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कतर में अमेरिका ईरान वार्ता पर बढ़ीं उम्मीदें, संशय बरकरार

मुस्लिम नाउ ब्यूरो,तेहरान

मध्य पूर्व में हालिया सैन्य तनाव के बाद एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावना चर्चा में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने बातचीत का अनुरोध किया है और दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मुलाकात कतर की राजधानी दोहा में होगी। दूसरी ओर ईरान ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा है कि इस सप्ताह अमेरिका के साथ किसी औपचारिक तकनीकी वार्ता की योजना नहीं है।

दोनों देशों के अलग अलग बयानों ने स्थिति को और उलझा दिया है। हालांकि कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि संपर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और संवाद के कुछ रास्ते अब भी खुले हुए हैं।

ट्रंप का दावा

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान ने बैठक का अनुरोध किया है और यह मुलाकात दोहा में होगी।

उन्होंने यह नहीं बताया कि बैठक में कौन शामिल होगा और एजेंडा क्या रहेगा। इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के सलाहकार जेरेड कुशनर इस सप्ताह कतर जाएंगे। उन्होंने कहा कि वहां उच्च स्तरीय बैठकें प्रस्तावित हैं।

अमेरिकी प्रशासन की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले सप्ताह दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया था।

ईरान ने क्या कहा

ट्रंप के दावे के कुछ ही समय बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ किसी निर्धारित तकनीकी वार्ता की योजना नहीं है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने सरकारी मीडिया से कहा कि इस सप्ताह अमेरिका के साथ ऐसी किसी बैठक का कार्यक्रम तय नहीं किया गया है।

हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि ईरान की एक विशेषज्ञ टीम दोहा जाएगी। यह प्रतिनिधिमंडल ईरान की विदेशों में जमी वित्तीय संपत्तियों को मुक्त कराने से जुड़े मामलों पर चर्चा करेगा।

यानी दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनीतिक वार्ता से इनकार किया गया है, लेकिन तकनीकी और आर्थिक स्तर पर संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

संवाद के रास्ते अभी खुले

कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए समझौते के बाद कई तकनीकी विषयों पर काम जारी है।

एक राजनयिक ने बताया कि समझौते को लागू करने से जुड़े विशेषज्ञ समूह आने वाले दिनों में दोहा में मिल सकते हैं। उनका कहना था कि दोनों देशों ने हालिया सैन्य टकराव के बाद भी संवाद बनाए रखने के लिए विशेष संपर्क तंत्र तैयार किया है ताकि किसी नई घटना की स्थिति में तनाव को नियंत्रित किया जा सके।

अमेरिका के एक अधिकारी ने भी संकेत दिया कि बातचीत पूरी तरह रुकी नहीं है और दोनों पक्ष फिलहाल सैन्य कार्रवाई से पीछे हटने पर सहमत हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा मुद्दा

अमेरिका और ईरान के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है।

यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरती है।

हालिया तनाव के दौरान इस क्षेत्र में कई घटनाएं सामने आईं। अमेरिका ने ईरान पर वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।

इन घटनाओं के बाद पूरी दुनिया की नजर इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर टिक गई है।

ओमान के साथ हुई अहम बैठक

ईरान ने बताया कि उसने ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रबंधन पर पहली संयुक्त बैठक की है।

ग़रीबाबादी ने कहा कि मस्कट में हुई बैठक के दौरान दोनों देशों ने मौजूदा हालात की समीक्षा की और भविष्य की व्यवस्था पर विचार साझा किए।

होर्मुज जलडमरूमध्य का बड़ा हिस्सा ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्र में आता है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत दोनों देशों को समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करनी होती है। यही कारण है कि इस क्षेत्र की स्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

फ्रांस को ईरान की चेतावनी

इस बीच फ्रांस और ओमान ने संयुक्त रूप से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने की योजना का संकेत दिया।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में इस दिशा में सहयोग की बात कही गई।

ईरान ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।

ग़रीबाबादी ने कहा कि समझौते के अनुसार समुद्री मार्ग से बारूदी सुरंग हटाने का अधिकार केवल ईरान के पास है। उन्होंने फ्रांस को चेतावनी देते हुए कहा कि वह इस संवेदनशील स्थिति को और जटिल बनाने से बचे।

ईरान का कहना है कि बाहरी देशों की दखलअंदाजी क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

जहाजों की आवाजाही पर असर

हालिया घटनाओं का असर समुद्री व्यापार पर भी दिखाई दिया।

समुद्री निगरानी कंपनियों के अनुसार सप्ताहांत में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या कम हो गई।

कई जहाजों ने अपनी वास्तविक स्थिति सार्वजनिक रूप से साझा करना भी बंद कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा कारणों से जहाज संचालकों ने यह कदम उठाया।

हालांकि अधिकांश जहाज अब भी ईरान के निकट निर्धारित समुद्री मार्ग का उपयोग कर रहे हैं।

आगे क्या हो सकता है

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में औपचारिक बैठक होगी।

अमेरिका का कहना है कि बातचीत की तैयारी चल रही है। ईरान औपचारिक बैठक से इनकार कर रहा है, लेकिन तकनीकी स्तर पर संपर्क बनाए हुए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष संवाद जारी रखते हैं तो हालिया सैन्य तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं यदि बातचीत आगे नहीं बढ़ती तो होर्मुज जलडमरूमध्य और पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता फिर बढ़ सकती है।

दुनिया की निगाह अब दोहा पर टिकी है, जहां होने वाली हर गतिविधि मध्य पूर्व की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर असर डाल सकती है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: डोनाल्ड ट्रंप ने क्या दावा किया है?
उत्तर: ट्रंप ने कहा है कि ईरान ने कतर में बैठक का अनुरोध किया है और दोनों पक्षों के बीच दोहा में मुलाकात हो सकती है।

प्रश्न: क्या ईरान ने इस दावे की पुष्टि की है?
उत्तर: नहीं। ईरान ने अमेरिका के साथ किसी निर्धारित तकनीकी वार्ता से इनकार किया है, हालांकि उसने दोहा में विशेषज्ञ प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात कही है।

प्रश्न: होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर: दुनिया के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। इसलिए यहां की स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करती है।

प्रश्न: फ्रांस को ईरान ने क्यों चेतावनी दी?
उत्तर: फ्रांस और ओमान की प्रस्तावित समुद्री बारूदी सुरंग हटाने की योजना पर ईरान ने आपत्ति जताई और कहा कि इस काम का अधिकार केवल ईरान को है।

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