विदर्भ के 27 युवाओं को प्रतियोगी परीक्षा की नई उड़ान
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नागपुर
किसी भी समाज का भविष्य उसकी शिक्षा से तय होता है। जब आर्थिक तंगी प्रतिभा के रास्ते में दीवार बन जाती है, तब कुछ संस्थाएं उम्मीद की नई किरण लेकर सामने आती हैं। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में काम कर रही सोशल एजुकेशनल एंड वेलफेयर एसोसिएशन यानी सेवा ने ऐसा ही एक प्रयास शुरू किया है। यह पहल अब दर्जनों युवाओं के सपनों को नई दिशा दे रही है।
सेवा ने आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने का अवसर देने का अभियान शुरू किया है। संस्था का उद्देश्य केवल कोचिंग उपलब्ध कराना नहीं है। वह ऐसे युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपने पूरे नहीं कर पाते।
संस्था के इस अभियान का पहला चरण उत्साहजनक रहा है। वर्ष 2025 और 2026 के दौरान सेवा ने 27 विद्यार्थियों का प्रवेश पुणे की प्रतिष्ठित यूनिक अकादमी में कराया। यहां इन छात्रों को यूपीएससी और एमपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है।

इन विद्यार्थियों की कुल कोचिंग फीस लगभग 18 लाख 57 हजार 800 रुपये थी। यूनिक अकादमी ने सेवा के छात्रों को विशेष सहयोग देते हुए फीस में 50 प्रतिशत की छूट दी। इसके बाद कुल राशि घटकर लगभग 9 लाख 28 हजार 900 रुपये रह गई।
संस्था के पदाधिकारियों के अनुसार अब तक इस राशि में से करीब 7 लाख रुपये जमा किए जा चुके हैं। शेष 2 लाख 28 हजार 900 रुपये भी जल्द जमा करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। संस्था का कहना है कि यह सफलता समाज के सहयोग से ही संभव हो सकी है।
सेवा का मानना है कि यदि समाज शिक्षा में निवेश करेगा तो आने वाले वर्षों में इसका लाभ पूरे समुदाय को मिलेगा। संस्था का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती बल्कि पूरे समाज के आत्मविश्वास को मजबूत करती है।
अब 70 नए विद्यार्थियों की तैयारी
पहले बैच की सफलता के बाद सेवा ने अपना अभियान और बड़ा कर दिया है।
संस्था ने वर्ष 2026 और 2027 के लिए 70 नए विद्यार्थियों का चयन किया है। इनमें 50 छात्र और 20 छात्राएं शामिल हैं। इन सभी को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
संस्था के अनुसार इस नए बैच की कुल फीस लगभग 15 लाख रुपये होगी। इसके लिए समाज के सहयोग की आवश्यकता है। संस्था का विश्वास है कि लोग आगे आएंगे और इस अभियान को मजबूत बनाएंगे।
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महाराष्ट्र का अनोखा आवासीय मॉडल
सेवा ने एक और नई पहल शुरू की है। इसका नाम सेवा मदरसा एमपीएससी रिहायशी कोचिंग क्लास रखा गया है।
संस्था का दावा है कि यह महाराष्ट्र का अपनी तरह का नया प्रयोग है। यहां ऐसे छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी जो छोटे शहरों, गांवों और मदरसों से आते हैं। उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मार्गदर्शन और प्रतियोगी माहौल उपलब्ध कराया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो इससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
शिक्षा से बदल रही तस्वीर
विदर्भ और मराठवाड़ा के कई जिलों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का खर्च नहीं उठा पाते। ऐसे में सेवा जैसी संस्थाओं का सहयोग उनके लिए नई उम्मीद लेकर आता है।
संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल छात्रों को परीक्षा पास कराना नहीं है। वे ऐसे अधिकारी तैयार करना चाहते हैं जो समाज के विकास में सकारात्मक भूमिका निभा सकें।
सेवा का मानना है कि यदि हर वर्ष दर्जनों छात्र प्रशासनिक सेवाओं में पहुंचते हैं तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर भी दिखाई देगा। इससे शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और अधिक युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरित होंगे।
समाज से सहयोग की अपील
संस्था ने आम लोगों से इस शिक्षा अभियान में भागीदार बनने की अपील की है। सेवा का कहना है कि छोटे छोटे सहयोग से भी बड़ा परिवर्तन संभव है।
संस्था ने समाज के लोगों से अनुरोध किया है कि वे अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग दें ताकि कोई भी प्रतिभाशाली छात्र केवल पैसों की कमी के कारण अपने सपनों से समझौता न करे।
पदाधिकारियों का कहना है कि यह केवल दान नहीं बल्कि शिक्षा और भविष्य में निवेश है। उनका विश्वास है कि समाज का सहयोग लगातार मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में सैकड़ों युवा यूपीएससी, एमपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकेंगे।
उम्मीदों का बढ़ता कारवां
सेवा का यह अभियान अब केवल एक संस्था का कार्यक्रम नहीं रह गया है। यह शिक्षा, सामाजिक भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी का उदाहरण बनता जा रहा है।
विदर्भ के जिन 27 युवाओं ने इस पहल के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की है, वे अब हजारों दूसरे छात्रों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। वहीं 70 नए विद्यार्थियों का चयन इस बात का संकेत है कि यह मिशन लगातार विस्तार की ओर बढ़ रहा है।
यदि समाज, शैक्षणिक संस्थान और स्वयंसेवी संगठन इसी तरह साथ आते रहे तो आने वाले समय में विदर्भ से बड़ी संख्या में युवा प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच सकते हैं। यही इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
AEO Quick Answer
प्रश्न: सेवा संस्था क्या कर रही है?
उत्तर: महाराष्ट्र के विदर्भ में सेवा संस्था आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को यूपीएससी और एमपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग और आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। वर्ष 2025 और 2026 में 27 छात्रों को प्रवेश दिलाया गया है, जबकि 2026 और 2027 के लिए 70 नए विद्यार्थियों का चयन किया गया है।

FAQ
प्रश्न: सेवा संस्था ने कितने छात्रों को कोचिंग दिलाई है?
उत्तर: वर्ष 2025 और 2026 में 27 छात्रों को यूनिक अकादमी, पुणे में प्रवेश दिलाया गया।
प्रश्न: नए बैच में कितने छात्र शामिल हैं?
उत्तर: वर्ष 2026 और 2027 के लिए 70 विद्यार्थियों का चयन हुआ है, जिनमें 50 छात्र और 20 छात्राएं हैं।
प्रश्न: इस पहल का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली युवाओं को यूपीएससी, एमपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर देना।
प्रश्न: सेवा मदरसा एमपीएससी रिहायशी कोचिंग क्या है?
उत्तर: यह महाराष्ट्र में शुरू किया गया एक आवासीय कोचिंग मॉडल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और मदरसा पृष्ठभूमि के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है।

