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Uttar Pradesh Muslims Success Story : ज़हीर फारूकी ने बदली पुरकाज़ी की तस्वीर

मुस्लिम नाउ विशेष

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले का छोटा सा कस्बा पुरकाज़ी आज एक अलग वजह से चर्चा में है। यहां के नगर पंचायत अध्यक्ष ज़हीर फारूकी ने विकास की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा अब आसपास के जिलों से निकलकर पूरे उत्तर भारत तक पहुंच रही है। राजनीति में अक्सर वादे सुनाई देते हैं, लेकिन पुरकाज़ी में एक जनप्रतिनिधि ने अपने काम से भरोसा बनाने की कोशिश की है।

मुस्लिम नाउ की विशेष सीरीज Uttar Pradesh Muslims Success Story में आज बात ऐसे शख्स की, जिन्होंने शिक्षा, सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और पशुपालन जैसे मुद्दों को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीन पर बदलाव की कोशिश की।

ज़हीर फारूकी का सबसे चर्चित फैसला तब सामने आया जब उन्होंने नगर के पहले इंटरमीडिएट कॉलेज के निर्माण के लिए अपनी करीब 1.5 करोड़ रुपये की निजी जमीन दान कर दी। आजादी के 75 साल बाद भी पुरकाज़ी में ऐसा कोई स्कूल नहीं था, जहां बच्चे 12वीं तक पढ़ सकें। खासकर गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे कस्बों का रुख करना पड़ता था। कई छात्र दूरी और खर्च की वजह से पढ़ाई बीच में छोड़ देते थे।

फारूकी ने इस कमी को सिर्फ समस्या की तरह नहीं देखा। उन्होंने समाधान भी दिया। उनका मानना है कि किसी भी समाज की असली तरक्की शिक्षा से शुरू होती है।

पेशा से वकील और किसान नेता रहे ज़हीर फारूकी ने नगर पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद स्कूलों की हालत सुधारने पर ध्यान दिया। प्राथमिक विद्यालयों में डेस्क और कुर्सियों की व्यवस्था कराई गई। कई स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर भी दिखा। यही वजह रही कि यहां का विद्यालय बाद में पीएम श्री स्कूल योजना में शामिल हुआ।

शिक्षा के साथ उन्होंने पशुपालन और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी काम किया। पुरकाज़ी में देश की पहली दो मंजिला सरकारी गौशाला तैयार की गई। यह पहल इसलिए भी खास मानी गई क्योंकि कई जगह गौशाला निर्माण के लिए बजट होने के बावजूद काम पूरा नहीं हो सका था।

इस गौशाला में गर्भवती, घायल और बूढ़ी गायों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। बिजली के लिए सोलर पैनल लगाए गए हैं। चारा काटने की मशीन मौजूद है। पशु चिकित्सक की सेवा भी नियमित रूप से उपलब्ध रहती है। यहां तैयार होने वाली जैविक खाद को बेचकर इसे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की गई।

नगर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी फारूकी का मॉडल चर्चा में रहा। उन्होंने पूरे कस्बे में आईपी आधारित सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क तैयार कराया। ये कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट पढ़ने की क्षमता रखते हैं और नगर के प्रवेश तथा निकास बिंदुओं पर लगाए गए हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार इन कैमरों का असर अपराध नियंत्रण में दिखा। एक चर्चित मामले में इनकी मदद से उत्तराखंड के एक आरोपी की गिरफ्तारी भी संभव हो सकी। कैमरों से जुड़े लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल सार्वजनिक घोषणाओं और आपातकालीन सूचना देने में भी किया जाता है।

महिलाओं के लिए 2019 में खोला गया जिम भी पुरकाज़ी में चर्चा का विषय बना। एक ऐसे इलाके में जहां पर्दा प्रथा का असर गहरा माना जाता है, वहां महिलाओं के लिए अलग फिटनेस सेंटर शुरू करना आसान फैसला नहीं था। लेकिन आज यह जिम करीब 100 महिलाओं के लिए स्वास्थ्य और आत्मविश्वास का केंद्र बन चुका है।

इतिहास को सहेजने की दिशा में भी ज़हीर फारूकी ने काम किया। 1857 की क्रांति से जुड़े सुलीवाला बाग को विकसित किया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह वह स्थान है जहां स्वतंत्रता सेनानियों को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। अब हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को यहां बड़ी तिरंगा यात्रा निकाली जाती है।

ज़हीर फारूकी की पहचान केवल एक नगर पंचायत अध्यक्ष की नहीं बन रही। पुरकाज़ी में कई लोग उन्हें ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में देखते हैं जो राजनीति को सेवा से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मॉडल यह संदेश देता है कि छोटे कस्बों में भी बड़े बदलाव संभव हैं, अगर इरादा साफ हो और काम जमीन पर दिखे।

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