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ईरान-अमेरिका युद्ध: संकट टालने की कूटनीतिक दौड़, मस्कट और इस्लामाबाद के बाद अब मॉस्को पहुंचे अब्बास अराघची

नई दिल्ली/इस्लामाबाद

मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध की आग बुझाने की कोशिशें अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची पाकिस्तान का अपना दो दिवसीय दौरा और ओमान की संक्षिप्त यात्रा पूरी करने के बाद रविवार रात अचानक मॉस्को के लिए रवाना हो गए हैं। उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ तेहरान और वाशिंगटन के बीच टूटती बातचीत की डोर को थामने की आखिरी कोशिश कर रहे हैं।


मध्यस्थता का केंद्र बना पाकिस्तान: लिखित संदेशों का आदान-प्रदान

भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्लामाबाद में होने वाली औपचारिक वार्ता को अंतिम समय में रद्द कर दिया हो, लेकिन पर्दे के पीछे की कूटनीति अभी थमी नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान अभी भी एक ‘पोस्टमैन’ की भूमिका निभा रहा है।

ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को कुछ ‘लिखित संदेश’ भेजे हैं। इन संदेशों में ईरान की उन ‘रेड लाइन्स’ (लक्ष्मण रेखा) का जिक्र है, जिनसे वह किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। इन मुख्य बिंदुओं में शामिल हैं:

  1. परमाणु कार्यक्रम: परमाणु संपदा की सुरक्षा और स्वायत्तता।
  2. हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण।

डोनाल्ड ट्रंप का सख्त रुख: “कॉल हमें करें”

शनिवार को इस्लामाबाद आने वाले अमेरिकी प्रतिनिधियों—स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर—का दौरा रद्द कर राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया को चौंका दिया। ट्रंप ने ‘फॉक्स न्यूज’ को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि वह “निरर्थक बातचीत” के लिए अपने दूत नहीं भेजेंगे।

“हमने तय किया है कि हम अब ऐसा (औपचारिक वार्ता) नहीं करेंगे। हमारे पास सारे कार्ड्स हैं। अगर ईरानी नेतृत्व बात करना चाहता है, तो वे हमारे पास आएं या हमें कॉल करें। फोन मौजूद है, हमारे पास सुरक्षित लाइनें हैं।” — डोनाल्ड ट्रंप

ट्रंप का यह बयान उनकी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (अधिकतम दबाव) नीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, अमेरिका के भीतर भी उन पर दबाव बढ़ रहा है क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं और नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं।


हॉर्मुज की नाकेबंदी और वैश्विक हाहाकार

8 अप्रैल से शुरू हुए इस संघर्ष में सबसे घातक हथियार आर्थिक नाकेबंदी साबित हो रही है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है।

  • तेल और गैस: वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा रुक गया है।
  • खाद्य संकट: उर्वरकों (Fertilizers) की आपूर्ति बाधित होने से विकासशील देशों में भुखमरी का खतरा पैदा हो गया है।ईरानी सांसद अली निकजाद ने साफ कर दिया है कि ईरान युद्ध-पूर्व की स्थितियों पर तब तक नहीं लौटेगा जब तक उसकी मांगें नहीं मानी जातीं।

लेबनान में युद्धविराम का उल्लंघन: हिजबुल्लाह का पलटवार

कूटनीतिक हलचलों के बीच युद्ध के मैदान से डराने वाली खबरें आ रही हैं। अमेरिका द्वारा कराए गए युद्धविराम के बावजूद इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में बमबारी जारी रखी है। रविवार को हुई कार्रवाई में दो बच्चों समेत 14 लोगों की मौत हो गई।

जवाब में, हिजबुल्लाह ने इजरायली सैनिकों पर कई हमलों का दावा किया है। हिजबुल्लाह का कहना है कि यह हमला इजरायल द्वारा युद्धविराम के “लगातार उल्लंघन” का वैध जवाब है।


रूस की भूमिका: क्या मॉस्को बनेगा गेमचेंजर?

अब्बास अराघची का मॉस्को जाना संकेत देता है कि ईरान अब रूस को इस विवाद में एक मजबूत गारंटर के रूप में देख रहा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी मुलाकात में सैन्य सहयोग और पश्चिमी दबाव के खिलाफ एक साझा मोर्चा बनाने पर चर्चा होने की संभावना है।


मुख्य घटनाक्रम: एक नज़र में

तिथिस्थानगतिविधि
शनिवारमस्कट/इस्लामाबादअराघची की ओमान नेतृत्व से मुलाकात; ट्रंप द्वारा दूतों का दौरा रद्द।
रविवारइस्लामाबादअराघची की पाकिस्तान वापसी और फिर मॉस्को रवानगी।
रविवारदक्षिणी लेबनानइजरायली बमबारी में 14 नागरिकों की मौत; युद्धविराम खतरे में।
सोमवारमॉस्कोपुतिन और अराघची के बीच महत्वपूर्ण वार्ता की उम्मीद।

निष्कर्ष, विश्लेषण

वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि क्षेत्र एक ‘कोल्ड वॉर’ और ‘एक्टिव वॉर’ के बीच झूल रहा है। एक तरफ जहां ट्रंप अपनी शर्तों पर ईरान को झुकाना चाहते हैं, वहीं ईरान मॉस्को और बीजिंग के साथ मिलकर एक नया शक्ति संतुलन बनाने की कोशिश में है। पाकिस्तान की मध्यस्थता अभी भी ऑक्सीजन का काम कर रही है, लेकिन अगर हॉर्मुज की नाकेबंदी जल्द नहीं खुली, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ ट्रंप की घरेलू राजनीति भी खतरे में पड़ सकती है।

अगले 48 घंटे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। क्या मॉस्को कोई बीच का रास्ता निकाल पाएगा या दुनिया एक और बड़े महायुद्ध की ओर बढ़ेगी?


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