ईरान में नए ‘सुप्रीम लीडर’ की तैयारी: मुजतबा खामेनेई के नाम पर मुहर! अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव चरम पर
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई
ईरान के शीर्ष नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लगता दिख रहा है। इजरायल और अमेरिका के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान अपने नए ‘सुप्रीम लीडर’ (सर्वोच्च नेता) के नाम का ऐलान करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद खाली हुए इस पद को भरने के लिए ईरान की ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने अपनी प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है।
खबरों के मुताबिक खामेनेई के बड़े बेटे मुजतबा खामेनेई का नाम इस रेस में सबसे आगे है। उनकी ताजपोशी की खबरें सामने आते ही इजरायल और अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है। इजरायल ने साफ कर दिया है कि नया सर्वोच्च नेता भी उनकी हिट लिस्ट में शामिल रहेगा। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रक्रिया में दखल देने की बात कहकर तनाव को और बढ़ा दिया है।
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का बड़ा फैसला
ईरान में सर्वोच्च नेता का चुनाव करने वाली संस्था ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ के सदस्यों ने संकेत दिया है कि उत्तराधिकारी के नाम पर आम सहमति बन चुकी है। संस्था के सदस्य अयातुल्ला मोहम्मद मेहदी मीरबाक़ेरी के अनुसार कुछ तकनीकी बाधाओं को दूर किया जा रहा है। जल्द ही आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।
वरिष्ठ मौलवी अयातुल्ला मोहसिन हैदरी अलेकासिर ने एक वीडियो संदेश में बताया कि मौजूदा युद्ध की स्थिति को देखते हुए सदस्यों की व्यक्तिगत बैठक बुलाना संभव नहीं था। इसलिए रिमोट या लिखित माध्यमों से राय ली गई है। उन्होंने यह भी कहा कि नया नेता ऐसा होना चाहिए जिससे ‘दुश्मन नफरत करे न कि उसकी तारीफ करे’।
मुजतबा खामेनेई: पर्दे के पीछे के सबसे ताकतवर खिलाड़ी
56 वर्षीय मुजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरान की सत्ता के केंद्र में रहे हैं। हालांकि उन्होंने कभी कोई सरकारी पद नहीं संभाला लेकिन वे अपने पिता के सबसे करीबी सलाहकार और ‘गेटकीपर’ माने जाते थे। मुजतबा के ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के साथ बेहद गहरे संबंध हैं।
सुरक्षा तंत्र पर उनकी पकड़ की वजह से ही उन्हें सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। 2022 के हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी प्रदर्शनकारियों के निशाने पर मुजतबा ही थे। आलोचकों का मानना है कि उनकी नियुक्ति ईरान की नीतियों में और अधिक कट्टरता ला सकती है।
ट्रंप और इजरायल की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुजतबा खामेनेई के नाम पर कड़ी आपत्ति जताई है। ट्रंप ने उन्हें ‘अस्वीकार्य’ विकल्प बताते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि नए सुप्रीम लीडर के चुनाव में अमेरिका की भी भूमिका हो। ट्रंप का कहना है कि वे ईरान के शीर्ष पद पर अपनी पसंद का व्यक्ति देखना चाहते हैं।
दूसरी तरफ इजरायल ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। इजरायली खुफिया एजेंसियों और सैन्य कमांडरों का कहना है कि ईरान का नेतृत्व जो भी संभालेगा उसे खामेनेई जैसा ही अंजाम भुगतना पड़ सकता है। युद्ध के मौजूदा दौर में ईरान के कई सैन्य ठिकाने और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की इमारतों को निशाना बनाया गया है।

क्या होगा भविष्य का रुख?
ईरान के भीतर यह चर्चा तेज है कि नया सुप्रीम लीडर अमेरिका के लिए ‘आफत’ साबित होगा। जानकारों का कहना है कि मुजतबा खामेनेई का झुकाव सैन्य समाधान की ओर अधिक है। वे पश्चिमी देशों के दबाव में झुकने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुन सकते हैं।
ईरान की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अयातुल्ला हाशमी हुसैनी बुशेहरी जल्द ही इस बड़े फैसले की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब तेहरान पर टिकी हैं क्योंकि यह चुनाव मध्य पूर्व में युद्ध की दिशा और दशा तय करेगा।
यहाँ ईरान और इज़रायल की सैन्य शक्ति का एक तुलनात्मक इन्फोग्राफिक विश्लेषण (Table & Key Points) दिया गया है। यह डेटा 2026 के हालिया घटनाक्रमों और ग्लोबल फायरपावर (GFP) के नवीनतम आंकड़ों पर आधारित है।
📊 सैन्य शक्ति तुलना: ईरान बनाम इज़रायल (2026)
| श्रेणी | 🇮🇷 ईरान | 🇮🇱 इज़रायल | विजेता (क्षमता अनुसार) |
| कुल सैन्य कर्मी | ~11,80,000 | ~6,70,000 | ईरान (संख्या में) |
| सक्रिय सैनिक | 6,10,000 | 1,70,000 | ईरान |
| रिजर्व फोर्स | 3,50,000 | 4,65,000 | इज़रायल |
| रक्षा बजट | ~$10-15 अरब | ~$28-30 अरब | इज़रायल |
| कुल लड़ाकू विमान | 551 (पुराने मॉडल) | 612 (F-35 जैसे आधुनिक) | इज़रायल |
| टैंकों की संख्या | ~1,996 | ~1,370 | ईरान |
| नौसेना (कुल जहाज) | 101 | 67 | ईरान (छोटी बोट्स अधिक) |
| पनडुब्बियां | 19 | 5 (परमाणु सक्षम) | ईरान (संख्या), इज़रायल (क्वालिटी) |
| मिसाइल क्षमता | 2,500+ बैलिस्टिक | ~100+ (जेरिको सीरीज) | ईरान (संख्या), इज़रायल (सटीकता) |
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🚀 मिसाइल और डिफेंस सिस्टम (मुख्य ताकत)
- ईरान: इसके पास मध्य पूर्व का सबसे बड़ा मिसाइल जखीरा है। इसकी ‘फत्ताह’ (Fattah) हाइपरसोनिक मिसाइलें और ‘शाहब-3’ इज़रायल तक पहुँचने में सक्षम हैं। ईरान ‘ड्रोन स्वार्म’ (ड्रोन का झुंड) तकनीक में भी माहिर है।
- इज़रायल: दुनिया का सबसे एडवांस एयर डिफेंस नेटवर्क। इसमें ‘आयरन डोम’ (कम दूरी), ‘डेविल्स स्लिंग’ (मध्यम दूरी) और ‘एरो-3’ (अंतरिक्ष में मिसाइल रोकने वाली) प्रणालियाँ शामिल हैं।
🔍 रणनीतिक विश्लेषण: कौन किस पर भारी?
1. ईरान का पलड़ा कहाँ भारी है?
- संख्या बल: ईरान के पास सैनिकों और टैंकों की संख्या बहुत अधिक है।
- भौगोलिक गहराई: ईरान का क्षेत्रफल इज़रायल से 75 गुना बड़ा है, जिससे उसे युद्ध में छिपने और संभलने की जगह मिलती है।
- प्रॉक्सी नेटवर्क: हिजबुल्लाह और हूतियों के जरिए ईरान इज़रायल को चारों तरफ से घेरने की क्षमता रखता है।
2. इज़रायल का पलड़ा कहाँ भारी है?
- तकनीक और वायुसेना: इज़रायल के पास अमेरिका निर्मित F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स हैं, जिन्हें ईरानी राडार पकड़ नहीं सकते।
- इंटेलिजेंस (मोसाद): इज़रायल की खुफिया एजेंसी ईरान के भीतर घुसकर सटीक हमले करने में माहिर है (जैसा कि हालिया हमलों में देखा गया)।
- परमाणु हथियार: हालांकि इज़रायल आधिकारिक पुष्टि नहीं करता, लेकिन माना जाता है कि उसके पास परमाणु बम हैं, जो एक बड़ा ‘डर’ (Deterrence) पैदा करते हैं।
💡 निष्कर्ष
ईरान एक ‘War of Attrition’ (लंबे समय तक चलने वाला युद्ध) जीतने की क्षमता रखता है, जबकि इज़रायल ‘High-Tech Surgical Strikes’ (सटीक और घातक हमले) में दुनिया में सबसे आगे है। अमेरिका का साथ इज़रायल की ताकत को कई गुना बढ़ा देता है।

