महाराष्ट्र निकाय चुनावों में AIMIM का उल्लेखनीय प्रदर्शन, 114 सीटों के साथ सशक्त राजनीतिक मौजूदगी
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो | मुंबई
महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (AIMIM) ने इस बार ऐसा प्रदर्शन दर्ज किया है, जिसने राज्य की राजनीति में नई बहस और नए समीकरणों को जन्म दिया है। पार्टी ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में कुल 114 सीटों पर जीत हासिल की है, जो 2017 के मुकाबले एक बड़ी बढ़त मानी जा रही है। तब AIMIM को 81 सीटें मिली थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रदर्शन AIMIM के लिए केवल सीटों का आंकड़ा नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में उसकी संगठित, निरंतर और जमीनी मौजूदगी का संकेत है।

बिहार के बाद महाराष्ट्र में भी रणनीति सफल
AIMIM की इस सफलता की पृष्ठभूमि में हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनावों में पार्टी का बेहतर प्रदर्शन भी अहम माना जा रहा है। दिसंबर 2025 में पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया था कि वह महाराष्ट्र में इस बार अधिक संगठित और बड़े स्तर पर चुनाव लड़ेगी। चुनाव परिणामों ने संकेत दिया है कि यह रणनीतिक विस्तार काफी हद तक सफल रहा।
पार्टी ने विशेष रूप से अल्पसंख्यक बहुल शहरी इलाकों में स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर प्रचार किया और अपनी संगठनात्मक ताकत को मजबूत किया।
प्रमुख शहरों में AIMIM की मजबूत उपस्थिति
इस चुनाव में AIMIM ने महाराष्ट्र के कई अहम शहरों में उल्लेखनीय जीत दर्ज की। पार्टी को—
- छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व औरंगाबाद) में 33 सीटें
- मालेगांव में 21 सीटें
- अमरावती में 15 सीटें
- नांदेड़ में 13 सीटें
- धुले में 10 सीटें
- सोलापुर में 8 सीटें
- मुंबई में 6 सीटें
- ठाणे में 5 सीटें
- जलगांव में 2 सीटें
- चंद्रपुर में 1 सीट
मिली हैं। इन नतीजों के साथ AIMIM ने कई क्षेत्रों में कांग्रेस, NCP (शरद पवार गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) जैसी स्थापित पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है।
BMC और TMC में बढ़ी राजनीतिक पकड़
शुरुआती रुझानों और अंतिम नतीजों से यह साफ है कि AIMIM ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और ठाणे महानगरपालिका (TMC) में भी अपनी मौजूदगी को मजबूत किया है। पार्टी ने अल्पसंख्यक बहुल वार्डों में पारंपरिक दलों को पीछे छोड़ते हुए महत्वपूर्ण सीटें हासिल की हैं।
मुंबई में AIMIM ने 2017 के चुनाव की तुलना में अपना प्रदर्शन बेहतर किया है। उस समय पार्टी के पास केवल दो सीटें थीं, जबकि इस बार वह छह सीटें जीतने में सफल रही है। अब पार्टी BMC में एक सशक्त और मुखर विपक्ष की भूमिका निभाने की तैयारी में है।
स्थानीय मुद्दों पर फोकस बना जीत की कुंजी
राजनीतिक जानकारों के अनुसार AIMIM की सफलता का एक बड़ा कारण उसका स्थानीय स्तर पर केंद्रित अभियान रहा। पार्टी ने बुनियादी सुविधाएं, नागरिक समस्याएं, प्रतिनिधित्व की कमी, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी।
AIMIM नेता शारिक नक़्शबंदी ने कहा,
“पिछले चुनावों में बेहद कम अंतर से हुई हार ने हमारे कार्यकर्ताओं को और मजबूत किया। असदुद्दीन ओवैसी के डोर-टू-डोर अभियान और संगठनात्मक मेहनत का असर इस बार साफ दिखा।”
‘किंगमेकर’ की स्थिति में AIMIM
करीब 95 से अधिक सीटों के साथ AIMIM कई छोटे नगर निकायों में ऐसी स्थिति में पहुंच गई है, जहां किसी भी बड़े गठबंधन—महायुति या महाविकास अघाड़ी—को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में AIMIM को किंगमेकर की भूमिका में देखा जा रहा है, जहां उसकी भूमिका स्थानीय सत्ता संतुलन तय करने में अहम हो सकती है।
कांग्रेस और अन्य दलों के लिए संकेत
इन नतीजों को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लिए एक राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच AIMIM की बढ़ती स्वीकार्यता ने यह दिखाया है कि मतदाता अब स्थानीय नेतृत्व, निरंतर संपर्क और स्पष्ट प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दे रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
मुंबई के वार्ड नंबर 145 से जीत हासिल करने वाली AIMIM नेता खैरुन्निसा अकबर हुसैन ने कहा,
“यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि जनता की है। हम उन सभी मुद्दों पर काम करेंगे, जिनको लेकर जनता ने हम पर भरोसा जताया है।”
पहले से बनी गति को मिला विस्तार
AIMIM ने इससे पहले दिसंबर 2025 में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में भी 83 सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक गति का संकेत दिया था। पार्टी ने एक नगर परिषद अध्यक्ष पद भी हासिल किया था। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि यह लगातार मिल रही सफलता जमीनी संघर्ष, लंबे समय की संगठनात्मक मेहनत और स्थानीय स्तर पर संवाद का नतीजा है।
भविष्य की राजनीति पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM का यह प्रदर्शन महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक स्थायी बदलाव की ओर इशारा करता है। मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र में पार्टी ने जिस तरह अपने वोट शेयर को संगठित किया है, वह आने वाले वर्षों में विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर भी असर डाल सकता है।

निष्कर्ष
महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में AIMIM का प्रदर्शन केवल चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह उस राजनीति का संकेत है, जिसमें स्थानीय मुद्दे, प्रतिनिधित्व और जमीनी जुड़ाव को केंद्र में रखा गया है।
114 सीटों की यह जीत AIMIM को राज्य की राजनीति में एक सशक्त, प्रासंगिक और निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह उभार 2029 के विधानसभा चुनावों में किस दिशा में आगे बढ़ता है।

