संभल में CO के विवादित बयान से बवाल, पीस कमेटी मीटिंग की भाषा पर उठे सवाल
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस अधिकारी के एक कथित विवादास्पद बयान ने नया राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। पीस कमेटी की बैठक के दौरान संभल के क्षेत्राधिकारी (सीओ) द्वारा कथित रूप से कही गई कुछ टिप्पणियां सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं, जिसके बाद यूपी पुलिस की कार्यशैली और निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने इसे पुलिस की गैर-ज़रूरी सख्ती और सांप्रदायिक भाषा का उदाहरण बताया है, जबकि कुछ लोग पुलिस अधिकारी के बयान का समर्थन भी कर रहे हैं। इस विवाद के चलते यूपी पुलिस की छवि को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
Regarding the alleged threatening remarks made toward Muslims by Kuldeep Kumar, the CO of Sambhal, Shaukat Ali, the Uttar Pradesh President of All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM), responded strongly.
— Team Rising Falcon (@TheRFTeam) March 12, 2026
He said:
“What do you think Muslims are?
How weak do you think… pic.twitter.com/DAyeXzRQBZ
पीस कमेटी की बैठक से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार संभल में आयोजित पीस कमेटी की एक बैठक के दौरान पुलिस अधिकारी ने ईरान और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं का जिक्र करते हुए कुछ कड़ी टिप्पणियां कीं। बैठक का उद्देश्य क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने को लेकर संवाद स्थापित करना था, लेकिन बैठक के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि अधिकारी ने कथित रूप से यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर कानून का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी संदर्भ में सड़क पर नमाज़ पढ़ने को लेकर भी चेतावनी देने की बात सामने आई है, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।
संभल के सड़कों पर देखिए किस तरह मुसलमान खुलेआम बीच सड़क नंगा नाच कर रहे हैं।
— Pooja Mathur (@PoojaMathur01) March 12, 2026
इन्हें हिंदुओं से सीखना चाहिए किस तरह हर त्यौहार अपने घरों के अंदर मनाते हैं चाहे होली हो, दुर्गापूजा हो, कांवड़ यात्रा हो या राम नवमी हो। DSP ने ठीक ही तो कहा है , ये मुसलमान सड़को पर इस तरह नंगा नाच… pic.twitter.com/ESDB8q0c8j
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुद्दे को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
कुछ यूज़र्स ने पुलिस अधिकारी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती जरूरी है। वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने इसे अनुचित और भड़काऊ भाषा करार दिया।
सोशल मीडिया पर एक यूज़र ने दावा किया कि सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर दोहरे मानदंड अपनाए जा रहे हैं। वहीं कई अन्य लोगों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों को सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
ईरान के नाम पर जिनको खुजली मची है उनका इलाज करने की बात करने वाले संभल के CO से कोई पूछे कि जो इजराइल को फादरलैंड बता रहे हैं, नेतन्याहू और ट्रम्प के नाम पर सोशल मीडिया पर अपने ही हमवतन भाईयों को गालियॉं दे रहे हैं उनका इलाज कौन करेगा ??
— Imran Pratapgarhi (@ShayarImran) March 12, 2026
संभल पुलिस कप्तान की अगुवाई में सड़क पर…
इमरान प्रतापगढ़ी ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता और शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर कोई अधिकारी किसी समुदाय के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करता है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने लिखा कि यदि कुछ लोग सोशल मीडिया पर दूसरे देशों या नेताओं के समर्थन में बयान देते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या वर्दी पहनने वाले अधिकारी को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
प्रतापगढ़ी ने उत्तर प्रदेश पुलिस से आग्रह किया कि वह अपने अधिकारियों को संविधान की प्रस्तावना और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की याद दिलाए।
संभल अभी मुख्यधारा में नही आया!
— Narendra Pratap (@hindipatrakar) March 12, 2026
खुजली
टंगड़ी
ईरान जाओ
इलाज
स्लोगन
पट्टी
नारा
जबरदस्ती की लकड़ी
"जहां पोस्टर छपेगें, वहां तक इलाज होगा"
"मिठाई में कड़वाहट घुल जायेगी"
"इंस्ट्रा रील बनाना, "खामेनाई मार दिया"
"पड़ौसी देशों में क्या हो रहा है, हमें मतलब नही"
"ईस्लामिक कंट्री है,… https://t.co/cWDCPNnTLS pic.twitter.com/W73UrK7NLn
AIMIM नेता का कड़ा बयान
इस विवाद पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह संविधान के तहत शपथ लेकर पद ग्रहण करता है। उनके अनुसार ऐसी भाषा पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
शौकत अली ने कहा कि किसी भी समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए मर्यादित और संवैधानिक भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
होली पे इन्होंने ज्ञान दिया था हैप्पी मूड वाले लोग रहते है जिन्हें रंग से दिक्क्क्त है वो घरों से ना निकले
— विकास..The Development💂 (@Vikasfai) March 12, 2026
यहां नमाजियों को बिठाकर धमका रहे , नाम है पीस कमेटी मीटिंग
सोच कर देखिये इनकी नोकरी ओर ड्यूटी किस कदर निष्पक्ष चल रही होगी, शरीर वे खाकी वर्दी नही बल्कि संघी कलर चढ़ा हुआ।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद के बाद कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने यह सवाल उठाया है कि क्या पीस कमेटी की बैठक में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित है।
पीस कमेटी की बैठक का उद्देश्य आमतौर पर विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर शांति और भाईचारा बनाए रखना होता है। ऐसे में कुछ लोगों का मानना है कि बैठक में इस्तेमाल किए गए शब्द माहौल को शांत करने के बजाय और तनाव पैदा कर सकते हैं।
कुछ यूज़र्स ने यह भी कहा कि पुलिस अधिकारियों को अपने सार्वजनिक बयानों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि उनके शब्दों का समाज पर व्यापक असर पड़ सकता है।
पहले भी विवादों में रहा है संभल
संभल जिला पहले भी कई बार विवादों के कारण सुर्खियों में रहा है। स्थानीय स्तर पर पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
कुछ समय पहले भी एक पुलिस अधिकारी की कार्यशैली को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा था, जहां न्यायालय ने पुलिस को फटकार लगाई थी। इसी वजह से इस नए विवाद ने पुलिस की छवि को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश पुलिस या संभल प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सोशल मीडिया पर बढ़ते विवाद के कारण संभावना जताई जा रही है कि प्रशासन इस मामले की समीक्षा कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन को स्पष्ट रुख अपनाकर स्थिति को शांत करना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या तनाव को रोका जा सके।
बढ़ती डिजिटल बहस
यह विवाद एक बार फिर इस बात को दिखाता है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी सार्वजनिक बयान का असर कितनी तेजी से फैल सकता है। कुछ ही घंटों में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर की बहस बन गया है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले को किस तरह संभालता है और क्या संबंधित अधिकारी के बयान को लेकर कोई जांच या कार्रवाई की जाती है।

