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बंगाल हिंसा में TMC नेता अब्दुल कादिर हक गिरफ्तार

कूचबिहार

: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर चुनाव बाद हिंसा का मुद्दा तेज हो गया है। 2026 विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सामने आए हिंसा और हमलों के आरोपों के बीच पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के नेता अब्दुल कादिर हक को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर चुनाव के बाद कथित शारीरिक हमला और हिंसा में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

पश्चिम बंगाल पुलिस ने सोमवार को कूचबिहार में टीएमसी नेता अब्दुल कादिर हक को हिरासत में लिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तारी पोस्ट पोल हिंसा से जुड़े आरोपों के आधार पर की गई है। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य शिकायतों को भी खंगाल रही है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब 2021 की चुनाव बाद हिंसा से जुड़े मामलों को लेकर राज्य में नई जांच शुरू की गई है। प्रशासन ने पुराने मामलों की समीक्षा तेज कर दी है। अब तक 458 नई जांच शुरू की जा चुकी हैं। साथ ही 181 नई एफआईआर दर्ज की गई हैं। इतना ही नहीं, 59 ऐसे मामलों को भी फिर से खोला गया है, जिनमें पहले अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी थी।

राज्य सरकार की इस नई सक्रियता को राजनीतिक नजर से भी देखा जा रहा है। हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पुलिस को निर्देश दिया था कि 2021 चुनाव बाद हिंसा से जुड़े हत्या और हमले के उन सभी मामलों में भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज की जाए, जिनकी अब तक ठीक से जांच नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों से आगे आने की अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि जिन लोगों के पास सबूत नहीं हैं, वे भी शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस जांच करेगी और सच सामने लाया जाएगा। इस बयान के बाद पुलिस की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह कदम सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं है। इसके पीछे बदलते राजनीतिक समीकरण भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। मई 2026 में भाजपा की चुनावी जीत के बाद राज्य की सत्ता में बदलाव हुआ है। उसके बाद कई टीएमसी नेताओं पर कथित रंगदारी, हिंसा और जमीन कब्जाने जैसे आरोपों में कार्रवाई शुरू हुई है।

इसी बीच तृणमूल कांग्रेस ने इन घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल उठाए हैं।

टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव बाद हुई हिंसा पर दुख जताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखे संदेश में उन्होंने हिंसा से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही आरोप लगाया कि हालिया विधानसभा चुनाव की मतगणना के दौरान केंद्रीय बल मूक दर्शक बने रहे।

अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि कई विधानसभा क्षेत्रों में टीएमसी उम्मीदवारों और उनके काउंटिंग एजेंटों को मतगणना केंद्रों से जबरन हटाया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।

हालांकि विपक्ष इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जिन लोगों पर हिंसा के आरोप हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।

पश्चिम बंगाल लंबे समय से चुनावी हिंसा को लेकर चर्चा में रहा है। हर बड़े चुनाव के बाद राजनीतिक दल एक दूसरे पर हमलों, धमकियों और राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप लगाते रहे हैं। 2021 विधानसभा चुनाव के बाद भी कई इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। उस समय भी विपक्ष ने टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए थे, जबकि सत्तारूढ़ दल ने उन्हें खारिज किया था।

अब 2026 के राजनीतिक बदलाव के बाद पुराने मामलों का फिर से खुलना कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह न्याय की दिशा में उठाया गया कदम है, या फिर राजनीतिक संघर्ष का नया अध्याय। इस पर राय बंटी हुई है।

लेकिन एक बात साफ है। चुनाव खत्म होने के बाद भी बंगाल की राजनीति शांत होती नजर नहीं आ रही। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या चुनाव बाद हिंसा के मामलों में कोई बड़ा राजनीतिक असर देखने को मिलता है।