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मौलाना सलमान नदवी के निधन के बाद छिड़ा विवाद: सोशल मीडिया पर पुरानी सियासी फैसले वायरल

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली और भोपाल।

इस्लामिक विद्वान, लेखक और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पूर्व सदस्य मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी का लखनऊ में निधन हो गया है। वह तिहत्तर वर्ष के थे। उनके इंतकाल के बाद देश-विदेश के धार्मिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर है। इसी बीच उनके पुराने फैसलों को लेकर सोशल मीडिया पर एक नया विवाद छिड़ गया है। इस्लाम में ‘परदापोशी’ यानी किसी की मौत के बाद उसकी कमियों या बुराइयों पर बात न करने की परंपरा रही है। मगर मौलाना नदवी के मामले में स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। इंटरनेट पर मुस्लिमों का एक तबका उनके जीवनकाल के कुछ विवादित निर्णयों को लेकर न केवल उनकी आलोचना कर रहा है बल्कि तीखी बयानबाजी भी कर रहा है।

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इस बहस के बीच वकील अहमद जैसे सोशल मीडिया यूजर्स ने गंभीर और तार्किक सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जो लोग आज हदीस की रोशनी में खामोशी अख्तियार करने की दुहाई दे रहे हैं वे तब कहां थे जब मौलाना सलमान नदवी अपनी जिंदगी में पवित्र सहाबा-ए-किराम (पैगंबर मोहम्मद के साथी) पर नाज़ेबा शब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे। क्या वे मुकद्दस हस्तियां उस वक्त जिंदा थीं। जब मौलाना नदवी उम्मत के सबसे पाकीजा तबके की शान में जुबान-दराजी कर रहे थे तब यह उसूल किसी को याद क्यों नहीं आया। इस वैचारिक टकराव के कारण इंटरनेट पर मौलाना नदवी के पुराने विवाद लगातार ट्रेंड कर रहे हैं।

मौलाना सलमान नदवी के जीवन का सबसे बड़ा विवाद साल दो हजार अठारह में सामने आया था। उस समय वह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक वरिष्ठ सदस्य थे। उन्होंने अयोध्या विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए एक फॉर्मूला पेश किया था। उन्होंने बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद मौलाना नदवी ने प्रस्ताव दिया कि विवादित जमीन पर राम मंदिर का निर्माण होने दिया जाए। इसके बदले में मुसलमानों को मस्जिद और एक बड़ी इस्लामिक यूनिवर्सिटी बनाने के लिए वैकल्पिक जमीन दे दी जाए। मौलाना के इस अचानक आए बयान से देश भर के मुस्लिम संगठनों में हड़कंप मच गया था।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस फॉर्मूले को सिरे से खारिज कर दिया था। हैदराबाद में हुई बोर्ड की बैठक में मौलाना नदवी के रुख की कड़ी आलोचना की गई थी। बोर्ड का स्पष्ट मत था कि मस्जिद की जमीन अल्लाह की होती है। इसे न तो किसी को उपहार में दिया जा सकता है और न ही इसका तबादला हो सकता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे। इस अनुशासनहीनता के कारण बोर्ड ने मौलाना सलमान नदवी को संगठन से निलंबित कर दिया था और बाद में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।

यह विवाद यहीं नहीं थमा था। राम मंदिर मुद्दे पर अपना रुख बदलने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन ने मौलाना नदवी पर पांच हजार करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी थी। इस गंभीर आरोप और चौतरफा विरोध के बाद मौलाना नदवी ने खुद को राम मंदिर के मामले से पूरी तरह अलग कर लिया था। बाद में उन्होंने समाज में आपसी सद्भाव और भाईचारा बढ़ाने के लिए ‘मानवता कल्याण बोर्ड’ नाम से एक नए संगठन की शुरुआत की थी।

इस विषय से जुड़ी अधिक जानकारी और जनभावनाओं को समझने के लिए आप यह वीडियो देख सकते हैं:

मौलाना सलमान नदवी के इंतकाल पर सियासत की खबरें

यह वीडियो मौलाना सलमान नदवी के निधन के बाद देश और विशेषकर हैदराबाद व लखनऊ के धार्मिक व राजनीतिक हलकों में उपजी प्रतिक्रियाओं और उनके जीवन से जुड़े घटनाक्रमों को विस्तार से समझाता है।

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