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गाजा में तबाही मचाने वाले नेतन्याहू ईरानी मिसाइलों के आगे बेबस, बयानों में दिखी घबराहट

कभी गाजा की धरती को निर्दोषों के खून से लाल करने और लाखों जिंदगियों को मलबे के ढेर में तब्दील करने वाले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सुर अब बदल गए हैं। कल तक जो भाषा दुनिया इजरायल की बर्बरता के खिलाफ इस्तेमाल कर रही थी, आज वही शब्द नेतन्याहू अपनी बेबसी छुपाने के लिए ईरान के खिलाफ बोल रहे हैं। गाजा में करीब 75 हजार निर्दोष बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जान लेने वाली इजरायली सेना के सर्वोच्च कमांडर अब ईरानी मिसाइलों की ‘बारिश’ से सहमे हुए नजर आ रहे हैं।

सोशल मीडिया से लेकर जमीनी हकीकत तक, नेतन्याहू के हालिया बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल अब उस मोड़ पर खड़ा है जहां ‘अजेय’ होने का उसका दंभ चकनाचूर हो चुका है। एक तरफ वह अपने नागरिकों को झूठा दिलासा दे रहे हैं कि ईरान खत्म होने वाला है, वहीं दूसरी तरफ उनकी जुबान से निकलता ‘बेबसी’ का सच यह बता रहा है कि इजरायल अब केवल ‘चमत्कारों’ के भरोसे सांस ले रहा है।


सभ्यता की दुहाई और दुनिया से गुहार: नेतन्याहू का विरोधाभास

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा संदेश साझा किया। इस बयान में उन्होंने खुद को ‘आजाद दुनिया’ का मसीहा और ईरान को ‘सभ्यता का दुश्मन’ करार दिया। नेतन्याहू ने लिखा:

“पिछले 48 घंटों में ईरान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह सभ्यता का दुश्मन और आजाद दुनिया के लिए खतरा है। उसने बच्चों, परिवारों और बुजुर्गों को आतंकी मिसाइलों से निशाना बनाया, यरुशलम के पवित्र स्थलों को धमकी दी और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए दुनिया को ब्लैकमेल करने की कोशिश की। मैं आजाद दुनिया के नेताओं से पूछता हूँ—आप किसका इंतज़ार कर रहे हैं? इज़राइल न केवल अपने लिए, बल्कि आप सभी के लिए लड़ रहा है।”

नेतन्याहू का यह बयान उस समय आया है जब सोशल मीडिया पर गाजा की तस्वीरें और इजरायल द्वारा किए गए नरसंहार के आंकड़े पूरी दुनिया के सामने हैं। दिलचस्प बात यह है कि जब इजरायली मिसाइलें गाजा के अस्पतालों, स्कूलों और रिहायशी इमारतों को निशाना बना रही थीं, तब नेतन्याहू इसे ‘आत्मरक्षा’ कह रहे थे। आज जब ईरान की मिसाइलें इजरायली शहरों में बंकरों को छोटा साबित कर रही हैं, तो उन्हें ‘सभ्यता’ और ‘बुजुर्गों-बच्चों’ की याद सताने लगी है।


सोशल मीडिया पर आलोचना की बाढ़: “आईना देखिए मिस्टर नेतन्याहू”

जैसे ही नेतन्याहू का यह ‘दुखड़ा’ सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, दुनिया भर के यूजर्स ने उन्हें गाजा की याद दिलाते हुए जमकर लताड़ा। लोगों ने उनके पाखंड पर सवाल उठाए और उन्हें ‘युद्ध अपराधी’ तक करार दिया।

  • @ShanonLee_AF नामक यूजर ने लिखा, “यह बिल्कुल वैसा ही सुनाई दे रहा है जैसा बुरा बर्ताव आप फिलिस्तीनियों के साथ कर रहे हैं!”
  • @Melo_Malebo ने तीखे लहजे में पूछा, “तुम खुद को समझते क्या हो?”

हजारों टिप्पणियों में लोगों ने यह रेखांकित किया कि जो आग नेतन्याहू ने गाजा में लगाई थी, उसकी तपिश अब उनके अपने घर तक पहुंच चुकी है। लोगों का कहना है कि जो शख्स हजारों बच्चों का हत्यारा हो, उसे ‘सभ्यता’ और ‘मानवता’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल शोभा नहीं देता।


अराद का दौरा: जीत का दावा या हार का डर?

ईरानी मिसाइलों के हमले के बाद नेतन्याहू ने इजरायल के शहर ‘अराद’ का दौरा किया। वहां मिसाइल गिरने से मचे विनाश के बीच खड़े होकर उन्होंने जो कहा, वह उनके भीतर के डर को उजागर करता है। उन्होंने एक तरफ तो यह दावा किया कि इजरायल दुश्मन को कुचल रहा है, लेकिन साथ ही यह भी मान लिया कि सुरक्षा अब केवल किस्मत की बात रह गई है।

नेतन्याहू ने कहा, “मैं यहाँ अराद में हूँ। यहाँ कोई मारा नहीं गया। लेकिन हम सिर्फ़ चमत्कारों पर भरोसा नहीं करना चाहते। मिसाइल यहाँ, इमारतों के बीच गिरी… इस लड़ाई में, हम जीत रहे हैं, हम दुश्मन को कुचल रहे हैं।”

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू का ‘चमत्कारों’ वाला बयान यह स्वीकारोक्ति है कि इजरायल का आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम ईरानी हमलों को पूरी तरह रोकने में नाकाम रहा है। इमारतों के बीच गिरी मिसाइलें इस बात का सबूत हैं कि इजरायल के सुरक्षित माने जाने वाले इलाके अब ईरान की सीधी जद में हैं।


ईरान की मिसाइलें और इजरायल की बेबसी

ईरान ने जिस तरह से इजरायल के विभिन्न शहरों को निशाना बनाया है, उसने नेतन्याहू सरकार की चूलें हिला दी हैं। तेल अवीव से लेकर डिमोना तक, इजरायल का कोई भी कोना अब सुरक्षित नहीं बचा है। नागरिक सुरक्षा के लिए बनाए गए बंकर कम पड़ने लगे हैं और पूरे देश में सायरन की आवाजें अब सामान्य हो गई हैं।

नेतन्याहू के खिलाफ इजरायल के भीतर भी माहौल खराब हो रहा है। नागरिक अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या गाजा में की गई हिंसा का नतीजा यही ‘खंडहर’ इजरायल है? लोग लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और नेतन्याहू के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

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निष्कर्ष: इतिहास खुद को दोहरा रहा है

इतिहास गवाह है कि जुल्म की उम्र लंबी नहीं होती। गाजा को खंडहर बनाने की जिद ने आज इजरायल को उस मुकाम पर ला खड़ा किया है जहां उसके अपने शहर असुरक्षित हैं। नेतन्याहू का ‘सभ्यता’ का कार्ड अब दुनिया की नजरों में फेल हो चुका है। एक तरफ ईरान का बढ़ता दबाव और दूसरी तरफ देश के भीतर बढ़ता आक्रोश, बेंजामिन नेतन्याहू के लिए अब ‘चमत्कार’ की उम्मीद करना भी मुश्किल होता जा रहा है।

अराद की सड़कों पर गिरी ईरानी मिसाइलें केवल कंक्रीट को नहीं तोड़ रहीं, बल्कि उस अहंकार को भी तोड़ रही हैं जिसने गाजा में हजारों निर्दोषों की बलि ली थी। अब देखना यह है कि क्या दुनिया नेतन्याहू की इस ‘मदद की गुहार’ पर ध्यान देती है या उन्हें उनके अपने कर्मों के फल के साथ अकेला छोड़ देती है।