PoliticsTOP STORIES

स्विट्जरलैंड में अमेरिका ईरान वार्ता शुरू, ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव

ओब्बुएर्गेन, स्विट्जरलैंड

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच नई कूटनीतिक पहल शुरू हो गई है। स्विट्जरलैंड के ओब्बुएर्गेन में रविवार को दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने आमने सामने बैठकर बातचीत की। इस बैठक को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि वार्ता शुरू होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई यह बैठक हाल ही में हुए अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित की गई। इस समझौते का मकसद ईरान संघर्ष को समाप्त करना, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना है।

बैठक में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। दोनों देशों के प्रतिनिधि पूरे वार्ता दौर के दौरान मौजूद रहे। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार बातचीत में लेबनान की स्थिति, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन, ईरान पर लगे प्रतिबंध और जमे हुए ईरानी वित्तीय संसाधनों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

वार्ता की शुरुआत सकारात्मक माहौल में हुई। जेडी वेंस ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह वह क्षण है जब दोनों देश अतीत की कटुता को पीछे छोड़कर नए रिश्तों की शुरुआत कर सकते हैं।

वेंस ने कहा कि सवाल यह है कि क्या अमेरिका और ईरान मध्य पूर्व को स्थायी शांति की दिशा में ले जा सकते हैं या फिर क्षेत्र एक बार फिर पुराने टकरावों में लौट जाएगा। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन शांति और स्थिरता चाहता है।

क्या बिना अमेरिका के ईरान को हरा पाएगा इजरायल? वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार ने खोल दी पोल

असली राष्ट्रवाद क्या है? अमेरिका-ईरान युद्ध विराम समझौते से भारत के लिए बड़ा सबक

इरान-अमेरिका युद्ध विराम: ट्रंप और पेज़ेशकियान ने किया समझौता, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला

अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक अंतरिम समझौता: इजरायली मीडिया ने किया सभी 12 गुप्त शर्तें लीक

ईरान-अमेरिका समझौते से किसे मिला फायदा और किसका हुआ भारी नुकसान

लेकिन बातचीत शुरू होने के कुछ ही समय बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को कड़ी चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान समर्थित समूह लेबनान में गतिविधियां जारी रखते हैं तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि बातचीत विफल रही तो अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करने पर विचार कर सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका वहां से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की नीति भी अपना सकता है।

ट्रंप के बयान के बाद ईरानी मीडिया ने दावा किया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने विरोध स्वरूप वार्ता स्थल छोड़ दिया। हालांकि बाद में कूटनीतिक सूत्रों ने स्पष्ट किया कि ईरानी प्रतिनिधि बातचीत से अलग नहीं हुए हैं और वार्ता प्रक्रिया जारी है।

ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिकी चेतावनियों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान किसी दबाव में आने वाला नहीं है।

गालिबाफ ने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने अमेरिका को अपनी भाषा और बयानबाजी में सावधानी बरतने की सलाह दी। ईरानी पक्ष का कहना है कि धमकियों के बजाय सम्मानजनक संवाद ही समाधान का रास्ता है।

इस बीच ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान वार्ता को लेकर सतर्क है। उनका कहना है कि अतीत में कई बार बातचीत के दौरान ईरान पर हमले हुए हैं। इसलिए किसी भी समझौते से अधिक महत्वपूर्ण उसका ईमानदारी से पालन करना है।

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि परमाणु कार्यक्रम ईरान का वैध अधिकार है और इसे किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।

वार्ता के पहले चरण में ईरान ने लेबनान में युद्धविराम को प्राथमिक मुद्दा बनाया। तेहरान का कहना है कि इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच स्थायी संघर्ष विराम के बिना क्षेत्रीय शांति संभव नहीं है।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान में तब तक मौजूद रहेगी जब तक सुरक्षा खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। दूसरी ओर हिज्बुल्लाह ने भी इजराइल के खिलाफ अपनी स्थिति नरम करने से इनकार किया है।

विश्लेषकों का मानना है कि यही मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की राह में सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य भी इस वार्ता का केंद्रीय विषय बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के ऊर्जा व्यापार की जीवनरेखा माना जाता है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से गुजरती है।

हाल के संघर्ष के दौरान इस मार्ग के अस्थायी रूप से प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी उतार चढ़ाव देखा गया था। तेल कीमतों में तेजी आई थी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ा था।

इसी वजह से मिस्र, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये सहित कई क्षेत्रीय देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता का स्वागत किया है। इन देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह प्रक्रिया क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

इस बीच इराक ने भी अपनी ऊर्जा रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। बगदाद अब सीरिया के भूमध्यसागरीय तट के जरिए तेल निर्यात बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है ताकि भविष्य में हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम की जा सके।

स्विट्जरलैंड में जारी वार्ता को दुनिया भर के बाजार और रणनीतिक विशेषज्ञ करीब से देख रहे हैं। यदि आने वाले साठ दिनों में कोई व्यापक समझौता हो जाता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ेगा।

फिलहाल बातचीत जारी है। दुनिया की निगाहें स्विट्जरलैंड पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह वार्ता मध्य पूर्व में स्थायी शांति की नई शुरुआत साबित होती है या फिर तनाव का एक और अध्याय जुड़ता है।

प्रश्न: अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता कहां हो रही है?
उत्तर: दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता स्विट्जरलैंड के ओब्बुएर्गेन क्षेत्र में हो रही है।

प्रश्न: इस वार्ता में कौन मध्यस्थ है?
उत्तर: पाकिस्तान और कतर इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

प्रश्न: वार्ता का मुख्य मुद्दा क्या है?
उत्तर: हॉर्मुज जलडमरूमध्य, क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों में राहत और मध्य पूर्व में तनाव कम करना मुख्य मुद्दे हैं।

प्रश्न: ट्रंप ने ईरान को क्या चेतावनी दी?
उत्तर: ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान समर्थित समूह लेबनान में गतिविधियां जारी रखते हैं तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है।