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यूपी तूफान त्रासदी पर जमाअत ने उठाए सवाल

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आए भीषण तूफान, भारी बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। इस प्राकृतिक आपदा में सौ से अधिक लोगों की मौत के बाद चिंता और सवाल दोनों बढ़ गए हैं। इस बीच जमाअत ए इस्लामी हिंद ने इस त्रासदी पर गहरा दुख जताते हुए सरकार से आपदा प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों को मजबूत करने की मांग की है।

जमाअत ए इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि यह सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि ऐसी चेतावनी भी है जो बताती है कि देश में कमजोर तबकों की सुरक्षा और आपदा से निपटने की तैयारी को लेकर अभी बहुत काम बाकी है।

उन्होंने तूफान और बिजली गिरने से जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। साथ ही प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता जताई। प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके दर्द को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। कई लोगों के घर तबाह हो गए। रोजी रोटी के साधन खत्म हो गए। ऐसे समय में समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। लेकिन उनके असर को कम जरूर किया जा सकता है। इसके लिए मजबूत बुनियादी ढांचा, सुरक्षित मकान, बेहतर चेतावनी प्रणाली और समय पर राहत बेहद जरूरी है। उनका कहना था कि इस त्रासदी ने यह साफ कर दिया है कि कमजोर घरों में रहने वाले गरीब लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

प्रो. सलीम इंजीनियर ने राज्य सरकार की तरफ से शुरू की गई राहत और मुआवजा प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि तत्काल मदद जरूरी है, लेकिन सिर्फ मुआवजा देना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह ऐसी घटनाओं के मूल कारणों को समझने और भविष्य में नुकसान रोकने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करे।

उन्होंने कहा कि बिजली गिरने, इमारतों के गिरने और तेज हवाओं से हुए नुकसान की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। यह बताता है कि ग्रामीण और कमजोर इलाकों में सुरक्षा मानकों पर और काम करने की जरूरत है। खासकर ऐसे घरों में जहां लोग कच्चे मकानों में रहते हैं या बुनियादी सुविधाओं की कमी है।

जमाअत के उपाध्यक्ष ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि सरकारें आपदा आने के बाद राहत बांटने तक सीमित न रहें। उन्हें पहले से तैयारी करनी होगी। उन्होंने शुरुआती चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, मौसम संबंधी सूचनाओं को गांव गांव तक पहुंचाने और लोगों को जागरूक बनाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि अगर लोगों को समय रहते खतरे की जानकारी मिले तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन का भी जिक्र किया। कहा कि बीते कुछ वर्षों में मौसम का मिजाज तेजी से बदला है। अचानक तूफान, बेमौसम बारिश और बिजली गिरने जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में सरकारों को पुराने तरीके छोड़कर नई चुनौतियों के हिसाब से तैयारी करनी होगी। सिर्फ आपदा के बाद प्रतिक्रिया देने से काम नहीं चलेगा। रोकथाम और तैयारी को प्राथमिकता बनाना होगा।

प्रो. सलीम इंजीनियर ने मीडिया की भूमिका को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मानवीय त्रासदी को मुख्यधारा मीडिया और सोशल मीडिया में उतनी जगह नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए थी। उनका मानना है कि जब बड़ी संख्या में लोग जान गंवाते हैं तो यह सिर्फ एक खबर नहीं होती बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अक्सर गंभीर सामाजिक मुद्दे चर्चा से बाहर रह जाते हैं जबकि सनसनीखेज और भावनात्मक विषय ज्यादा सुर्खियां बटोर लेते हैं। इसका असर यह होता है कि असली समस्याएं दब जाती हैं और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया कमजोर पड़ती है। उन्होंने मीडिया, नागरिक समाज और सरकारी संस्थाओं से अपील की कि वे प्रभावित लोगों की आवाज को सामने लाएं ताकि उनकी तकलीफ नजरअंदाज न हो।

जमाअत ए इस्लामी हिंद ने सरकार से इस पूरी आपदा का व्यापक मूल्यांकन करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सिर्फ राहत पहुंचाना काफी नहीं होगा। यह समझना जरूरी है कि किन वजहों से नुकसान इतना ज्यादा हुआ और भविष्य में इसे कैसे रोका जा सकता है।

प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी सरकार का बुनियादी दायित्व होता है। इसलिए जरूरी है कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाए और जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि हर त्रासदी हमें कुछ सिखाकर जाती है। सवाल यह है कि क्या हम उससे सीखते हैं या नहीं।

उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में आए तूफान और बिजली गिरने की घटनाओं ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। कई परिवारों ने अपनों को खोया। खेतों को नुकसान हुआ। घर ढह गए। स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बदलते मौसम और बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के दौर में क्या हमारी तैयारी पर्याप्त है।

फिलहाल राहत कार्य जारी हैं। प्रभावित परिवार मदद की उम्मीद में हैं। वहीं जमाअत ए इस्लामी हिंद की अपील ने आपदा प्रबंधन, मीडिया की प्राथमिकताओं और सरकारी तैयारियों पर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि इस त्रासदी के बाद सरकार सिर्फ राहत तक सीमित रहती है या भविष्य के लिए ठोस कदम भी उठाए जाते हैं।

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