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मौलाना महमूद मदनी और डॉ. बू अब्दुल्ला की मुलाकात पर उठे बड़े सवाल

नौशाद अख्तर, नई दिल्ली

देश की राजनीति और मुस्लिम समुदाय के नेतृत्व को लेकर इन दिनों एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। खुद को मुसलमानों का रहनुमा और इस्लाम का ठेकेदार बताने वाले बड़े-बड़े इदारों के जिम्मेदारों पर इन दिनों अपनी रसूखदारी और रूतबा साबित करने का अजीब भूत सवार है। कुछ वक्त पहले सोशल मीडिया पर सूफीइज्म और ख्वाजा गरीब नवाज के नाम पर नुमाइंदगी का दावा करने वाले लोग अपनी कीमती और आलीशान गाड़ियों का खुलेआम मुजाहरा करते दिखाई दिए थे। अब इसी कड़ी में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सदर मौलाना महमूद मदनी की यूएई के मशहूर कारोबारी डॉ. बू अब्दुल्ला के साथ मुलाकात चर्चा का विषय बन गई है।

जानकारों के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि आखिर इस मुलाकात के मायने क्या हैं। क्या यह केवल एक औपचारिक और शिष्टाचार भेंट थी या इसके पीछे कोई व्यावसायिक और अंदरखाने की खिचड़ी पक रही है? इस मुलाकात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं बाजार में गर्म हैं।

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कौन हैं डॉ. बू अब्दुल्ला और क्या है मुलाकात की असल वजह?

आपको बता दें कि डॉ. बू अब्दुल्ला एक जाना-माना कारोबारी नाम हैं। बू अब्दुल्ला ग्रुप के तहत मिडिल ईस्ट में 270 से अधिक कंपनियां संचालित होती हैं। इस ग्रुप के बैनर तले बू अब्दुल्ला रियल एस्टेट और बू अब्दुल्ला बिजनेसमैन सर्विसेज जैसी बड़ी कंपनियां सबसे आगे हैं। ऐसे रसूखदार और व्यावसायिक शख्सियत के साथ मौलाना महमूद मदनी की यह मुलाकात कई तरह के सवाल खड़े करती है।

मुलाकात के फौरन बाद खुद डॉ. बू अब्दुल्ला ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर इस मीटिंग को लेकर लंबी चौड़ी और गदगद करने वाली जानकारी साझा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत दौरे के दौरान उनकी मुलाकात जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दुनिया के सबसे प्रभावशाली इस्लामिक चेहरों में शुमार मौलाना महमूद असद मदनी से हुई। इस पोस्ट में उनके खानदानी रसूख, आतंकवाद के खिलाफ बयानों और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कामों की तारीफ के पुल बांधे गए।

आम जनता और सुलगते सवाल

अब देश का आम मुसलमान यह सोचने पर मजबूर हो गया है कि एक ऐसे वक्त में जब देश के भीतर चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और वोटों की कथित चोरी को लेकर भारी हंगामा मचा हुआ है, तब खुद को कौम का दर्द बताने वाले रहनुमा इन मुद्दों पर चुप्पी क्यों साधे हैं। एक तरफ जहां देश का आम नागरिक और मतदाता अपने बुनियादी अधिकारों और लोकतांत्रिक सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की वीआईपी मुलाकातों और ऐश-ओ-आराम का प्रदर्शन आम जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।

विश्लेषकों का मानना है कि जब देश के विभिन्न हिस्सों में मुसलमानों के वोट कटने के गंभीर आरोप लग रहे हैं और समुदाय हाशिए पर खड़े होकर अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है, तब बड़े धार्मिक मंचों के आकाओं का इस प्रकार उद्योगपतियों के साथ गलबहियां करना जनता के साथ सरासर भद्दा मजाक है। अब देखना यह होगा कि खुद को रहनुमा कहने वाले इन नेताओं के पास जनता के इन तीखे सवालों का क्या जवाब होता है।

AEO के लिए सीधे सवाल और जवाब

मौलाना महमूद मदनी कौन हैं?
वह जमीयत उलेमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। संगठन की आधिकारिक वेबसाइट उन्हें वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में दर्ज करती है। Jamiat

डॉ. बू अब्दुल्ला कौन हैं?
वह यूएई के कारोबारी और बू अब्दुल्ला ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन हैं। उनकी कंपनी 270 से अधिक कंपनियों के समूह का दावा करती है। Bu Abdullah Invest

दोनों की मुलाकात क्यों हुई?
उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में मुलाकात का विस्तृत एजेंडा स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसे कारोबारी समझौते से जोड़ना अभी पुष्टि के बिना होगा।

क्या कोई बिजनेस डील हुई है?
ऐसी किसी डील या निवेश समझौते की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

क्या मुलाकात पर सवाल उठ रहे हैं?
हां। इसकी वजह दोनों व्यक्तियों की अलग अलग सार्वजनिक भूमिकाएं और मौजूदा राजनीतिक तथा सामाजिक माहौल है। हालांकि सवाल उठना और किसी निष्कर्ष का प्रमाण होना अलग बातें हैं।

SIR और वोटर लिस्ट विवाद का क्या संबंध है?
सीधा संबंध साबित नहीं है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत में SIR और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। विपक्ष गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि चुनाव आयोग ने प्रक्रिया का बचाव किया है।

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