ट्रंप का दावा: ईरान युद्ध खत्म होने के करीब, 3 हफ्ते अहम
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, वाॅशिंगटन
वॉशिंगटन से आई ताज़ा खबरों में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। अपने पहले प्राइम-टाइम राष्ट्रीय संबोधन में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना जल्द ही “मिशन पूरा कर लेगी” और युद्ध के “मुख्य रणनीतिक लक्ष्य लगभग हासिल हो चुके हैं।” यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब एक महीने से अधिक समय से जारी इस संघर्ष ने वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को हिला कर रख दिया है।
“हम काम पूरा कर देंगे” — ट्रंप का आत्मविश्वास
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ट्रंप ने पूरी मजबूती के साथ युद्ध का बचाव किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने पिछले चार हफ्तों में “तेज़, निर्णायक और जबरदस्त जीत” हासिल की है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर अपने सैन्य अभियान को समाप्त कर सकता है।
उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “सालों से कहा जा रहा था कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए, लेकिन जब कार्रवाई का समय आता है, तो सिर्फ शब्दों से काम नहीं चलता।”

बदलते बयानों के बीच स्पष्ट रणनीति की कोशिश
यह संबोधन ट्रंप के लिए एक बड़ा मंच था, जहां वे युद्ध के उद्देश्य को स्पष्ट कर सकते थे। पिछले कुछ हफ्तों में उनके बयानों में कई बार विरोधाभास देखने को मिला—कभी वह युद्ध खत्म करने की बात करते हैं, तो कभी सैन्य कार्रवाई बढ़ाने की चेतावनी देते हैं।
हालांकि इस बार उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की कि अमेरिका अपने लक्ष्यों के करीब है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर ईरान पर और कड़े हमले जारी रहेंगे।
ईरान और क्षेत्र में बढ़ता तनाव
ट्रंप के भाषण से ठीक पहले ईरान ने दुबई (यूएई) और इजरायल पर मिसाइल हमले किए, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। वहीं, अमेरिकी और इजरायली हवाई हमले तेहरान समेत कई इलाकों में जारी हैं।
इस बीच, हजारों अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों को मध्य पूर्व में भेजा जा रहा है, जिससे जमीनी युद्ध (ग्राउंड ऑफेंसिव) की आशंकाएं भी तेज हो गई हैं।
तेल की कीमतें और वैश्विक असर
इस युद्ध का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 40% से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
ट्रंप ने अपने संबोधन में स्वीकार किया कि तेल की कीमतें और वित्तीय बाजार अस्थिर हुए हैं, लेकिन उन्होंने इसे अस्थायी बताते हुए कहा कि हालात जल्द सामान्य हो जाएंगे।
“हम उनका तेल ले सकते हैं” — विवादित बयान
ईस्टर लंच के दौरान ट्रंप ने एक और विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहे तो ईरान का तेल “सीधे अपने कब्जे में ले सकता है।”
उन्होंने कहा, “हम बहुत आसानी से उनका तेल ले सकते हैं, लेकिन देश के लोग शायद इतना धैर्य नहीं रखते। लोग चाहते हैं कि हम जीतें और वापस आ जाएं।”
हालांकि, यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, क्योंकि इससे अमेरिका की मंशा पर सवाल उठ सकते हैं।
होरमुज जलडमरूमध्य पर टकराव
ईरान और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा विवाद होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने इस मार्ग को बाधित करना जारी रखा, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी अन्य देशों—जैसे जापान, दक्षिण कोरिया और चीन—को भी उठानी चाहिए।
अमेरिका में बढ़ता विरोध
इस युद्ध को लेकर अमेरिका के भीतर भी विरोध बढ़ रहा है। कई सर्वेक्षणों में सामने आया है कि बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक मानते हैं कि देश की सेना ईरान में “हद से आगे बढ़ गई है।”
महंगाई, ईंधन की कीमतों और आर्थिक दबाव ने भी ट्रंप प्रशासन पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ा दिया है।

ईरान का सख्त रुख
दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह दबाव में झुकने वाला नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, “आप धमकियों और समयसीमा की भाषा में ईरान से बात नहीं कर सकते। हम अपनी रक्षा के लिए किसी समयसीमा का पालन नहीं करते।”
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए सवाल उठाया कि “इस युद्ध से वास्तव में अमेरिकी लोगों को क्या फायदा हो रहा है?”
कूटनीतिक प्रयासों पर अनिश्चितता
अमेरिका ने युद्धविराम के लिए 15 सूत्रीय योजना पेश की है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और होरमुज जलडमरूमध्य को खोलने की मांग शामिल है।
लेकिन ईरान ने इस पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका के साथ भरोसे का स्तर “शून्य” है और बातचीत से कोई ठोस नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति बेहद जटिल और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। अगर अमेरिका जमीनी सैन्य कार्रवाई करता है या ईरान के तेल ठिकानों पर हमला करता है, तो यह संघर्ष और व्यापक हो सकता है।
इसके अलावा, इजरायल की भूमिका और क्षेत्रीय शक्तियों की भागीदारी भी इस युद्ध को और गंभीर बना सकती है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप का यह संबोधन एक ओर जहां युद्ध खत्म होने का संकेत देता है, वहीं दूसरी ओर इसमें कई अनिश्चितताएं भी छिपी हैं। “मिशन पूरा होने” का दावा भले ही आश्वस्त करने वाला लगे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण हैं।
दुनिया की नजरें अब आने वाले हफ्तों पर टिकी हैं—क्या सच में यह युद्ध खत्म होगा, या फिर यह एक बड़े और लंबा खिंचने वाले संघर्ष की शुरुआत है।

