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बंगाल मतदान में ममता लहर के साफ संकेत

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, कोलकाता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान ने सुबह से ही ऐसे संकेत देने शुरू कर दिए हैं, जिनसे साफ नजर आने लगा है कि मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के नेतृत्व में सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress (टीएमसी) की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है। दक्षिण बंगाल और कोलकाता के जिन इलाकों में मतदान हो रहा है, वहां शुरुआती घंटों में मतदाताओं की लंबी कतारों, महिलाओं की बड़ी भागीदारी और स्थानीय मुद्दों पर जनता के रुख ने यह संदेश दिया है कि बंगाल की जनता बाहरी नारों से ज्यादा जमीन पर काम करने वाली राजनीति को प्राथमिकता दे रही है।

पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान के बाद दूसरे चरण को चुनाव का निर्णायक मोड़ माना जा रहा था। लेकिन मतदान शुरू होते ही जिस तरह लोगों ने उत्साह दिखाया, उससे यह धारणा मजबूत हुई कि राज्य की जनता स्थिरता, सामाजिक योजनाओं और क्षेत्रीय सम्मान की राजनीति के साथ खड़ी है। यही कारण है कि टीएमसी खेमे में आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा है।

सुबह मतदान शुरू होने से पहले राज्यभर के मतदान केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपैट मशीनों का मॉक पोल कराया गया। बारानगर, शिबपुर, बालीगंज और कोलकाता के कई संवेदनशील बूथों पर चुनाव अधिकारियों ने राजनीतिक दलों के एजेंटों की मौजूदगी में मशीनों की जांच की। पूरे राज्य में मतदान की शुरुआत शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में हुई, जिसे प्रशासन की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

कोलकाता पोर्ट, दक्षिण 24 परगना, कैनिंग, दमदम, भवानीपुर और टॉलीगंज जैसे इलाकों में सुबह से ही मतदाताओं की भीड़ उमड़ने लगी। महिलाओं, बुजुर्गों और पहली बार वोट डालने पहुंचे युवाओं ने लंबी कतारों में खड़े होकर लोकतंत्र के प्रति अपना उत्साह दिखाया। कई मतदान केंद्रों पर महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक देखी गई, जिसे राजनीतिक जानकार टीएमसी के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

राज्य में कुल 142 सीटों पर मतदान हो रहा है, जो 294 सदस्यीय विधानसभा का लगभग आधा हिस्सा है। करीब 3.21 करोड़ मतदाता इस चरण में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। 1,448 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनमें 220 महिला प्रत्याशी शामिल हैं। मतदान के लिए 41,001 केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 8,845 केंद्र पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। यह बंगाल की सामाजिक चेतना और महिला सशक्तिकरण का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस चरण की सीटें परंपरागत रूप से टीएमसी का मजबूत आधार रही हैं। 2021 के चुनाव में भी इन्हीं इलाकों में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 142 में से 123 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार भी शुरुआती रुझान और जमीनी माहौल से संकेत मिल रहे हैं कि ममता बनर्जी की लोकप्रियता में कोई बड़ी कमी नहीं आई है।

चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। लेकिन बंगाल की जनता ने केंद्र सरकार से भी कई सवाल पूछे। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा रही कि लंबे समय से केंद्र की सत्ता में रहने के बावजूद बंगाल के युवाओं को कितने रोजगार अवसर मिले। यही कारण है कि बीजेपी के बड़े-बड़े वादों के बावजूद मतदाता स्थानीय नेतृत्व और जमीनी योजनाओं को अधिक महत्व देते दिखाई दिए।

Mamata Banerjee ने चुनाव प्रचार में महिला कल्याण योजनाओं, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सेवाओं, राशन योजनाओं और ग्रामीण विकास को प्रमुख मुद्दा बनाया। लक्ष्मी भंडार, छात्र सहायता योजनाएं, किसानों के लिए राहत और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शैक्षिक अवसर जैसे कार्यक्रमों का असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महसूस किया जा रहा है। यही कारण है कि टीएमसी के पक्ष में एक शांत लेकिन मजबूत समर्थन दिखाई दे रहा है।

भवानीपुर सीट इस चरण का सबसे चर्चित मुकाबला बनी हुई है। यह सीट ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान से जुड़ी मानी जाती है। यहां मतदान के दौरान लोगों में खास उत्साह दिखाई दिया। मतदाताओं का कहना है कि वे ऐसे नेतृत्व को चुनना चाहते हैं जो बंगाल की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाए।

टॉलीगंज, जिसे बंगाली फिल्म उद्योग का केंद्र कहा जाता है, वहां भी स्टार उम्मीदवारों के कारण मुकाबला दिलचस्प है। दमदम और कोलकाता पोर्ट जैसे शहरी इलाकों में मध्यमवर्गीय मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। कृष्णानगर क्षेत्र में मतुआ समुदाय और नागरिकता कानून पर बहस जरूर रही, लेकिन स्थानीय विकास और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे भी उतने ही प्रभावशाली नजर आए।

चुनाव आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। केंद्रीय बलों की 2,300 से अधिक कंपनियां, हजारों राज्य पुलिसकर्मी, सीसीटीवी निगरानी, वेबकास्टिंग और माइक्रो ऑब्जर्वर की तैनाती की गई है। 6,000 क्विक रिस्पॉन्स टीमें भी सक्रिय हैं। इन व्यवस्थाओं से मतदान केंद्रों पर लोगों में भरोसा बढ़ा है और बड़ी संख्या में लोग वोट डालने पहुंचे हैं।

दक्षिण 24 परगना में कुछ स्थानों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जरूर देखने को मिले, लेकिन कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ता दिखा। विपक्ष की शिकायतों के बावजूद जनता का ध्यान मतदान पर अधिक केंद्रित रहा। कई बूथों पर मतदाताओं ने कहा कि वे शोर-शराबे से नहीं, अपने अनुभव से वोट करेंगे।

पहले चरण में 91.78 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो अपने आप में रिकॉर्ड था। दूसरे चरण में भी शुरुआती घंटों में अच्छा मतदान प्रतिशत दर्ज होने की संभावना जताई गई। अगर यह रुझान जारी रहता है तो माना जा रहा है कि जनता लोकतंत्र में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराना चाहती है।

टीएमसी के लिए यह चुनाव केवल सत्ता बचाने का नहीं, बल्कि लगातार चौथी बार सरकार बनाने का अवसर है। दूसरी ओर बीजेपी बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हालांकि आज के मतदान माहौल ने संकेत दिए हैं कि ममता बनर्जी अब भी राज्य की सबसे प्रभावशाली नेता बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में भावनात्मक जुड़ाव, क्षेत्रीय अस्मिता और कल्याणकारी योजनाओं का बड़ा असर रहता है। ममता बनर्जी ने खुद को हमेशा “बंगाल की बेटी” के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसका लाभ उन्हें लगातार मिलता रहा है। इस बार भी महिलाओं, गरीब तबकों और ग्रामीण मतदाताओं के बीच उनका प्रभाव साफ दिखाई देता है।

4 मई को परिणाम घोषित होंगे, जब West Bengal के साथ Assam, Kerala, Tamil Nadu और Puducherry के नतीजे भी सामने आएंगे। लेकिन मतदान के दूसरे चरण की शुरुआत ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि बंगाल में ममता बनर्जी को चुनौती देना अभी भी आसान नहीं है।

आज के मतदान केंद्रों पर दिखी भीड़, महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, शांतिपूर्ण माहौल और स्थानीय नेतृत्व के प्रति भरोसा इस बात का संकेत है कि बंगाल में ममता लहर अब भी कायम है। अगर यही रुझान नतीजों तक पहुंचा, तो टीएमसी एक बार फिर इतिहास रच सकती है।