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ईरान ने रखा 60 दिन के युद्धविराम का रोडमैप

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, न्यूयॉर्क

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ता तलाशने की कोशिश एक बार फिर सामने आई है। क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से खबर है कि ईरान ने अमेरिका के सामने एक राजनयिक रोडमैप रखा है। इसमें पूरे क्षेत्र में 60 दिन तक युद्धविराम का प्रस्ताव शामिल है। इसके साथ ही रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को चरणबद्ध तरीके से खोलने और युद्ध समाप्त करने के लिए व्यापक बातचीत का समय तय करने की बात कही गई है। यह जानकारी क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से सामने आई है।

ईरान की ओर से रखे गए प्रस्ताव में अरब देशों पर हमले रोकने की बात भी बताई गई है। इसके बदले तेहरान अपनी उन मांगों को बातचीत का हिस्सा बनाना चाहता है, जिन्हें वह पहले से उठाता रहा है। इनमें ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना भी शामिल है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और नाकाबंदी हटाता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य को करीब सात दिन के भीतर दोबारा खोलने की संभावना हो सकती है।

अभी तक इस प्रस्ताव पर अमेरिका और ईरान के बीच किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है। बातचीत शुरुआती स्तर पर है। दोनों देशों की सार्वजनिक स्थितियों में अभी भी काफी अंतर दिखाई देता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जहां कूटनीति की संभावना खुली होने की बात कही है, वहीं वाशिंगटन ने सैन्य विकल्प को भी खुला रखा है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेज़ेश्कियन का कड़ा संदेश

इसी कूटनीतिक हलचल के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया। उन्होंने अमेरिका की नीतियों की कड़ी आलोचना की। अपने संबोधन में पेज़ेश्कियन ने कहा कि ईरान दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है।

उन्होंने अमेरिका की ओर से ईरान को आतंकवाद से जोड़ने वाली भाषा पर भी आपत्ति जताई। पेज़ेश्कियन ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति उन्हें आतंकवादी कहते हैं, जबकि ईरान खुद अमेरिकी कार्रवाई का शिकार रहा है। उनके भाषण का बड़ा हिस्सा युद्ध, अमेरिकी दबाव और ईरान की संप्रभुता के सवाल पर केंद्रित रहा।

पेज़ेश्कियन ने यह भी संकेत दिया कि तेहरान युद्ध का कूटनीतिक समाधान चाहता है। हालांकि उनका कहना था कि बातचीत तभी आगे बढ़ सकती है जब अमेरिका ईरान की प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार करे।

उनके मुताबिक अमेरिका यदि समझौता चाहता है तो ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी हटाना जरूरी होगा। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी इसी संदर्भ में उठाया। ईरान का कहना है कि इस जलमार्ग से क्षेत्र के दूसरे देशों को आर्थिक लाभ मिलता है, इसलिए ईरान को भी इससे संबंधित आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों का लाभ मिलना चाहिए।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस के परिवहन के लिए इसका बड़ा महत्व है। यहां किसी भी तरह की लंबी रुकावट का असर सिर्फ ईरान और उसके पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।

मौजूदा संघर्ष में होर्मुज को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है। ईरान ने पहले भी संकेत दिया है कि सैन्य दबाव कम होने और अमेरिकी नाकाबंदी हटने की स्थिति में जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर विचार किया जा सकता है। 22 सितंबर को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के हवाले से रॉयटर्स ने बताया था कि तेहरान करीब एक सप्ताह में होर्मुज खोलने के लिए तैयार हो सकता है, बशर्ते अमेरिका सैन्य दबाव कम करे और बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाए।

अब सामने आए नए रोडमैप में भी होर्मुज को चरणबद्ध तरीके से खोलने का प्रस्ताव बताया गया है। इसका अर्थ यह है कि जलमार्ग को एक साथ पूरी तरह खोलने के बजाय सुरक्षा और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए धीरे धीरे सामान्य किया जा सकता है।

ईरान की शर्तों में क्या शामिल है?

ईरान की ओर से बातचीत के लिए कई शर्तें सामने आई हैं। इनमें सबसे प्रमुख अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना है। इसके अलावा तेहरान युद्ध समाप्त करने और ईरानी संपत्तियों पर लगी पाबंदियों से जुड़े मुद्दे भी उठाता रहा है।

न्यूयॉर्क में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच कूटनीतिक संपर्क हुआ। दोनों पक्षों के बीच बातचीत मध्यस्थों के जरिए आगे बढ़ी। रिपोर्टों के मुताबिक न्यूयॉर्क में हुई चर्चा में होर्मुज और युद्ध समाप्त करने के संभावित रास्ते पर भी बातचीत हुई।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्ष ईरान की सभी मांगों पर सहमत हैं। यही वजह है कि फिलहाल इस संपर्क को संभावित समझौते की दिशा में शुरुआती कूटनीतिक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

अमेरिका ने भी बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया

वाशिंगटन की ओर से भी कूटनीति के लिए दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि बातचीत की संभावना बनी हुई है। लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने सैन्य विकल्प को भी खत्म नहीं किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संदेश भी अलग अलग संकेत देते रहे हैं। न्यूयॉर्क में हुई बातचीत के बाद ट्रंप ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच संपर्क को सकारात्मक बताया और संभावित समझौते की दिशा में गति होने की बात कही। दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र में उनके भाषण में ईरान को लेकर कड़ा रुख दिखाई दिया।

इससे यह संकेत मिलता है कि वाशिंगटन में कूटनीतिक विकल्प पर विचार तो हो रहा है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन अभी अपने दूसरे विकल्पों को बंद करने की स्थिति में नहीं है।

खाड़ी देशों की बढ़ी चिंता

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। होर्मुज और आसपास के समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिम भी बढ़े हैं।

कतर इस तनाव को कम करने की कोशिशों में शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक कतर ने पाकिस्तान और दूसरे देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय तनाव कम करने तथा होर्मुज के जरिए सुरक्षित समुद्री आवाजाही बनाए रखने की कोशिश की है।

रूस और सऊदी अरब के शीर्ष नेतृत्व ने भी हाल में होर्मुज और बाब अल मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही की जरूरत पर जोर दिया है।

इससे पता चलता है कि मौजूदा संकट का असर केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों तक सीमित नहीं है। खाड़ी की अर्थव्यवस्था, तेल व्यापार और वैश्विक समुद्री परिवहन भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।

60 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव कितना आगे बढ़ सकता है?

ईरान के कथित रोडमैप में 60 दिन तक क्षेत्रीय युद्धविराम की बात महत्वपूर्ण है। यदि इस पर सहमति बनती है तो यह लंबे समय से चल रहे संघर्ष में अस्थायी विराम का रास्ता खोल सकता है। इसके बाद व्यापक बातचीत शुरू करने का अवसर मिल सकता है।

लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रस्ताव समझौते में बदल जाएगा। दोनों देशों की मांगों में अंतर है। ईरान अमेरिकी सैन्य दबाव और नाकाबंदी खत्म करने पर जोर दे रहा है। अमेरिका दूसरी ओर ईरान से व्यापक सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों पर रियायतें चाहता है।

यही कारण है कि आने वाले दिनों में बातचीत का क्रम और दोनों पक्षों की शर्तों का क्रम बेहद महत्वपूर्ण होगा।

अभी समझौता नहीं, बातचीत का दौर

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने का कोई अंतिम समझौता घोषित नहीं हुआ है। 60 दिन के क्षेत्रीय युद्धविराम, होर्मुज को चरणबद्ध तरीके से खोलने और व्यापक वार्ता का रोडमैप अभी रिपोर्टों में सामने आया प्रस्ताव है। इसे अंतिम समझौता नहीं माना जा सकता।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दोनों पक्षों को एक ही कूटनीतिक मंच पर आने का अवसर दिया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने सार्वजनिक रूप से अपने देश की कठोर स्थिति दोहराई है। साथ ही उन्होंने कूटनीतिक समाधान की संभावना से भी इनकार नहीं किया।

अब मुख्य सवाल यह है कि क्या न्यूयॉर्क से शुरू हुआ यह कूटनीतिक संपर्क अगले दौर की बातचीत तक पहुंचता है। दूसरा सवाल यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य, अमेरिकी नाकाबंदी और क्षेत्रीय हमलों को लेकर दोनों पक्ष अपनी शर्तों में कितनी गुंजाइश देते हैं।

फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन 60 दिन के युद्धविराम और होर्मुज को चरणबद्ध तरीके से खोलने का प्रस्ताव यह जरूर बताता है कि युद्ध के बीच कूटनीति का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।

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