘हराम’ बताकर छीन लेते हैं। लेकिन इन्हीं मुल्लाओं के अपने बड़े संस्थान यूरोप और अमेरिका में चल रहे हैं।
उन्होंने एक निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे भारत के बड़े मौलाना अमेरिका में अपने अमीर दोस्तों की कब्रों पर पानी डालने के लिए सात समंदर पार जाते हैं। रजानी ने पूछा कि क्या यह दोगलापन नहीं है कि एक तरफ आप अमेरिका को ‘बड़ा शैतान’ कहते हैं और दूसरी तरफ उसी देश के वीसा और सुविधाओं के लिए कतार में खड़े रहते हैं?
एक हजार रुपये का विवाद और ईरान की ‘हार’
मौलाना रजानी ने अपने साथ हुए व्यक्तिगत धोखे का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ईरानी सरकार उन्हें महीने के केवल एक हजार रुपये देने का वादा करती थी। इसके लिए कई बार उनके हस्ताक्षर (सिग्नेचर) लिए गए, लेकिन उन्हें एक रुपया भी नहीं दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि इस मामूली रकम को रोकने के लिए भारत, पाकिस्तान और अफ्रीका के कई ईरान समर्थक मुल्लाओं ने रजानी की घेराबंदी की। केरल से लेकर उत्तर प्रदेश और बंगाल तक उनके खिलाफ हंगामा किया गया। रजानी ने कहा, “भारत में तो एक पागल भी दिन के हजार रुपये कमा लेता है, मुझे तुम्हारे इन हजार रुपयों की जरूरत नहीं थी।”
उन्होंने बताया कि इस ‘हजार रुपये’ के विवाद के कारण उन्हें अदालतों, पुलिस और यहां तक कि इजरायल, अमेरिका और भारत के दूतावासों तक के चक्कर लगाने पड़े। उन्होंने दावा किया कि कानूनी और कूटनीतिक लड़ाई जीतकर उन्होंने ईरान के खोखले दावों को दुनिया के सामने बेनकाब किया है।
ईरान के मुंह पर ‘तमाचा’
रजानी ने अंत में एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि जिस वक्त ईरान एक हजार रुपये के लिए लड़ रहा था, उसी वक्त भारत में एक चुनावी क्षेत्र से ईरान को एक हजार करोड़ रुपये भेजे गए। उन्होंने इसे ईरान के मुंह पर एक जोरदार तमाचा बताया। उन्होंने कहा कि ईरान ने एक हिंदुस्तानी शिया मौलाना को मामूली रकम का लालच देकर भी धोखा दिया, जो उसकी नीयत को साफ करता है।
मौलाना हसन अली रजानी का यह बयान शिया समुदाय के भीतर चल रहे वैचारिक मतभेदों को सार्वजनिक मंच पर ले आया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि ईरान को अपने पड़ोसी देशों पर हमले और दुनिया भर में अस्थिरता फैलाना बंद करना चाहिए।

